दतिया: जमानत नहीं बचा पाए 19 उम्मीदवार, कइयों को 500 वोट भी नहीं
Datia Bypoll Result 2026: दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को 6016 वोटों से हराया. 21 उम्मीदवारों में सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी की जमानत बची, जबकि 19 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.

दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 में कांग्रेस ने अपनी सीट बरकरार रखते हुए बड़ी जीत दर्ज की है. कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हराया. घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट हासिल हुए. लेकिन इस चुनाव का सबसे बड़ा पहलू सिर्फ जीत-हार नहीं रहा, बल्कि 21 उम्मीदवारों में से 19 की जमानत जब्त होना भी चर्चा का विषय बन गया.
दतिया उपचुनाव में कुल 1,57,499 वैध वोट पड़े. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को अपनी जमानत बचाने के लिए कुल वैध मतों का कम से कम एक-छठा यानी लगभग 26,250 वोट हासिल करना जरूरी था. इस आंकड़े को केवल दो उम्मीदवार ही पार कर सके.
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तीसरे नंबर पर रहे दामोदर यादव की भी जमानत जब्त
इस चुनाव में तीसरे स्थान पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार दामोदर यादव 'मंडल' रहे. उन्हें 22,527 वोट मिले, जो कुल वैध मतों का 14.30 प्रतिशत है. हालांकि तीसरे नंबर पर रहने के बावजूद वह जमानत बचाने के लिए जरूरी 26,250 वोट का आंकड़ा पार नहीं कर सके. इसी वजह से उनकी भी जमानत जब्त हो गई.
कइयों को हजार वोट भी नहीं मिले
दामोदर यादव के बाद अधिकांश उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा. राइट टू रिकॉल पार्टी के धर्मेंद्र सिंह पंवार (गोलू भैया) को 957 वोट, आपका गणतंत्र पार्टी के जितेंद्र माझी को 927 वोट और निर्दलीय राघवेंद्र सिंह को 727 वोट मिले.
इसके अलावा बाबूलाल सोनी (691), देवेश परिहार निमोना (642), रोहित गुप्ता (585), ब्रजेंद्र शाह (384), राम सिंह कुशवाह (324), वेद भैया (219), सुरेश अहिरवार (219), बलकिशुन विश्वकर्मा (204), एडवोकेट हंसमुकी लोधी (204), धर्मेंद्र सिंह (196), कंच्छादीलाल कुशवाहा (179), शुभम राजपूत (163), डॉ. राखी बाला (144), संजना सिंह किन्नर (141) और हरदास कुशवाहा (112) वोट ही हासिल कर सके. इन सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.
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दतिया उपचुनाव के नतीजे बताते हैं कि मुकाबला पूरी तरह कांग्रेस और बीजेपी के बीच सिमट गया. बाकी राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार मतदाताओं का भरोसा हासिल नहीं कर सके. यही वजह रही कि 21 उम्मीदवारों में से केवल दो ही अपनी जमानत बचा पाए, जबकि 19 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.
दतिया का यह परिणाम साफ संकेत देता है कि चुनाव में मुख्य मुकाबला दो बड़े दलों के बीच रहा और छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल सका.



















