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Global Reserve Currency: डॉलर कैसे बना ग्लोबल रिजर्व करेंसी, जानें किसी भी करेंसी को कैसे मिलता है यह दर्जा?
Global Reserve Currency: अमेरिकी डॉलर एक ग्लोबल रिजर्व करेंसी है. आइए जानते हैं कि कैसे किसी भी करेंसी को यह दर्जा मिल सकता है?
Global Reserve Currency: आज अमेरिकी डॉलर ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के ठीक सेंटर में है. सरकारें इसे अपने रिजर्व में रखती हैं, इंटरनेशनल ट्रेड में इसकी कीमत तय होती है और साथ ही ग्लोबल मार्केट इसकी मजबूती या फिर कमजोरी के साथ चलते हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि दुनिया के रिजर्व करेंसी बनने का डॉलर का सफर आखिर कैसा था. आइए जानते हैं कि क्या किसी और मुद्रा को यह दर्जा मिल सकता है या नहीं.
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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका ने सहयोगी देशों को हथियार, खाना और सामान सप्लाई किया था. ज्यादातर पेमेंट सोने में किए गए थे. जिस वजह से अमेरिका युद्ध खत्म होने तक दुनिया के लगभग दो तिहाई सोने के रिजर्व जमा कर पाया था.
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1944 में 44 देश के लीडर ब्रिटेन वुड्स में मिले और उन्होंने अपनी करेंसी को सीधे सोने के बजाय अमेरिकी डॉलर से जोड़ने पर अपनी सहमति दिखाई. इसके बदले में अमेरिका ने डॉलर को $35 प्रति औंस की दर से सोने में बदलने का वादा किया.
Published at : 11 Jan 2026 07:10 AM (IST)
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