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पैसेंजर प्लेन में जान बचाने के लिए क्यों नहीं होते पैराशूट, फाइटर जेट वाला फॉर्मूला यहां क्यों हो जाता है फेल?
हवाई जहाज में पैराशूट रखने का आइडिया सुनने में आसान लगता है, लेकिन पैसेंजर प्लेन की ऊंचाई, स्पीड और डिजाइन इसे नामुमकिन बना देते हैं. आइए जानें कि फाइटर जेट वाला फॉर्मूला यहां फेल क्यों हो जाता है.
फिल्मों में जब फाइटर जेट आग की लपटों में घिरता है और पायलट एक झटके में पैराशूट के साथ बाहर निकल जाता है, तो मन में एक सवाल जरूर उठता है कि यही तरीका पैसेंजर प्लेन में क्यों नहीं अपनाया जाता है. सैकड़ों लोगों से भरे विमान में अगर हर सीट के नीचे पैराशूट रख दिया जाए, तो क्या जान बचाना आसान नहीं हो जाएगा? सुनने में यह उपाय बेहद सीधा लगता है, लेकिन हकीकत में इसकी कहानी काफी अलग और चौंकाने वाली है.
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फाइटर जेट और पैसेंजर प्लेन का काम, डिजाइन और मकसद पूरी तरह अलग होता है. फाइटर जेट आमतौर पर एक या दो पायलट के लिए बनाए जाते हैं, जिनका काम बेहद जोखिम भरे हालात में उड़ान भरना होता है. इसके उलट पैसेंजर प्लेन सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित और आराम से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं.
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यही फर्क पैराशूट के सवाल की जड़ में छिपा है. फाइटर जेट में पायलट के पास इजेक्शन सीट होती है. खतरे की स्थिति में पायलट सीट समेत बाहर निकल जाता है और पैराशूट खुल जाता है. पायलट को खास ट्रेनिंग दी जाती है कि किस ऊंचाई, किस स्पीड और किस एंगल पर बाहर निकलना सुरक्षित है.
Published at : 11 Feb 2026 08:41 AM (IST)
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