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यहां टॉयलेट सीट के सामने सिर झुकाते हैं लोग, जानिए इस अजीबोगरीब परंपरा की क्या है सच्चाई?

चीन में जिगु नामक टॉयलेट की देवी को पूजने की एक अनोखी परंपरा प्रचलित है. लैनटर्न फेस्टिवल की रात को लोग टॉयलेट साफ कर वहां कागज का पुतला रखते हैं और अगरबत्ती जलाते हैं. आइए इसकी कहानी जानें.

चीन में जिगु नामक टॉयलेट की देवी को पूजने की एक अनोखी परंपरा प्रचलित है. लैनटर्न फेस्टिवल की रात को लोग टॉयलेट साफ कर वहां कागज का पुतला रखते हैं और अगरबत्ती जलाते हैं. आइए इसकी कहानी जानें.

दुनिया भर में आस्था के अनगिनत रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन चीन की एक प्राचीन परंपरा सुनकर आप हैरान रह सकते हैं. यहां लोग किसी मंदिर या मूर्ति के बजाय अपने घर की टॉयलेट सीट के सामने सिर झुकाते हैं. 'जिगु' या 'पर्पल लेडी' के नाम से मशहूर टॉयलेट की देवी को पूजने की यह रस्म सदियों पुरानी है. अंधविश्वास और लोक कथाओं के मेल से बनी यह परंपरा न केवल साफ-सफाई का संदेश देती है, बल्कि भविष्य जानने का एक माध्यम भी मानी जाती है.

