‘मराठी हमारी मां, बाकी भाषाएं...’, भाषा विवाद पर बोले CM देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र में भाषा के मुद्दे पर CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मराठी को सर्वोच्च सम्मान मिलेगा, लेकिन दूसरी भारतीय भाषाएं बोलने वालों के साथ भाषा के आधार पर अन्याय नहीं होगा.

मुंबई में आयोजित पांचजन्य सुशासन संवाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भाषा और मराठी को लेकर सरकार का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि भाषा उनके लिए संवाद का माध्यम है, विवाद का नहीं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी को प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन दूसरी भाषाएं बोलने वाले लोगों के साथ भाषा के आधार पर अन्याय नहीं किया जाएगा.
देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, "हमारे लिए तो भाषा हमेशा संवाद का माध्यम रही है. हम कभी यह मानते नहीं कि भाषा ही विवाद का माध्यम होना चाहिए. और जहां तक महाराष्ट्र का सवाल है, 2014 से जब से भारतीय जनता पार्टी ने शासन संभाला है या हमारी महायुति की सरकार रही है, हमने कभी भी भाषा के आधार पर महाराष्ट्र में अन्याय नहीं होने दिया है."
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उन्होंने आगे कहा, "यह बात अलग है कि महाराष्ट्र में कुछ पार्टियां ऐसी हैं, जो केवल भाषा के आधार पर राजनीति करना चाहती हैं. हमारा हमेशा यह मानना है और भारतीय जनता पार्टी का यह मानना है कि क्षेत्रीय अस्मिता का सम्मान होना चाहिए. हर मातृभाषा का सम्मान होना चाहिए, लेकिन साथ-साथ सारी भारतीय भाषाओं का भी सम्मान होना चाहिए."
#WATCH | Mumbai: At the Panchjanya Sushasan Samvad, Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis says, "For us, language has always been a medium of communication. We never believe that language should become a cause for conflict. As far as Maharashtra is concerned, since the… pic.twitter.com/dvWVSNOIsW
— ANI (@ANI) October 1, 2026
‘महाराष्ट्र में मराठी को प्राधान्य मिलेगा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की अपनी भाषा और मातृभाषा मराठी है, इसलिए राज्य में मराठी को प्राथमिकता मिलना स्वाभाविक है. हालांकि, उन्होंने दूसरी भाषा बोलने वाले लोगों के अधिकारों और सम्मान की भी बात कही.
उन्होंने कहा, "मैं ऐसा मानता हूं कि जहां तक महाराष्ट्र का सवाल है, बिल्कुल यहां पर मराठी को प्राधान्य मिलेगा. महाराष्ट्र की अपनी भाषा है, मातृभाषा है. लेकिन साथ-साथ अन्य भाषा बोलने वाले लोगों पर केवल इसलिए कि वे दूसरी भाषा बोलते हैं, कभी अन्याय नहीं होगा."
टैक्सी-ऑटो चालकों के लिए मराठी सीखने का मुद्दा
फड़नवीस ने टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए कामचलाऊ मराठी सीखने से जुड़े फैसले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस फैसले को अलग तरीके से पेश किया गया, जबकि इसका उद्देश्य केवल इतनी मराठी सिखाना था, जिससे रोजमर्रा के काम में आसानी हो सके.
उन्होंने कहा, "एक बात मैं और बताना चाहता हूं कि एक चीज को अलग तरीके से प्रदर्शित किया गया. जिस समय महाराष्ट्र में हमारे एक विभाग ने यह निर्णय किया कि जो हमारे यहां टैक्सी चलाते हैं, ऑटो चलाते हैं, ऐसे जो हमारे अलग-अलग भाषा बोलने वाले भाई हैं, इनको कामचलाऊ मराठी सीखनी चाहिए, तो किसी ने इस प्रकार से उसको चलाया कि मानो अब मराठी एक प्रकार से उनके ऊपर सख्ती की गई है, कंपल्सरी कर दिया गया है."
‘दो पन्ने का सिलेबस था’
मुख्यमंत्री ने बताया कि मराठी सीखने के लिए बनाया गया सिलेबस केवल दो पन्नों का था. इसमें रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल होने वाले सामान्य वाक्य शामिल थे. उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर दो पन्ने का सिलेबस था, दो पन्ने का, जिसमें उनको इतना ही सीखना था. जैसे आइए, बैठिए, आप कहां जाना चाहते हैं, ‘कुठे जाणार आहेत?’ ऐसे बिल्कुल मामूली दो पन्ने का सिलेबस था. मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे मुंबई के टैक्सी यूनियन और जो ऑटो यूनियन है, उसके हमारे हिंदी भाषी जितने भाई हैं, इन्होंने मुझसे मिलकर यह कहा कि हम यह पढ़ना चाहते हैं."
फड़नवीस ने कहा कि हिंदी भाषी टैक्सी और ऑटो चालकों ने खुद कामचलाऊ मराठी सीखने की इच्छा जताई थी. उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें पर्याप्त समय दिया जाएगा और किसी तरह की सख्ती नहीं होगी.
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि हमको कामचलाऊ मराठी आए, लेकिन इसके लिए हमको समय चाहिए. हमने कहा, आपको जितना समय चाहिए, उतना लीजिए. कोई प्रॉब्लम नहीं है. किसी के ऊपर सख्ती नहीं होगी. किसी का लाइसेंस हम लोग रद्द नहीं करेंगे. आप समय लीजिए."
‘मराठी हमारी मां, बाकी भाषाएं हमारी मौसी’
फड़नवीस ने कहा कि जिस राज्य में लोग रहते हैं, वहां की भाषा की कम से कम सामान्य जानकारी होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी का सम्मान सबसे ऊपर रहेगा, लेकिन दूसरी भारतीय भाषाओं को भी सम्मान दिया जाएगा.
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उन्होंने कहा, "लेकिन जिस राज्य में हम लोग रहते हैं, उसकी भाषा कम से कम कामचलाऊ भाषा यह हमको आनी चाहिए, और उन्होंने भी उसको मान्य किया. इसलिए आप यकीन मानिए, महाराष्ट्र में जब तक बीजेपी की सरकार है, तब तक भले ही मराठी का सर्वोच्च सम्मान होगा, लेकिन सारी भारतीय भाषाएं यहां सम्मानित होंगी. मराठी हमारी मां होगी तो बाकी भाषाएं हमारी मौसी होंगी."





















