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ये हैं भारत के सबसे बेस्ट फ़ोर्स, देखिए क्या है ख़ासियत

सुरक्षाबलों ने देश में कई बड़े ऑपरेशन को सफलतापूर्वकअंजाम दिया है.आज हम आपको स्पेशल फोर्सेज के बारे में बताने जा रहे हैं. जिनके हाथों में सभी मुख्य स्थान और प्रमुखों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है.

सुरक्षाबलों ने देश में कई बड़े ऑपरेशन को सफलतापूर्वकअंजाम दिया है.आज हम आपको स्पेशल फोर्सेज के बारे में बताने जा रहे हैं. जिनके हाथों में सभी मुख्य स्थान और प्रमुखों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है.

फोर्स

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अपने देश के स्पेशल फोर्सेज में मरीन कमांडो यानी मार्कोस मौजूद हैं, जिन्हें सर्वश्रेष्ठ मरीन कमांडो की लिस्ट में शामिल किया जाता है. ये फोर्स सभी जगहों पर आपरेशन को अंजाम दे सकते हैं. लेकिन इन्हें पानी में युद्ध करने में महारथ हासिल होती है. बता दें कि इनकी फिजिकल ट्रेनिंग बहुत बहुत कठिन होती है.
अपने देश के स्पेशल फोर्सेज में मरीन कमांडो यानी मार्कोस मौजूद हैं, जिन्हें सर्वश्रेष्ठ मरीन कमांडो की लिस्ट में शामिल किया जाता है. ये फोर्स सभी जगहों पर आपरेशन को अंजाम दे सकते हैं. लेकिन इन्हें पानी में युद्ध करने में महारथ हासिल होती है. बता दें कि इनकी फिजिकल ट्रेनिंग बहुत बहुत कठिन होती है.
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भारतीय सेना की सबसे ज्यादा ट्रेंड फोर्स को पैरा कमांडो कहते हैं. बता दें कि इनकी ट्रेनिंग दुनिया में सबसे कठिन मानी जाती है. मेन्स एक्सपी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक इन्हें रोज 20 कीलोमीटर की दौड़ में शामिल होना पड़ता है, जिसमें इनकी पीठ पर करीब 60 किलो वजन लदा रहता है. बता दें कि इस टुकड़ी में सिर्फ उन्हीं जवानों का चयन होता है, जो बेहद फिट, मोटिवेटेड होते हैं.
भारतीय सेना की सबसे ज्यादा ट्रेंड फोर्स को पैरा कमांडो कहते हैं. बता दें कि इनकी ट्रेनिंग दुनिया में सबसे कठिन मानी जाती है. मेन्स एक्सपी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक इन्हें रोज 20 कीलोमीटर की दौड़ में शामिल होना पड़ता है, जिसमें इनकी पीठ पर करीब 60 किलो वजन लदा रहता है. बता दें कि इस टुकड़ी में सिर्फ उन्हीं जवानों का चयन होता है, जो बेहद फिट, मोटिवेटेड होते हैं.
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गरुड़ कमांडो फोर्स इंडियन एयरफोर्स की खास यूनिट है. ये जवान खासकर हवा से जुड़े ऑपरेशन, हवा से जमीन पर उतरकर करने वाली लड़ाई, रेस्क्यू आदि जैसे ऑपरेशन में शामिल होते हैं.
गरुड़ कमांडो फोर्स इंडियन एयरफोर्स की खास यूनिट है. ये जवान खासकर हवा से जुड़े ऑपरेशन, हवा से जमीन पर उतरकर करने वाली लड़ाई, रेस्क्यू आदि जैसे ऑपरेशन में शामिल होते हैं.
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भारतीय सेना की स्पेशल यूनिट को घातक फोर्स कहते हैं. इन जवानों को हथियारों के साथ खास ट्रेनिंग दी ही जाती है, साथ में मार्शल आर्ट्स, पहाड़ पर चढ़ना, नजदीकी लड़ाई, हथियारों या बंकरों को नष्ट करने की भी खास ट्रेनिंग दी जाती है.
भारतीय सेना की स्पेशल यूनिट को घातक फोर्स कहते हैं. इन जवानों को हथियारों के साथ खास ट्रेनिंग दी ही जाती है, साथ में मार्शल आर्ट्स, पहाड़ पर चढ़ना, नजदीकी लड़ाई, हथियारों या बंकरों को नष्ट करने की भी खास ट्रेनिंग दी जाती है.
