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नैमिषारण्य कलयुग से मुक्त धरती का एकमात्र स्थान! जिसके दर्शन के बिना अधूरी है चारधाम यात्रा

Naimisharanya: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य, जो कलयुग के प्रभाव से मुक्त है. इस स्थान पर दर्शन किए बिना चार धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है. जानते हैं इस तपोभूमि के बारे में.

Naimisharanya: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य, जो कलयुग के प्रभाव से मुक्त है. इस स्थान पर दर्शन किए बिना चार धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है. जानते हैं इस तपोभूमि के बारे में.

नैमिषारण्य पवित्र स्थान

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वर्तमान में कलयुग का दूसरा चरण चल रहा है, जिसका प्रभाव साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि, धरती पर एक ऐसी जगह भी हो, जो पूरी तरह से कलयुग के प्रभाव से मुक्त है. यह एक ऐसा तीर्थ स्थल भी है, जिसके दर्शन के बिना चारधाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है.
वर्तमान में कलयुग का दूसरा चरण चल रहा है, जिसका प्रभाव साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि, धरती पर एक ऐसी जगह भी हो, जो पूरी तरह से कलयुग के प्रभाव से मुक्त है. यह एक ऐसा तीर्थ स्थल भी है, जिसके दर्शन के बिना चारधाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है.
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इस पावन तीर्थ स्थल का वर्णन वेद-पुराण से लेकर तमाम धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलती है. नैमिषारण्य वही स्थान है, जहां महापुराणों की रचना की गई थी. महाभारत काल में पांडु पुत्र अर्जुन और युधिष्ठर भी इस स्थान पर आए थे. इसके अलावा प्राचीन काल में 88 हजार ऋषि-मुनियों ने इसी जगह पर कठिन तपस्या भी की थी, इसलिए इसे तपोभूमि के नाम से भी जाना जाता है.
इस पावन तीर्थ स्थल का वर्णन वेद-पुराण से लेकर तमाम धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलती है. नैमिषारण्य वही स्थान है, जहां महापुराणों की रचना की गई थी. महाभारत काल में पांडु पुत्र अर्जुन और युधिष्ठर भी इस स्थान पर आए थे. इसके अलावा प्राचीन काल में 88 हजार ऋषि-मुनियों ने इसी जगह पर कठिन तपस्या भी की थी, इसलिए इसे तपोभूमि के नाम से भी जाना जाता है.
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उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य एक महान तीर्थ स्थल जो लखनऊ से करीब 80 किलोमीटर दूर गोमती नदी के तट पर स्थित है. यह स्थान को नैमिषारण्य, नैमिष या नीमषार के नाम से भी प्रख्यात है.
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य एक महान तीर्थ स्थल जो लखनऊ से करीब 80 किलोमीटर दूर गोमती नदी के तट पर स्थित है. यह स्थान को नैमिषारण्य, नैमिष या नीमषार के नाम से भी प्रख्यात है.
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मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा जी ने स्वंय इस जगह को ध्यान योग करने के लिए सबसे उत्तम बताया है. नैमिषारण्य स्थान के मुख्य आकर्षण की बात करें तो यहां चक्रतीर्थी, व्यास गद्दी, भूतेश्वनाथ मंदिर, ललिता देवी का मंदिर, हवन कुंड, पंचप्रयाग, शेष मंदिर, हनुमान गढ़ी, शिवाला-भैरव जी, पंच पांडव मंदिर, पंचपुराण मंदिर, मां आनंदमयी का आश्रम, नारदनं सरस्वती आश्रम देवपुरी मंदिर, रामानुज कोट और रुद्रावर्त शामिल हैं.
मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा जी ने स्वंय इस जगह को ध्यान योग करने के लिए सबसे उत्तम बताया है. नैमिषारण्य स्थान के मुख्य आकर्षण की बात करें तो यहां चक्रतीर्थी, व्यास गद्दी, भूतेश्वनाथ मंदिर, ललिता देवी का मंदिर, हवन कुंड, पंचप्रयाग, शेष मंदिर, हनुमान गढ़ी, शिवाला-भैरव जी, पंच पांडव मंदिर, पंचपुराण मंदिर, मां आनंदमयी का आश्रम, नारदनं सरस्वती आश्रम देवपुरी मंदिर, रामानुज कोट और रुद्रावर्त शामिल हैं.
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नैमिषारण्य आने वाले भक्त इसकी परिक्रमा की जाती है. यह परिक्रमा 84 कोस की है. हर वर्ष फाल्गुनमास की अमावस्या के बाद प्रतिपदा की तिथि से लेकर पूर्णिमा तक यह परिक्रमा की जाती है. यहां पर पंचप्रयाग नामक पक्का सरोवर भी है, जिसके किनारे 5099 साल पुराना अक्षय वट का पेड़ है.
नैमिषारण्य आने वाले भक्त इसकी परिक्रमा की जाती है. यह परिक्रमा 84 कोस की है. हर वर्ष फाल्गुनमास की अमावस्या के बाद प्रतिपदा की तिथि से लेकर पूर्णिमा तक यह परिक्रमा की जाती है. यहां पर पंचप्रयाग नामक पक्का सरोवर भी है, जिसके किनारे 5099 साल पुराना अक्षय वट का पेड़ है.

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