Iran War: '140 मिलियन बैरल ईरानी तेल...', अमेरिका ईरान को लेकर लेने जा रहा बड़ा फैसला, मजबूरी में यूटर्न लेंगे ट्रंप!
Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगे रोक को हटाने पर विचार कर रहा है. जानिए इससे तेल की कीमतों का भारत पर क्या असर पड़ेगा.

ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका अब एक बड़ा कदम उठा सकता है. खबर है कि अमेरिका समुद्र में जहाजों पर फंसे ईरान के तेल पर लगी पाबंदी हटा सकता है. इसका मकसद दुनिया में तेल की कमी को कम करना और कीमतों को काबू में रखना है. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल अभी जहाजों में पड़ा है. अगर इस पर से रोक हटा दी जाती है तो यह तेल बाजार में आ सकता है और सप्लाई बढ़ सकती है.
फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह अतिरिक्त तेल करीब 10 से 14 दिनों तक बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. अभी मिडिल ईस्ट में जारी लड़ाई के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे बाजार में दबाव बना हुआ है. यह कदम अमेरिका की पुरानी नीति से अलग माना जा रहा है. पहले अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने के लिए तेल पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त पाबंदी लगाता रहा है. हालांकि इससे पहले रूस के तेल के मामले में भी अमेरिका ने कुछ समय के लिए राहत दी थी.
चीन जा रहा है ईरान का तेल
अगर अमेरिका पाबंदी को हटा देता है तो अभी जो ईरानी तेल ज्यादातर चीन जा रहा है, वह दूसरे देशों में भी भेजा जा सकता है. इसमें भारत, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं. एशिया के देश तेल के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं, इसलिए यहां सप्लाई में थोड़ी भी कमी का बड़ा असर पड़ता है. इसी वजह से कई देश पहले ही दूसरे विकल्प तलाशने लगे हैं, जैसे कि अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदना. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा हालात में रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं. अगर अमेरिका यह फैसला लेता है तो कुछ समय के लिए तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में स्थिति पूरी तरह मिडिल ईस्ट के हालात पर ही निर्भर करेगी.























