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बियर की बोतल हरी या भूरी क्यों होती है? जानें इसके पीछे की असली वजह
आज भले ही बियर कैन, केग और आधुनिक पैकेजिंग में मिलने लगी हो, लेकिन हरी और भूरी बोतलें अब भी भरोसेमंद मानी जाती हैं. आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है और बियर की बोतलों का रंग बदला क्यों नहीं जाता?
जब भी आप किसी दुकान या बार में बियर देखते हैं, तो एक बात जरूर नोटिस करते हैं कि ज्यादातर बियर हरी या भूरी बोतल में ही क्यों मिलती है? क्या यह सिर्फ ब्रांडिंग और डिजाइन का खेल है या इसके पीछे कोई ठोस वजह छुपी है? अगर बोतल पारदर्शी होती तो बियर और भी आकर्षक लगती, फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया? असल में इस रंग के पीछे बियर के स्वाद, खुशबू और गुणवत्ता से जुड़ा एक राज है. चलिए जानें.
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बियर का इतिहास हजारों साल पुराना है. प्राचीन मेसोपोटामिया और मिस्र में भी बियर बनाई और पी जाती थी. शुरुआत में इसे मिट्टी के बर्तनों और बाद में पारदर्शी कांच की बोतलों में रखा जाने लगा, लेकिन जैसे-जैसे बियर का व्यापार बढ़ा और इसे दूर-दराज तक भेजा जाने लगा.
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लेकिन, एक बड़ी समस्या सामने आई बियर का स्वाद जल्दी खराब हो जाता था. बियर में हॉप्स नाम का एक खास तत्व होता है, जो उसके स्वाद और खुशबू के लिए बेहद जरूरी है. जब बियर पर सूरज की अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें पड़ती हैं, तो ये किरणें हॉप्स के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर देती हैं.
Published at : 12 Jan 2026 08:36 AM (IST)
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