Delhi News: दिल्ली कांग्रेस का निशाना, 'प्रवेश वर्मा नाराज थे इसलिए अब PM मोदी ने उन्हें...'
Delhi Politics: दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने PMO के निर्देश पर बनी उच्च स्तरीय कमेटी पर चिंता जताई. उन्होंने सवाल किया कि क्या अब दिल्ली सरकार PMO के नियंत्रण में चलेगी?

Delhi Politics: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय कमेटी को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि अब सवाल उठता है कि क्या दिल्ली के लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार को प्रधानमंत्री कार्यालय चलाएगा? उन्होंने आरोप लगाया कि यह कमेटी दिल्ली सरकार के कामकाज की सीधी निगरानी करेगी, जिससे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की भूमिका कमजोर हो सकती है.
सुपर सीएम बने प्रवेश वर्मा?
यादव ने कहा कि इस कमेटी का अध्यक्ष दिल्ली के उपमुख्यमंत्री प्रवेश वर्मा को बनाया गया है. इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्मा को “सुपर सीएम” बना दिया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के गठन के समय प्रवेश वर्मा मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे, लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बना दिया. इसके चलते वर्मा नाराज थे और उनकी नाराजगी सोशल मीडिया पर भी देखने को मिली थी.
अब सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा प्रवेश वर्मा को कमेटी का अध्यक्ष बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास किया गया है? या फिर यह फैसला दिल्ली सरकार की शक्तियों को सीमित करने की एक रणनीति है?
मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल
यादव ने यह भी सवाल उठाया कि अगर दिल्ली सरकार के कार्यों की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय करेगा, तो फिर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की भूमिका क्या होगी? क्या वह केवल नाममात्र की मुख्यमंत्री बनकर रह जाएंगी? उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस सरकार के दौरान, केंद्र की कांग्रेस सरकार ने कभी भी दिल्ली सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे शीला दीक्षित सरकार ने दिल्ली के विकास में ऐतिहासिक कार्य किए.
दिल्ली की सत्ता पर केंद्र का नियंत्रण?
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह स्थिति संवैधानिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है. यदि केंद्र सरकार इस तरह राज्य सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप करेगी, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ होगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने अपनी सरकार चुनकर उसे काम करने का जनादेश दिया है, और इसमें किसी भी तरह का बाहरी दखल जनता के फैसले का अनादर होगा.
देवेन्द्र यादव का यह बयान दिल्ली की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं. क्या दिल्ली की जनता इसे एक राजनीतिक रणनीति मानेगी या फिर इसे लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती के रूप में देखेगी? आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है.
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Source: IOCL
























