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दिल्ली चुनाव जीत के बाद बीजेपी के सामने हैं कई चुनौतियां, जानें क्या कहते हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट?

Delhi Election Result: दिल्ली विधानसभा चुनावों में जीत के बाद, बीजेपी के सामने कई चुनौतियां हैं. उन्हें अपने चुनावी वादों को पूरा करना होगा, साथ ही दिल्ली की वित्तीय स्थिति को भी ठीक रखना होगा.

Delhi News: दिल्ली विधानसभा चुनावों में जीत के बाद, बीजेपी के सामने कई चुनौतियाँ हैं। उन्हें अपने चुनावी वादों को पूरा करना होगा, साथ ही दिल्ली की वित्तीय स्थिति को भी ठीक रखना होगा. बीजेपी ने आम आदमी पार्टी से भी आगे बढ़कर कई कल्याणकारी योजनाओं का वादा किया है. इन योजनाओं को पूरा करने के लिए फंड जुटाना एक बड़ी चुनौती होगी.

हालांकि, बीजेपी को भरोसा है कि केंद्र सरकार के सहयोग से वे अपने सभी वादों को पूरा कर पाएंगे. दिल्ली विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी के सामने ये चुनौती रहेगी कि कैसे वो दिल्ली वित्तीय हालत को ठीक रहते हुए मेनिफेस्टो में किए गए वादे को पूरा करती है. दिल्ली का कुल बजट करीब 76000 करोड़ रुपये का है. ऐसे में बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पार्टी से भी आगे बढ़कर जिन वेलफेयर स्कीम का वादा किया है, उसे वो कैसे पूरा करेगी, ये देखना होगा.

और ये अहम तब भी हो जाता है जब पिछले साल अक्टूबर महीने में ही दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने ये दावा किया था कि दिल्ली सरकार की वित्तीय हालत पहली बार घाटे में जा सकती है. और ये दावा तब था जब बीजेपी की ओर से किए चुनावी वादों को फैक्टर इन नहीं किया गया था. 

'बीजेपी अपने सभी वादों को करेगी पूरा'
हालांकि बीजेपी का कहना है कि जिस तरह से 27 सालों बाद दिल्ली की जनता ने उन पर भरोसा जताया है. इसके बाद केंद्र सरकार के सहयोग से बीजेपी अपने सभी वादों को पूरा करेगी और जहां तक रही फंड की बात तो केंद्र और दिल्ली की सरकार दोनों के सहयोग से जनता की उम्मीदों पर खरा उतरा जाएगा.

हालांकि एक्सपर्ट का मानना है, 'चूंकि अब दिल्ली में भी बीजेपी की सरकार है और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है तो केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली में बीजेपी अपने चुनावी वादे को पूरा करने में कामयाब हो जाएगी.'

बड़ी कंपनियों से जुटा सकती है फंड जाए
बीजेपी ने जो वादे किए हैं जैसे यमुना की सफाई का, तो इसके लिए हो सकता गंगा की तर्ज पर केंद्र सरकार की एक प्रबंधन बनाया जाए, जिसमें केंद्र सरकार के अलावा हरियाणा, यूपी जैसे राज्य भी अपना सहयोग दें, दिल्ली सरकार भी सहयोग दे और CSR के तहत बड़ी कंपनियों से इसके लिए भी फंड जुटाया जाए.

इनोवेटिव तरीका होगा अपनाना
स्वास्थ्य के लिए केंद्र सरकार की पहले से आयुष्मान योजना है तो इसके लिए केंद्र सरकार भी मदद देगी. महिलाओं के लिए जो सम्मान योजना है इसके लिए दिल्ली सरकार को कुछ इनोवेटिव तरीका अपनाना होगा, अपने फंड को जुटाने के लिए. लेकिन बीजेपी ने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में भी योजना लागू की है, और वहां अच्छे से इस योजना के तहत पैसे दिए जा रहे हैं.

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषक भी बीजेपी की ओर से किए गए वादों को लेकर आश्वस्त नजर रहें हैं. इनका कहना है कि बीजेपी का जिस तरह से ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि उसके हिसाब से ये कहा जा सकता है, कि बीजेपी अपने वादों को पूरा करेगी. हालांकि इसके लिए फंड जुटाना चुनौती जरूर होगी, लेकिन अभी भी दिल्ली में ऐसे कई रास्ते हैं जहां से फंड जुटाए जा सकता है, जैसे GST कलेक्शन बेहतर ढंग से किया जाए तो उससे भी कई हजार करोड़ रुपये सरकार के पास आ सकते है. इसके अलावा केंद्र सरकार का अनुदान भी महत्वपूर्ण होगा. 

ये भी पढ़ें: बेरोजगारी, महंगाई या विकास, दिल्ली की जनता ने किन मुद्दों पर डाला अपना वोट?

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