बिहार: सम्राट सरकार में मदरसों की जांच के आदेश पर आया BJP का बड़ा बयान, 'बहुत से ऐसे…'
Bihar News: बिहार बीजेपी के नेता दानिश इकबाल का कहना है कि मदरसा ही नहीं, कोई संस्थान अगर सिर्फ कागज पर है और सरकार से पैसे ले रहा है तो उसे बंद कर देना चाहिए. पढ़िए और क्या कुछ कहा है.

बिहार सरकार ने राज्य के अनुदानित मदरसों की कार्यप्रणाली और उन्हें मिलने वाले सरकारी अनुदान की वास्तविक स्थिति की जांच कराने का निर्णय किया है. एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी. बताया कि इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, यह जांच पूरे राज्य में प्रखंड स्तर पर विशेष समितियों द्वारा की जाएगी. इस बीच बिहार बीजेपी के नेता का इस पर बड़ा बयान आया है.
आदेश को बीजेपी ने बताया सराहनीय कदम
मंगलवार (02 जून, 2026) को बिहार बीजेपी के मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कहा कि बिहार सरकार अगर मदरसों की जांच करा रही है तो ये सराहनीय कदम है. बहुत से ऐसे मदरसे हैं जो कागज पर हैं, जिनका न तो कोई स्वरूप है न कोई बिल्डिंग है और सरकार की ओर से पैसे ले रहे हैं.
दानिश इकबाल ने कहा कि इस तरह के मदरसों को अविलंब बंद करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि मदरसे ही नहीं कोई भी संस्थान अगर जो सिर्फ कागज पर है और सरकार से पैसे ले रहा है तो ऐसे संस्थनों की जांच करनी चाहिए और जांच के बाद तुरंत बंद कर देना चाहिए.
दानिश ने सुझाव देते हुए कहा, "उस पैसे का इस्तेमाल दूसरे बच्चों के लिए करना चाहिए... सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए कि कोई मदरसा हो या संस्थान हो, वो फर्जीवाड़ा न कर पाए."
आदेश पर शिक्षा विभाग के सचिव ने क्या कहा है?
शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल के अनुसार, इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी सहायता और वेतन अनुदान का उपयोग तय नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं, साथ ही मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं का भी आकलन किया जाएगा.
यह भी पढ़ें- राबड़ी आवास को लेकर CM सम्राट चौधरी की दो टूक, 'कुछ लोगों को लगता है…', बड़ा ऐलान भी किया
जानकारी दी गई कि प्रत्येक प्रखंड में तीन सदस्यीय समिति बनाई जाएगी, जिसकी नियुक्ति जिलाधिकारी करेंगे. इसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) या अंचलाधिकारी (सीओ), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और किसी सरकारी उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक शामिल होंगे. समिति का नेतृत्व बीडीओ या सीओ करेंगे. जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं होगी बल्कि स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा. इसमें शिक्षण व्यवस्था, छात्रों की उपस्थिति, गतिविधियां, भवन और अन्य सुविधाओं का मूल्यांकन होगा. निरीक्षण के दौरान फोटो और अन्य साक्ष्य भी जुटाए जाएंगे.
10 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट
जांच पूरी होने के बाद समिति 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो और छात्रों तक इसका लाभ प्रभावी रूप से पहुंचे.
यह भी पढ़ें- सम्राट सरकार के लिए सिर दर्द बना राबड़ी आवास? RJD के ताजा बयान ने किया हैरान!
Source: IOCL
