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1986 में एनएसजी यानी ब्लैक कैट कमांडोज की इस टुकड़ी का गठन हुआ था. ये ना ही सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल होते हैं और ना ही पैरामिलिट्री के अंतर्गत आते हैं. इसमें इंडियन आर्मी और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स, दोनों के जवान शामिल होते हैं.
1986 में एनएसजी यानी ब्लैक कैट कमांडोज की इस टुकड़ी का गठन हुआ था. ये ना ही सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल होते हैं और ना ही पैरामिलिट्री के अंतर्गत आते हैं. इसमें इंडियन आर्मी और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स, दोनों के जवान शामिल होते हैं.
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कमांडो बटैलियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) ऐसी यूनिट है, जिसे गुरिल्ला वॉरफेयर की ट्रेनिंग दी जाती है. ये जवान खासकर देश में मौजूद नक्सलियों से लड़ने का काम करते हैं. ये यूनिट, सीआरपीएफ का हिस्सा है. इन्हें जंगलों में छलावरण का गजब का तरीका आता है, साथ ही ये आसानी से जंगली इलाकों में सुरक्षित रह सकते हैं. इसके अलावा पैराशूट जंप, हमला करना, और हथियारों की खास समझ इनके अंदर विकसित की जाती है. इनके स्नाइपर यूनिट, भारत की आर्म्ड फोर्स में सबसे खास मानी जाती है.
कमांडो बटैलियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) ऐसी यूनिट है, जिसे गुरिल्ला वॉरफेयर की ट्रेनिंग दी जाती है. ये जवान खासकर देश में मौजूद नक्सलियों से लड़ने का काम करते हैं. ये यूनिट, सीआरपीएफ का हिस्सा है. इन्हें जंगलों में छलावरण का गजब का तरीका आता है, साथ ही ये आसानी से जंगली इलाकों में सुरक्षित रह सकते हैं. इसके अलावा पैराशूट जंप, हमला करना, और हथियारों की खास समझ इनके अंदर विकसित की जाती है. इनके स्नाइपर यूनिट, भारत की आर्म्ड फोर्स में सबसे खास मानी जाती है.
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14 नवंबर 1962 को स्पेशल फ्रंटीयर फोर्स का गठन हुआ था, जो एक पैरामिलिट्री स्पेशल फोर्स है. ये आतंकवादियों से लड़ने में, बंदियों को छुड़ाने, कोवर्ट ऑपरेशन करने और अपरंपरागत युद्ध में एक्सपर्ट होते हैं. ये रॉ के साथ मिलकर काम करते हैं. इनको भी गुरिल्ला वॉरफेयर के तौर तरीके, हथियार, पैराशूट जंप आदि की खास ट्रेनिंग दी जाती है.
14 नवंबर 1962 को स्पेशल फ्रंटीयर फोर्स का गठन हुआ था, जो एक पैरामिलिट्री स्पेशल फोर्स है. ये आतंकवादियों से लड़ने में, बंदियों को छुड़ाने, कोवर्ट ऑपरेशन करने और अपरंपरागत युद्ध में एक्सपर्ट होते हैं. ये रॉ के साथ मिलकर काम करते हैं. इनको भी गुरिल्ला वॉरफेयर के तौर तरीके, हथियार, पैराशूट जंप आदि की खास ट्रेनिंग दी जाती है.
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2 जून 1988 में संसद के एक अधिनियम द्वारा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) का गठन किया गया था. स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का घोष वाक्य 'शौर्यम, समपर्णम और सुरक्षणम' है. फिलहाल एसपीजी में करीब 3 हजार जवान हैं. यह पीएम की सुरक्षा के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं. ये जवान अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस होते हैं.
2 जून 1988 में संसद के एक अधिनियम द्वारा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) का गठन किया गया था. स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का घोष वाक्य 'शौर्यम, समपर्णम और सुरक्षणम' है. फिलहाल एसपीजी में करीब 3 हजार जवान हैं. यह पीएम की सुरक्षा के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं. ये जवान अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस होते हैं.

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