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Car Battery Care Tips : वीकेंड-वीकेंड ही चलाते हैं कार, जानें कितने दिन खड़ी रहने पर खराब हो जाती है बैटरी?

Car Battery Care Tips : कई लोग सोचते हैं कि जब कार बंद रहती है तो बैटरी भी पूरी तरह आराम करती है, लेकिन ऐसा नहीं है. इंजन बंद होने के बाद भी कार के कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बिजली का यूज करते रहते हैं.

Car Battery Care Tips : कई लोग सोचते हैं कि जब कार बंद रहती है तो बैटरी भी पूरी तरह आराम करती है, लेकिन ऐसा नहीं है. इंजन बंद होने के बाद भी कार के कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बिजली का यूज करते रहते हैं.

अगर आपकी कार ज्यादातर समय पार्किंग में ही खड़ी रहती है और सिर्फ वीकेंड पर बाहर निकलती है, तो यह आदत आपकी कार की बैटरी पर असर डाल सकती है. कई लोग सोचते हैं कि जब कार बंद रहती है तो बैटरी भी पूरी तरह आराम करती है, लेकिन ऐसा नहीं है. इंजन बंद होने के बाद भी कार के कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम थोड़ी-थोड़ी बिजली का इस्तेमाल करते रहते हैं. यही वजह है कि लंबे समय तक बिना चलाए खड़ी रहने पर गाड़ी की बैटरी धीरे-धीरे डिस्चार्ज होने लगती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कार कितने दिन तक खड़ी रहने पर बैटरी खराब हो जाती है, किन कारणों से यह जल्दी डाउन होती है और इसे सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए.

