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Indian Army Resignation Rules: आर्मी के जवान अपनी मर्जी से नहीं दे सकते इस्तीफा, जानें क्यों है ऐसा नियम

Indian Army Resignation Rules: भारतीय सेना में सेना के जवान इस्तीफा पत्र देकर अपनी मर्जी से सेना को नहीं छोड़ सकते. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Indian Army Resignation Rules: भारतीय सेना में सेना के जवान इस्तीफा पत्र देकर अपनी मर्जी से सेना को नहीं छोड़ सकते. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Indian Army Resignation Rules: भारतीय सेना में सेवा करना एक रेगुलर सरकारी नौकरी से काफी अलग होता है. जब भी कोई सैनिक या फिर अधिकारी सशस्त्र बलों में शामिल होता है तो वह राष्ट्रीय सेवा, अनुशासन और बलिदान के लिए जीवन भर की कमिटमेंट करता है. इस वजह से सेना के जवान सिर्फ इस्तीफा पत्र देकर अपनी मर्जी से नहीं जा सकते. आइए जानते हैं की क्या है इसके पीछे का नियम.

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भारतीय सेना के जवान सामान्य सेवा नियम से नहीं बल्कि आर्मी एक्ट 1950 के द्वारा शासित होते हैं. एक बार भर्ती या फिर कमीशन होने के बाद एक सैनिक की सेवा कानूनी रूप से बाध्यकारी हो जाती है. इस्तीफा देना कोई अधिकार नहीं बल्कि एक अनुरोध होता है. यह अनुरोध तभी मान्य होता है जब सक्षम सैन्य प्राधिकरण इसे औपचारिक रूप से स्वीकार कर ले.
भारतीय सेना के जवान सामान्य सेवा नियम से नहीं बल्कि आर्मी एक्ट 1950 के द्वारा शासित होते हैं. एक बार भर्ती या फिर कमीशन होने के बाद एक सैनिक की सेवा कानूनी रूप से बाध्यकारी हो जाती है. इस्तीफा देना कोई अधिकार नहीं बल्कि एक अनुरोध होता है. यह अनुरोध तभी मान्य होता है जब सक्षम सैन्य प्राधिकरण इसे औपचारिक रूप से स्वीकार कर ले.
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सेना युद्ध, आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा खतरों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए मौजूद है. सैनिकों को आजादी से इस्तीफा देने की अनुमति देने से मुश्किल घड़ी में सैनिकों की संख्या कमजोर हो सकती है.
सेना युद्ध, आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा खतरों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए मौजूद है. सैनिकों को आजादी से इस्तीफा देने की अनुमति देने से मुश्किल घड़ी में सैनिकों की संख्या कमजोर हो सकती है.
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एक सैनिक को प्रशिक्षित करने में सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है. इसमें शारीरिक कंडीशनिंग, हथियार चलाना, सामरिक युद्ध, तकनीकी कौशल और खास पाठ्यक्रम शामिल हैं. यदि कर्मियों को बिना किसी प्रतिबंध के बीच में छोड़ने की अनुमति मिल जाए तो इससे भारी वित्तीय नुकसान होगा.
एक सैनिक को प्रशिक्षित करने में सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है. इसमें शारीरिक कंडीशनिंग, हथियार चलाना, सामरिक युद्ध, तकनीकी कौशल और खास पाठ्यक्रम शामिल हैं. यदि कर्मियों को बिना किसी प्रतिबंध के बीच में छोड़ने की अनुमति मिल जाए तो इससे भारी वित्तीय नुकसान होगा.
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सैन्य इकाइयां मजबूती से टीम के रूप में काम करती हैं. अचानक इस्तीफे यूनिट के संतुलन, कमांड संरचना और ऑपरेशनल योजना को बिगाड़ सकते हैं.
सैन्य इकाइयां मजबूती से टीम के रूप में काम करती हैं. अचानक इस्तीफे यूनिट के संतुलन, कमांड संरचना और ऑपरेशनल योजना को बिगाड़ सकते हैं.
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सेना इस्तिफा या फिर समय से पहले रिटायरमेंट की अनुमति देता है. लेकिन ऐसा खास परिस्थितियों में ही किया जाता है. इनमें स्थायी चिकित्सा अयोग्यता और परिवार की देखभाल की एकमात्र जिम्मेदारी जैसी वजह शामिल हैं. इसी के साथ सेवा के न्यूनतम आवश्यक वर्ष पूरे करने के बाद भी अपनी मर्जी से रिटायरमेंट के लिए पात्रता मिल जाती है.
सेना इस्तिफा या फिर समय से पहले रिटायरमेंट की अनुमति देता है. लेकिन ऐसा खास परिस्थितियों में ही किया जाता है. इनमें स्थायी चिकित्सा अयोग्यता और परिवार की देखभाल की एकमात्र जिम्मेदारी जैसी वजह शामिल हैं. इसी के साथ सेवा के न्यूनतम आवश्यक वर्ष पूरे करने के बाद भी अपनी मर्जी से रिटायरमेंट के लिए पात्रता मिल जाती है.
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सैन्य सेवा अनुशासन और विश्वास पर बनी है. सैनिक अपनी मर्जी से और अपने खुद के हित के ऊपर राष्ट्र की सेवा करने की शपथ लेता है. बिना इजाजत ड्यूटी छोड़ना भगोड़ापन माना जाता है और यह एक गंभीर अपराध है. ऐसा करने पर कोर्ट मार्शल और जेल हो सकती है.
सैन्य सेवा अनुशासन और विश्वास पर बनी है. सैनिक अपनी मर्जी से और अपने खुद के हित के ऊपर राष्ट्र की सेवा करने की शपथ लेता है. बिना इजाजत ड्यूटी छोड़ना भगोड़ापन माना जाता है और यह एक गंभीर अपराध है. ऐसा करने पर कोर्ट मार्शल और जेल हो सकती है.

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