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रॉल्स रॉयस कारों का क्यों नहीं होता क्रैश टेस्ट, दुनिया की सबसे महंगी कारों को इससे क्यों रखा जाता है दूर?
Rolls Royce Crash Test: रॉल्स-रॉयस का क्रैश टेस्ट से दूर रहना लापरवाही नहीं, बल्कि उसकी अलग उत्पादन और लग्जरी रणनीति का हिस्सा है. यहां सेफ्टी दिखाई नहीं जाती, बल्कि चुपचाप सुनिश्चित की जाती है.
कार खरीदते समय आज सबसे पहला सवाल होता है कि सेफ्टी कितनी मजबूत है? ग्लोबल NCAP और भारत NCAP की रेटिंग आम लोगों के फैसले तय करती है, लेकिन जब बात रॉल्स-रॉयस जैसी अल्ट्रा-लग्जरी कारों की आती है, तो यह नियम अचानक बदल जाता है. करोड़ों की कीमत वाली इन कारों की कोई आधिकारिक क्रैश टेस्ट रेटिंग नहीं होती है. आखिर क्यों दुनिया की सबसे महंगी और प्रतिष्ठित कारों को इस प्रक्रिया से दूर रखा जाता है, ये एक बड़ा सवाल है. आइए जानें.
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आज के ऑटोमोबाइल बाजार में सेफ्टी रेटिंग किसी भी कार की विश्वसनीयता का अहम पैमाना बन चुकी है. ग्लोबल NCAP और भारत NCAP जैसी संस्थाएं कारों को फ्रंटल, साइड और अन्य टक्कर परीक्षणों से गुजारकर रेटिंग देती हैं.
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इससे आम उपभोक्ता को यह समझने में मदद मिलती है कि दुर्घटना की स्थिति में कार यात्रियों को कितनी सुरक्षा दे पाएगी. अधिकतर मास-मार्केट और प्रीमियम सेगमेंट की कारें इन टेस्ट से गुजरती हैं.
Published at : 01 Jan 2026 02:26 PM (IST)
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