उद्धव-राज ठाकरे की पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं! MNS का बड़ा हमला, 'BJP का समर्थन करने के लिए...'
Chandrapur Mayor Election: चंद्रपुर में उद्धव ठाकरे गुट के स्थानीय नेताओं के समर्थन से बीजेपी ने अपना मेयर बना दिया. इस सियासी तस्वीर ने महाराष्ट्र में सबको चौंका दिया.

महाराष्ट्र की सियासत से बड़ी खबर सामने आई है. महानगरपालिका चुनाव से पहले साथ आए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टी के बीच तनाव के संकेत मिले हैं. मामला चंद्रपुर मेयर चुनाव से जुड़ा है. यहां उद्धव ठाकरे गुट के स्थानीय नेताओं ने बीजेपी को समर्थन दे दिया इसके बाद यहां बीजेपी का मेयर बन गया. जबकि सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस थी. चंद्रपुर में कुल 66 सीट हैं. मेयर बनाने के लिए 34 बहुमत का आंकड़ा था. 23 सीटे जीतने वाली बीजेपी का उम्मीदवार मेयर बन गया. कांग्रेस ने यहां 30 सीटों पर कब्जा जमाया था.
उद्धव गुट के नेताओं ने एक-एक करोड़ रुपये लिए- देशपांडे
अब राज ठाकरे की पार्टी के नेता संदीप देशपांडे ने आरोप लगाया कि उद्धव गुट के पार्षदों ने बीजेपी का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए. संदीप देशपांडे के आरोपों का उद्धव गुट और बीजेपी ने खंडन किया है.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मुंबई MNS के अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने गुरुवार (12 फरवरी) को कहा कि जब उद्धव गुट बीजेपी को समर्थन करती है तो उसे सही माना जाता है. वहीं जब MNS एकनाथ शिंदे की शिवसेना का समर्थन करती है तो उसे गलत ठहराया जाता है.
बता दें कि कल्याण डोंबिवली महानगर पालिका चुनाव में राज ठाकरे की पार्टी ने स्थानीय स्तर पर शिंदे गुट का समर्थन किया और यहां पर शिवसेना का मेयर बन गया. MNS के स्थानीय नेताओं के इस फैसले की उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने जमकर आलोचना की थी.
शिवसेना (यूबीटी) के जिला अध्यक्ष ने क्या कहा?
शिवसेना (UBT) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे पार्षदों को धन मिलने के आरोप का प्रमाण पेश कर दें तो वह इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर शिवसेना (UBT) नेतृत्व का अपमान करने का भी आरोप लगाया.
शिवसेना (UBT) और MNS के बीच दूरी- BJP
देशपांडे ने संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के दौरान क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया था या उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी. सीनियर बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा और यह शिवसेना (UBT) और MNS के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है.
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