वो अय्याश राजा जिसकी थीं 360 रानियां और 83 बच्चे, हर रात सोने के लिए तय करता था नए नियम
भारत में एक राजा ऐसा भी हुआ, जिसने क्रिकेट का जुनून दिखाया और 360 रानियां भी रखीं. वो राजा हर रात एक रानी के साथ सोने के लिए नए-नए नियम बनाता था. उसके पास धन-दौलत की भी कोई कमी नहीं थी.

भारत के शाही राजाओं का इतिहास सिर्फ युद्ध और शासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी शानो-शौकत, महलों, गहनों और निजी जिंदगी के किस्सों से भी जुड़ा है. राजदरबारों की चमक, अनोखे नियम और ऐश्वर्य से भरी जीवनशैली आज भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती है. इसी शाही दौर में कुछ ऐसे राजा भी हुए, जिनकी निजी जिंदगी और ठाठ-बाट ने उन्हें इतिहास के सबसे चर्चित नामों में शामिल कर दिया. आज हम आपको एक ऐसे ही राजा के बारे में बताते हैं, जिसकी 365 रानियां हुआ करती थीं और उसने अय्याशी में सबको पीछे छोड़ा था.
कौन थे महाराजा भूपिंदर सिंह?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि महाराजा भूपिंदर सिंह का नाम भारतीय रियासतों के इतिहास में शानो-शौकत और ऐश्वर्य के लिए जाना जाता है. उनका जन्म 1891 में हुआ था. 1900 में अपने पिता की मौत के बाद वे मात्र नौ साल की उम्र में पटियाला रियासत के शासक बने. पूरी शासकीय शक्तियां उन्हें 1910 में मिलीं, जब तत्कालीन वायसराय ने उन्हें औपचारिक अधिकार सौंपे.
उन्होंने लाहौर के Aitchison College में पढ़ाई की. खेलों, खासकर क्रिकेट और पोलो में उनकी गहरी रुचि थी. उनके शासनकाल में पटियाला रियासत आर्थिक रूप से मजबूत मानी जाती थी.
निजी जीवन और शाही परिवार
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें तो महाराजा भूपिंदर सिंह का निजी जीवन भी काफी चर्चा में रहा. रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी 10 आधिकारिक रानियां थीं. इसके अलावा उनके हरम में लगभग 350 महिला साथी थीं, जिनको भी रानी कहा जाता था. कुल मिलाकर उनके 88 बच्चे बताए जाते हैं, जिनमें से 52 वयस्क उम्र तक जीवित रहे थे.
उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने अपनी सभी साथियों के साथ रहने के लिए अलग व्यवस्था बनाई थी. हालांकि आधिकारिक तौर पर 10 को ही रानी का दर्जा मिला था.
लीला भवन और अय्याशी के खास नियम
पटियाला में बना लीला भवन आज भी मौजूद है. इसे उन्होंने अपने निजी उपयोग के लिए बनवाया था. यह भवन भूपेंद्र नगर रोड पर बारादरी बाग के पास स्थित है. किताबों और संस्मरणों के अनुसार, इस भवन में शाही पार्टियां होती थीं. यहां एक बड़ा तालाब था, जिसमें एक साथ करीब 150 लोग स्नान कर सकते थे. इसे उस दौर का निजी स्विमिंग पूल माना जाता है.
इसी भवन में एक खास कक्ष बनाया गया था, जिसे प्रेम मंदिर कहा जाता था. यह केवल महाराजा के लिए आरक्षित था. कहते हैं कि वहां भोग-विलास का हर इंतजाम था. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की होती है, जिसके तहत हर रात 360 लालटेनों पर रानियों के नाम लिखे जाते थे. सुबह जो लालटेन सबसे पहले बुझती, उसी नाम की रानी के साथ वे रात बिताते थे. यह तरीका उनकी निजी जिंदगी की व्यवस्था का हिस्सा बताया जाता है.
ऐश्वर्य और शौक
महाराजा भूपिंदर सिंह अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए भी मशहूर थे. उनके पास 44 रोल्स रॉयस कारें थीं. वे महंगे गहनों के शौकीन थे. 1928 में उन्होंने फ्रांस की ज्वेलरी कंपनी Cartier से एक खास नेकलेस बनवाया था. इसमें 234 कैरेट का मशहूर De Beers Diamond जड़ा गया था. यह उस समय की सबसे चर्चित शाही ज्वेलरी में से एक था.
उनके खानपान के बारे में भी कई किस्से मिलते हैं. कहा जाता है कि वे एक बार में कई दर्जन बटेर खा लेते थे. हालांकि इन दावों की पुष्टि सीमित है, लेकिन ये उनके शाही जीवन की छवि को दर्शाते हैं.
क्रिकेट का जुनून
भूपिंदर सिंह खेलों को बढ़ावा देने के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने चैल में क्रिकेट मैदान और पोलो ग्राउंड बनवाया, जिसे दुनिया के सबसे ऊंचे क्रिकेट मैदानों में गिना जाता है. उनकी पोलो टीम ‘पटियाला टाइगर्स’ उस दौर में मजबूत मानी जाती थी.
भूपिंदर सिंह सिर्फ शाही ठाठ के लिए नहीं, खेलों खासकर क्रिकेट के लिए भी जाने जाते थे. वे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे और 1911 में इंग्लैंड दौरे पर टीम की अगुआई की. Marylebone Cricket Club के रिकॉर्ड के अनुसार 1915 से 1937 के बीच उन्होंने 27 प्रथम श्रेणी मुकाबले खेले थे. घरेलू क्रिकेट को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने अहम योगदान दिया और उनके करीबी मित्र साहिब रणजीत सिंह के नाम पर रणजी ट्रॉफी शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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Source: IOCL



























