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वड़ा में बीच में क्यों किया जाता है छेद? जानें इस साउथ इंडियन डिश में छिपा साइंस
मेदु वड़ा के बीच में छेद सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान से जुड़ा कारण है. छेद होने से वड़ा अच्छे से पकता है, कम तेल सोखता है और ज्यादा कुरकुरा बनता है, जिससे उसका स्वाद और बढ़ जाता है.
दक्षिण भारत का खाना आज सिर्फ भारत के दक्षिणी हिस्से तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब पूरे भारत की रसोइयों और प्लेटों तक पहुंच चुका है. आज आपको भारत के हर हिस्से, खासकर नॉर्थ इंडिया में, दक्षिण भारतीय खाने के स्टॉल आसानी से दिख जाएंगे.
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इन स्टॉल्स पर इडली-सांभर, डोसा, मेदु वड़ा और उपमा जैसे कई व्यंजन मिलते हैं, जो स्वाद में लाजवाब होते हैं और नाश्ते व लंच के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. इन्हीं में से एक है मेदु वड़ा, जो लगभग हर साउथ इंडियन रेस्टोरेंट में मिलता है. यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मेदु वड़ा के बीच में छेद या होल क्यों होता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं.
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जब मेदु वड़ा बनाया जाता है, तो उसका बैटर उड़द दाल से तैयार किया जाता है और यह काफी गाढ़ा होता है. अगर वड़ा के बीच में छेद न हो, तो वड़ा अंदर से पूरी तरह नहीं पक पाएगा. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी वड़ा के बीच में छेद होना फायदेमंद माना जाता है. इस डिजाइन की वजह से वड़ा तलते समय फटता नहीं है और समान रूप से पकता है. यही कारण है कि मेदु वड़ा खाने में ज्यादा स्वादिष्ट और लजीज लगता है..
Published at : 03 Jan 2026 07:37 PM (IST)
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