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देशभर में बढ़ेंगी 5000 नई पीजी मेडिकल सीटें, केंद्र ने दी मंजूरी 

PG Medical Seat Increased: केंद्र सरकार ने अगले 4 वर्षों में 5000 अतिरिक्त पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की मंजूरी दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी है.

PG Medical Seat Increased: देश में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन की सीटें बढ़ाने की तैयारी है. केंद्र सरकार ने अगले 4 वर्षों में 5000 अतिरिक्त पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की मंजूरी दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी है. फिलहाल देश में 86,360 पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटें उपलब्ध है. नई सीटें मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों, पोस्ट ग्रेजुएट संस्थानों और सरकारी अस्पताल को मजबूत करने वाली योजना के तहत जोड़ी जाएंगी. सरकार के अनुसार 2025-26 से 2028-29 के बीच इन 5000 सीटों को बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही एक पीजी सीट के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता की अधिकतम सीमा भी बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है. इस विस्तार का उद्देश्य एक्सपर्ट डॉक्टरों की ट्रेनिंग के लिए सीटों की उपलब्धता बढ़ाना है. 

किन राज्यों में सबसे ज्यादा पीजी मेडिकल सीटें?

2026-27 के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में सबसे ज्यादा पीजी मेडिकल सीटें है. राज्य में कुल 10,092 सीटें हैं, जिनमें 2,805 सरकारी और 7,287 में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में है. इसके बाद महाराष्ट्र में 9,216 पीजी सीटें हैं. इनमें 4,277 सरकारी और 4,939 प्राइवेट सीटें हैं. तमिलनाडु में कुल 8,023 सीटें हैं, जिनमें 3,030 सरकारी और 4,993 प्राइवेट सीटें हैं. उत्तर प्रदेश में कुल 7,437 पीजी मेडिकल सीटें हैं. इनमें 3,568 सीटें सरकारी और 3,869 सीटें प्राइवेट संस्थानों में है. वहीं तेलंगाना में 5,248 और आंध्र प्रदेश में 4,782 पीजी मेडिकल सीटें हैं. आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि देश में पीजी मेडिकल शिक्षा की बड़ी संख्या अभी ऐसे राज्यों में है, जहां प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की संख्या ज्यादा है. 

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नई सीटों के लिए पूरे करने होंगे मानक 

पीजी मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी नेशनल मेडिकल कमीशन के पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023 और पोस्ट ग्रेजुएट मिनिमम स्टैंडर्ड रिक्वायरमेंट 2024 के तहत की जाएगी. नए पीजी कोर्स या अतिरिक्त सीटों के लिए आवेदन करने वाले मेडिकल कॉलेजों को फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल की सुविधाओं और क्लीनिकल सामग्री से जुड़े निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा. इन मानकों के आधार पर ही सीटों और नए कोर्स को मंजूरी दी जाएगी. वहीं नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज की ओर से भी पीजी शिक्षा के विस्तार के लिए नए कोर्स शुरू करने और Joint Accreditation Scheme लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

पीजी सीटों की मंजूरी में भी हुआ इजाफा 

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पीजी मेडिकल सीटों की मंजूरी में हुई बढ़ोतरी का आंकड़ा भी जारी किया है. 2014-15 में एनएमसी ने 415 पीजी सीटों को मंजूरी दी, जबकि एनबीईएमएस की ओर से 612 सीटें स्वीकृत की गई. वहीं 2025-26 में एनएमसी की ओर से मंजूर पीजी सीटों की संख्या बढ़कर 9,084 हो गई. इसी अवधि में एनबीईएमएस ने 2009 सीटों को मंजूरी दी. इससे पहले 2024-25 में एनएमसी ने 4188 और एनबीईएमएस ने 1667 सीटों को मंजूरी दी थी.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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