कौन हैं सैयद इकबाल? उद्धव ठाकरे ने मुस्लिम नेता को बनाया मेयर, चढ़ा सियासी पारा
Parbhani Mayor Syed Iqbal: उद्धव ठाकरे गुट के पार्षद सैयद इकबाल परभणी महानगरपालिका के मेयर चुने गए हैं. वहीं कांग्रेस के गणेश देशमुख डिप्टी मेयर बने.

परभणी महानगर पालिका में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस गठबंधन ने सत्ता पर कब्जा जमाया. उद्धव ठाकरे की पार्टी की स्थापना के बाद पहली बार परभणी को मेयर मिला है. शिवसेना (UBT) के सैयद इकबाल मेयर चुने गए हैं, जबकि कांग्रेस के गणेश देशमुख डिप्टी मेयर बने हैं. इस चुनाव के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है. बीजेपी और शिंदे गुट ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी पर मराठी-अमराठी और हिंदुत्व के मुद्दे पर हमला बोला है.
परभणी शहर का समीकरण
मराठवाड़ा क्षेत्र का अहम शहर परभणी सामाजिक रूप से मिश्रित आबादी वाला इलाका है. शहर की कुल जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 20–25 फीसदी मानी जाती है. मराठा, ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों की मजबूत उपस्थिति के चलते यहां की राजनीति हमेशा संतुलन और गठबंधन पर निर्भर रही है. नगर निगम चुनावों में परभणी ने समय-समय पर कांग्रेस और शिवसेना-बीजेपी जैसे अलग-अलग राजनीतिक प्रयोग देखे हैं.
जाति-धर्म का मुद्दा क्यों बना केंद्र बिंदु?
सैयद इकबाल के मेयर चुने जाने के बाद सवाल प्रशासनिक योग्यता से ज्यादा पहचान की राजनीति पर टिक गया. बीजेपी और शिंदे गुट ने इस फैसले को मराठी मानुष की राजनीति और हिंदुत्व से समझौते के तौर पर पेश किया. वहीं शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने इसे
संविधान, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और समावेशी राजनीति से जोड़कर देखा.
खान बनाम बाण: 1980 का नारा और आज की राजनीति
परभणी की सियासत पर चर्चा करते हुए शिवसेना के अतीत का जिक्र भी सामने आया. 1980 के दशक में शिवसेना के उभार के दौरान “खान बनाम बाण” जैसा नारा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना था. ‘खान’ को मुस्लिम पहचान के प्रतीक के तौर पर देखा गया जबकि ‘बाण’ (तीर-कमान) शिवसेना और हिंदुत्व की पहचान माना जाता था. उस दौर में शिवसेना की राजनीति आक्रामक हिंदुत्व और मराठी अस्मिता के इर्द-गिर्द घूमती थी.
आज बीजेपी और शिंदे गुट इसी इतिहास की ओर इशारा करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि जो पार्टी कभी ‘खान बनाम बाण’ की राजनीति करती थी, वही आज मुस्लिम मेयर का समर्थन कर रही है.
मेयर चुनाव का पूरा गणित
मेयर पद के चुनाव में शिवसेना (UBT) के सैयद इकबाल को 39 वोट मिले, जबकि बीजेपी के उम्मीदवार तिरुमला खिल्लारे को 26 वोट प्राप्त हुए. डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस के गणेश देशमुख ने एनसीपी अजित पवार गुट की नाझेमा अब्दुल रहीम को 10 वोटों से हराया.
गणेश देशमुख: 37 वोट
नाझेमा अब्दुल रहीम: 27 वोट
कुल मिलाकर कांग्रेस के समर्थन के चलते उद्धव ठाकरे गुट को परभणी में मेयर बनाने में सफलता मिली और बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा.
BJP और शिंदे गुट का उद्धव ठाकरे पर हमला
मुस्लिम मेयर बनाए जाने के बाद बीजेपी और शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला. मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने कहा, “उद्धव ठाकरे अपनी पहचान खो चुके हैं. जो पार्टी खुद को मराठी मानुष की हितैषी बताती थी, वही आज अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है.” वहीं बीजेपी विधायक प्रसाद लाड ने तंज कसते हुए कहा, “अगली दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे हरी टोपी पहनकर बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्ववादी विचारों के खिलाफ भाषण देंगे.”
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी आरोप लगाते हुए कहा, “हिंदुत्व छोड़ने के कारण ही उद्धव ठाकरे को राजनीतिक पराजय झेलनी पड़ी. इसके बावजूद वे अब भी तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं.”
मेयर सैयद इकबाल का जवाब
इन तमाम आरोपों पर नवनिर्वाचित मेयर सैयद इकबाल ने साफ शब्दों में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, “मैं मराठी हूं, मेरी मातृभाषा मराठी है. उद्धव ठाकरे हमारे नेता हैं और वे जाति या धर्म का भेद नहीं करते. उनके पास विकास का विजन है और उसी रास्ते पर चलकर हम परभणी शहर का विकास करेंगे.”
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय जाधव ने कहा, "हमने जनता द्वारा दिए गए जनादेश के अनुसार ही सत्ता बनाई है. यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया है.” वहीं कांग्रेस विधायक अमिन पटेल ने कहा, "क्या देश में कभी मुस्लिम राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री या मेयर नहीं बने? क्या संविधान किसी मुस्लिम को मेयर बनने से रोकता है?”
महाराष्ट्र की राजनीति फिर गरम
गौरतलब है कि मराठी-अमराठी का मुद्दा मुंबई बीएमसी चुनावों के दौरान काफी गरमाया था. अब परभणी में उद्धव ठाकरे गुट के मुस्लिम मेयर बनने के बाद एक बार फिर यही मुद्दा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की वजह बन गया है.परभणी के इस राजनीतिक घटनाक्रम ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा दिया है.
संजय राउत का शिंदे पर पलटवार
संजय राउथ ने उपमुख्यमंत्री शिंदे की आलोचना करते हुए कहा, "परभणी में मुस्लिम महापौर को चुनकर हमने साबित कर दिया कि कार्यकर्ता महत्त्व रखता है. गद्दारों से निष्ठावान मुसलमान अधिक योग्य साबित हुआ." उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी मराठी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें किसी भेदभाव के आधार पर पद से दूर नहीं रखा जाना चाहिए.
कौन हैं सैयद इकबाल?
सैदय इकबाल पहली बार पार्षद बने हैं. उनकी पहचान लोकल एक्टिविस्ट के तौर पर है. वो सैयद अब्दुल खादर के छोटे भाई हैं. खादर बिजनसमैन हैं और परभणी के मुस्लिम इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ है. खादर पहले AIMIM से जुड़े थे. उन्हें शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय जाधव का करीबी माना जाता है.
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Source: IOCL

























