Monsoon Session 2026: राज्यसभा के एक सेशन में कितने रुपये होते हैं खर्च, जानें कार्यवाही स्थगित होने पर कितना नुकसान?
Monsoon Session 2026: आज मानसून सत्र का पांचवां दिन था और आज भी विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही को सोमवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा है. चलिए जानें कि राज्यसभा के एक सत्र के लिए कितना रुपया खर्चा होता है.

Monsoon Session 2026: संसदीय लोकतंत्र में जब किसी मुद्दे को लेकर मतभेद गहरे होते हैं तो इसका सीधा असर संसद की कार्यवाही पर देखने को मिलता है. आज मानसून सत्र का पांचवा दिन था, ऐसे में विपक्ष के हंगामे को देखते हुए सदन की बैठकों को फिर से बीच में ही रोकना पड़ा. अब दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई है. लेकिन जब देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंच पर कामकाज हंगामे के चलते रोकना पड़ता है तो यह सिर्फ राजनीतिक गतिरोध तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसके पीछे देश के टैक्स चुकाने वाले लोगों की गाढ़ी कमाई का बड़ा वित्तीय नुकसान भी छिपा होता है. चलिए जानें कि संसद और खासतौर से राज्यसभा की एक-एक मिनट की कार्यवाही पर कितना खर्चा होता है और इसके ठप होने से सरकारी तिजोरी को कितना भारी फटका लगता है.
सदन चलाने के लिए प्रति मिनट और घंटा कितने रुपये होते हैं खर्चा?
संसद की बैठकों को सही तरीके से संचालित करने के लिए बेहद विस्तृत प्रशासनिक और तकनीकी ढांचा काम करता है. इस पूरे तंत्र को चलाने में भारी भरकम सरकारी बजट का खर्चा होता है. आंकड़ों की मानें तो संसद के दोनों सदनों की संयुक्त कार्यवाही चलाने का खर्च हर मिनट 2.5 लाख रुपये बैठता है. अगर इसे घंटे के हिसाब से देखा जाए तो एक घंटे में करीब 1.5 करोड़ रुपये और पूरे एक दिन की कार्यवाही का खर्च लगभग नौ करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. इस बारे में इसी साल के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पीठासीन स्पीकर जगदंबिका पाल ने बताया था.
केवल राज्यसभा के संचालन में कितना होता है खर्चा?
अगर हम सिर्फ उच्च सदन यानी राज्यसभा के अलग खर्चे की बात करते हैं तो यहां का प्रशासनिक और विधायी तंत्र भी बेहद खर्चीला है. राज्यसभा की बैठकों को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए प्रति मिनट लगभग सवा लाख रुपये का खर्चा आता है. इसी अनुपात में अगर राज्यसभा में एक घंटे तक कोई कामकाज नहीं हो पाता है या हंगामा रहता है तो सरकारी खजाने से लगभग 75 लाख रुपये बिना किसी नतीजे के नुकसान हो जाते हैं. राज्यसभा के एक पूरे सत्र का बजट इन तमाम खर्चों और सुविधाओं को मिलाकर तैयार किया जाता है.
राज्यसभा सांसदों पर होने वाला सरकारी खर्चा
सांसदों पर होने पर वाले वार्षिक व्यय की बात करें तो RTI से मिले आंकड़े बताते हैं कि उच्च सदन के सदस्यों की सुविधाओं और भत्तों पर खर्चा लगातार बढ़ा है. वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान राज्यसभा सांसदों के वेतन, भत्ते और अन्य मदों पर लगभग 88 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया था. वहीं अगले साल 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 163 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इस प्रकार सांसदों के संसदीय कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में देश की जनता का बहुत बड़ा धन निवेश होता है.
कार्यवाही ठप होने से 2014 से 2024 तक कितने करोड़ का नुकसान?
जब भी राजनीतिक तनातनी के कारण सदन की बैठकें लगातार रद्द होती हैं तो इसका असर न सिर्फ विधायी कार्यों पर देखने को मिलता है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी बहुत भारी पड़ता है. उदाहरण के लिए, मानसून सत्र के दौरान शुरुआती चार दिनों में काम न होने से करीब 36 रुपये का सीधा घाटा दर्ज किया गया. इसके अलावा अगर साल 2014 से लेकर 2024 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो बार-बार सदन स्थगित होने की वजह से देश के लगभग 3300 करोड़ रुपये पानी में बह चुके हैं. इससे प्रश्नकाल और कई महत्वपूर्ण विधेयक भी बिना बहस के लटके रह जाते हैं.
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