दिल्ली में पुराने वाहनों पर फिर होगी सख्ती? जहरीली हवा के बीच SC के इस आदेश बदलने की उठी मांग
Delhi NCR Pollution News: बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सीएक्यूएम ने सुप्रीम कोर्ट से पुराने वाहनों पर राहत वाले आदेश की समीक्षा मांगी है. आयोग का कहना है कि पुराने वाहन हवा को प्रदूषित करते हैं.

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक बार फिर पुराने वाहनों पर रोक कड़ी करने की कोशिशें तेज कर दी हैं. बुधवार (11 दिसंबर) को आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आग्रह किया कि वह अपने 12 अगस्त वाले आदेश की समीक्षा करे, जिसमें 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों पर किसी तरह की सजा या दंडात्मक कदम न उठाने को कहा गया था.
प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह वाहन
सीएक्यूएम ने अदालत में 300 पन्नों से ज्यादा का हलफनामा दाखिल किया है. इसमें साफ लिखा है कि दिल्ली-एनसीआर में खराब एयर क्वालिटी के पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं सबसे बड़ा कारण है. आयोग के मुताबिक, एनसीआर के राज्यों और दिल्ली सरकार के साथ बैठकों में हमेशा यही मुद्दा सबसे अहम रहा है कि सड़क पर चल रहे पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों को कैसे कम किया जाए.
आयोग का कहना है कि जब हवा पहले ही इतनी खराब है, ऐसे में पुराने वाहन चलते रहे तो हालात और बिगड़ेंगे. इसलिए अदालत को अपने पुराने फैसले में बदलाव करना चाहिए, ताकि प्रदूषण कम करने की कोशिशों को मजबूती मिल सके.
बीएस-III वाहनों को आदेश से बाहर करने की मांग
सीएक्यूएम ने आगे सुझाव दिया कि कोर्ट 12 अगस्त 2025 के आदेश में कम से कम बीएस-III और उससे नीचे के मानक वाले वाहनों को छूट न दे. आयोग ने कहा कि ऐसे वाहन बीएस-IV की तुलना में कई गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं. इनकी तकनीक पुरानी है और यह हवा में अधिक जहरीले कण छोड़ते हैं.
आयोग का कहना है कि अगर एनसीआर में हवा साफ करनी है तो सबसे पहले इन पुराने और ज्यादा उत्सर्जन करने वाले वाहनों को हटाना होगा. बीएस-IV और उससे ऊपर के वाहन अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाते हैं, इसलिए फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान बीएस-III या उससे कम पर होना चाहिए.
इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम का इंतजार है. अगर अदालत समीक्षा को मंजूरी देती है, तो दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों पर फिर से बड़ी सख्ती लागू हो सकती है. हजारों वाहन मालिकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा.
फिलहाल, सर्दियों में स्मॉग और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार और एजेंसियां लगातार उपाय कर रही हैं, लेकिन हवा साफ तभी होगी जब वाहन, उद्योग, कचरा जलाना और निर्माण सब पर संतुलित सख्ती लागू हो. सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला इस दिशा में अहम साबित हो सकता है.
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