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चीन के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में 'जिगु' नाम की देवी को पूजने का चलन काफी पुराना है. इन्हें 'पर्पल लेडी' भी कहा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिगु को महिलाओं की रक्षक और घर में सुख-शांति लाने वाली देवी माना जाता है. चीनी परिवारों में यह विश्वास है कि घर का हर कोना किसी न किसी दैवीय शक्ति के अधीन है और टॉयलेट जैसा स्थान भी इससे अछूता नहीं है. महिलाएं विशेष रूप से इस परंपरा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं.
चीन के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में 'जिगु' नाम की देवी को पूजने का चलन काफी पुराना है. इन्हें 'पर्पल लेडी' भी कहा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिगु को महिलाओं की रक्षक और घर में सुख-शांति लाने वाली देवी माना जाता है. चीनी परिवारों में यह विश्वास है कि घर का हर कोना किसी न किसी दैवीय शक्ति के अधीन है और टॉयलेट जैसा स्थान भी इससे अछूता नहीं है. महिलाएं विशेष रूप से इस परंपरा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं.
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यह अजीबोगरीब पूजा साल में एक बार बेहद खास मौके पर की जाती है. चीनी कैलेंडर के अनुसार, साल के पहले चंद्र महीने के 15वें दिन इसे मनाया जाता है. यह वही दिन है जब चीन का मशहूर 'लैनटर्न फेस्टिवल' (लालटेन उत्सव) आयोजित होता है.
यह अजीबोगरीब पूजा साल में एक बार बेहद खास मौके पर की जाती है. चीनी कैलेंडर के अनुसार, साल के पहले चंद्र महीने के 15वें दिन इसे मनाया जाता है. यह वही दिन है जब चीन का मशहूर 'लैनटर्न फेस्टिवल' (लालटेन उत्सव) आयोजित होता है.
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वसंत उत्सव के समापन पर पड़ने वाली इस रात को लोग पूरी श्रद्धा के साथ टॉयलेट की सफाई करते हैं और देवी के स्वागत की तैयारियां करते हैं. यह समय नए साल की खुशहाली मांगने के लिए सबसे शुभ माना जाता है.
वसंत उत्सव के समापन पर पड़ने वाली इस रात को लोग पूरी श्रद्धा के साथ टॉयलेट की सफाई करते हैं और देवी के स्वागत की तैयारियां करते हैं. यह समय नए साल की खुशहाली मांगने के लिए सबसे शुभ माना जाता है.
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इस परंपरा के पीछे एक प्राचीन और दुखद लोक कथा छिपी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में एक महिला थी जिसे किसी दूसरी महिला की जलन और नफरत का शिकार होना पड़ा था. साल के पहले चंद्र महीने के 15वें दिन ही उस निर्दोष महिला की टॉयलेट में हत्या कर दी गई थी. उसी की याद में और उसकी आत्मा को शांति देने के लिए लोगों ने उसे देवी का दर्जा दिया और टॉयलेट में उनकी पूजा शुरू कर दी, ताकि ऐसी अनहोनी दोबारा किसी के साथ न हो.
इस परंपरा के पीछे एक प्राचीन और दुखद लोक कथा छिपी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में एक महिला थी जिसे किसी दूसरी महिला की जलन और नफरत का शिकार होना पड़ा था. साल के पहले चंद्र महीने के 15वें दिन ही उस निर्दोष महिला की टॉयलेट में हत्या कर दी गई थी. उसी की याद में और उसकी आत्मा को शांति देने के लिए लोगों ने उसे देवी का दर्जा दिया और टॉयलेट में उनकी पूजा शुरू कर दी, ताकि ऐसी अनहोनी दोबारा किसी के साथ न हो.
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पूजा शुरू करने से पहले घर के सदस्य टॉयलेट सीट को अच्छी तरह साफ करते हैं. इसके बाद कागज या कपड़े से बना एक छोटा सा पुतला तैयार किया जाता है, जो देवी जिगु का प्रतीक होता है. इस पुतले को टॉयलेट सीट के पास या कभी-कभी किचन में भी रखा जाता है.
पूजा शुरू करने से पहले घर के सदस्य टॉयलेट सीट को अच्छी तरह साफ करते हैं. इसके बाद कागज या कपड़े से बना एक छोटा सा पुतला तैयार किया जाता है, जो देवी जिगु का प्रतीक होता है. इस पुतले को टॉयलेट सीट के पास या कभी-कभी किचन में भी रखा जाता है.
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लोग देवी के सामने अगरबत्ती जलाते हैं और उनके प्रकट होने का इंतजार करते हैं. कई ग्रामीण इलाकों में आज भी इस रस्म को पूरे विधि-विधान और पवित्रता के साथ निभाया जाता है. इस पूजा का सबसे दिलचस्प हिस्सा भविष्य जानना है. पूजा के दौरान परिवार के लोग देवी से सवाल पूछते हैं कि आने वाला साल खेती, व्यापार और स्वास्थ्य के लिहाज से कैसा रहेगा.
लोग देवी के सामने अगरबत्ती जलाते हैं और उनके प्रकट होने का इंतजार करते हैं. कई ग्रामीण इलाकों में आज भी इस रस्म को पूरे विधि-विधान और पवित्रता के साथ निभाया जाता है. इस पूजा का सबसे दिलचस्प हिस्सा भविष्य जानना है. पूजा के दौरान परिवार के लोग देवी से सवाल पूछते हैं कि आने वाला साल खेती, व्यापार और स्वास्थ्य के लिहाज से कैसा रहेगा.
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माना जाता है कि पुतले में होने वाली हल्की सी हलचल या किसी विशेष संकेत से लोगों को उनके सवालों के जवाब मिल जाते हैं. यह परंपरा भले ही आज के आधुनिक युग में वैज्ञानिक कसौटी पर खरी न उतरे, लेकिन चीन के कई हिस्सों में यह आज भी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है.
माना जाता है कि पुतले में होने वाली हल्की सी हलचल या किसी विशेष संकेत से लोगों को उनके सवालों के जवाब मिल जाते हैं. यह परंपरा भले ही आज के आधुनिक युग में वैज्ञानिक कसौटी पर खरी न उतरे, लेकिन चीन के कई हिस्सों में यह आज भी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है.

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