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अगर कार की बैटरी नई और अच्छी स्थिति में है, तो सामान्य तौर पर वह करीब 2 से 4 हफ्ते तक बिना कार चलाए भी स्टार्ट करने लायक चार्ज बनाए रख सकती है. वहीं, अगर बैटरी 3 साल या उससे ज्यादा पुरानी है, तो 1 से 2 हफ्ते में ही खराब हो सकती है. बहुत ज्यादा ठंड के मौसम में यह समय कुछ दिनों से लेकर करीब 2 हफ्ते तक रह सकता है. वहीं कई मॉर्डन और ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स वाली कारों में बैटरी 1 से 3 हफ्ते में प्रभावित हो सकती है. अगर बैटरी पहले से कमजोर या खराब है, तो वह एक रात या कुछ ही दिनों में पूरी तरह डाउन हो सकती है.
अगर कार की बैटरी नई और अच्छी स्थिति में है, तो सामान्य तौर पर वह करीब 2 से 4 हफ्ते तक बिना कार चलाए भी स्टार्ट करने लायक चार्ज बनाए रख सकती है. वहीं, अगर बैटरी 3 साल या उससे ज्यादा पुरानी है, तो 1 से 2 हफ्ते में ही खराब हो सकती है. बहुत ज्यादा ठंड के मौसम में यह समय कुछ दिनों से लेकर करीब 2 हफ्ते तक रह सकता है. वहीं कई मॉर्डन और ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स वाली कारों में बैटरी 1 से 3 हफ्ते में प्रभावित हो सकती है. अगर बैटरी पहले से कमजोर या खराब है, तो वह एक रात या कुछ ही दिनों में पूरी तरह डाउन हो सकती है.
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कई लोगों को लगता है कि बैटरी सिर्फ कार स्टार्ट करने के समय काम करती है, लेकिन ऐसा नहीं है. कार बंद होने के बाद भी उसके कुछ सिस्टम लगातार बिजली लेते रहते हैं. इसे पैरासिटिक ड्रेन (Parasitic Drain) कहा जाता है. इसके अलावा आजकल की कारों में ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स होने की वजह से बैटरी पर लगातार हल्का लोड बना रहता है. अगर कार लंबे समय तक नहीं चलाई जाती, तो धीरे-धीरे बैटरी का चार्ज कम होने लगता है.बैटरी की उम्र और परफॉर्मेंस कई बातों पर निर्भर करती है. सामान्य परिस्थितियों में कार की बैटरी 3 से 5 साल तक चल सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड में इसकी लाइफ कम हो सकती है. अगर कार की हेडलाइट, केबिन लाइट, रेडियो, USB चार्जर, डैश कैम या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लंबे समय तक चालू रह जाएं, तो बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो सकती है. वहीं, जो लोग रोज सिर्फ 10 से 15 मिनट की छोटी दूरी तय करते हैं, उनकी बैटरी भी पूरी तरह चार्ज नहीं हो पाती, अल्टरनेटर को पर्याप्त समय नहीं मिलता है.
कई लोगों को लगता है कि बैटरी सिर्फ कार स्टार्ट करने के समय काम करती है, लेकिन ऐसा नहीं है. कार बंद होने के बाद भी उसके कुछ सिस्टम लगातार बिजली लेते रहते हैं. इसे पैरासिटिक ड्रेन (Parasitic Drain) कहा जाता है. इसके अलावा आजकल की कारों में ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स होने की वजह से बैटरी पर लगातार हल्का लोड बना रहता है. अगर कार लंबे समय तक नहीं चलाई जाती, तो धीरे-धीरे बैटरी का चार्ज कम होने लगता है.बैटरी की उम्र और परफॉर्मेंस कई बातों पर निर्भर करती है. सामान्य परिस्थितियों में कार की बैटरी 3 से 5 साल तक चल सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड में इसकी लाइफ कम हो सकती है. अगर कार की हेडलाइट, केबिन लाइट, रेडियो, USB चार्जर, डैश कैम या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लंबे समय तक चालू रह जाएं, तो बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो सकती है. वहीं, जो लोग रोज सिर्फ 10 से 15 मिनट की छोटी दूरी तय करते हैं, उनकी बैटरी भी पूरी तरह चार्ज नहीं हो पाती, अल्टरनेटर को पर्याप्त समय नहीं मिलता है.
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बैटरी की उम्र और परफॉर्मेंस कई बातों पर निर्भर करती है. सामान्य परिस्थितियों में कार की बैटरी 3 से 5 साल तक चल सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड में इसकी लाइफ कम हो सकती है. अगर कार की हेडलाइट, केबिन लाइट, रेडियो, USB चार्जर, डैश कैम या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लंबे समय तक चालू रह जाएं, तो बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो सकती है. वहीं, जो लोग रोज सिर्फ 10 से 15 मिनट की छोटी दूरी तय करते हैं, उनकी बैटरी भी पूरी तरह चार्ज नहीं हो पाती, अल्टरनेटर को पर्याप्त समय नहीं मिलता है.
बैटरी की उम्र और परफॉर्मेंस कई बातों पर निर्भर करती है. सामान्य परिस्थितियों में कार की बैटरी 3 से 5 साल तक चल सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड में इसकी लाइफ कम हो सकती है. अगर कार की हेडलाइट, केबिन लाइट, रेडियो, USB चार्जर, डैश कैम या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लंबे समय तक चालू रह जाएं, तो बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो सकती है. वहीं, जो लोग रोज सिर्फ 10 से 15 मिनट की छोटी दूरी तय करते हैं, उनकी बैटरी भी पूरी तरह चार्ज नहीं हो पाती, अल्टरनेटर को पर्याप्त समय नहीं मिलता है.
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अगर कार स्टार्ट करते समय इंजन पहले की तुलना में ज्यादा समय ले रहा है या सिर्फ क्लिक जैसी आवाज आ रही है, तो यह बैटरी खराब होने का संकेत हो सकता है. इसके अलावा हेडलाइट्स या केबिन लाइट्स का धीमा होना, बार-बार जंप स्टार्ट की जरूरत पड़ना या डैशबोर्ड पर बैटरी वार्निंग लाइट जलना भी बैटरी खराब होने के संकेत हैं.  अगर इंजन बंद करके केवल इग्निशन ऑन रखने के बाद 5 मिनट में ही स्क्रीन या लाइट्स बंद होने लगें, तो बैटरी बदलने का समय आ सकता है. अच्छी बैटरी इंजन बंद होने के बाद भी 20 से 30 मिनट तक सामान्य लोड संभाल सकती है.
अगर कार स्टार्ट करते समय इंजन पहले की तुलना में ज्यादा समय ले रहा है या सिर्फ क्लिक जैसी आवाज आ रही है, तो यह बैटरी खराब होने का संकेत हो सकता है. इसके अलावा हेडलाइट्स या केबिन लाइट्स का धीमा होना, बार-बार जंप स्टार्ट की जरूरत पड़ना या डैशबोर्ड पर बैटरी वार्निंग लाइट जलना भी बैटरी खराब होने के संकेत हैं. अगर इंजन बंद करके केवल इग्निशन ऑन रखने के बाद 5 मिनट में ही स्क्रीन या लाइट्स बंद होने लगें, तो बैटरी बदलने का समय आ सकता है. अच्छी बैटरी इंजन बंद होने के बाद भी 20 से 30 मिनट तक सामान्य लोड संभाल सकती है.
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अगर कार का इस्तेमाल कम करते हैं, तो हफ्ते में एक या दो बार कम से कम 20 से 30 मिनट तक कार चलाएं जिससे अल्टरनेटर बैटरी को ठीक से चार्ज कर सके. अगर कार कई हफ्ते या महीनों तक खड़ी रहने वाली है, तो बैटरी का नेगेटिव टर्मिनल डिस्कनेक्ट किया जा सकता है. हालांकि ऐसा करने पर रेडियो, घड़ी और कुछ मेमोरी सेटिंग्स रीसेट हो सकती हैं. लंबे समय तक स्टोरेज के दौरान ट्रिकल चार्जर या बैटरी मेंटेनर का इस्तेमाल भी बैटरी को चार्ज रखने में मदद करता है. साथ ही समय-समय पर बैटरी के टर्मिनल्स की सफाई और साल में एक बार मैकेनिक से जांच करवाना भी जरूरी है.
अगर कार का इस्तेमाल कम करते हैं, तो हफ्ते में एक या दो बार कम से कम 20 से 30 मिनट तक कार चलाएं जिससे अल्टरनेटर बैटरी को ठीक से चार्ज कर सके. अगर कार कई हफ्ते या महीनों तक खड़ी रहने वाली है, तो बैटरी का नेगेटिव टर्मिनल डिस्कनेक्ट किया जा सकता है. हालांकि ऐसा करने पर रेडियो, घड़ी और कुछ मेमोरी सेटिंग्स रीसेट हो सकती हैं. लंबे समय तक स्टोरेज के दौरान ट्रिकल चार्जर या बैटरी मेंटेनर का इस्तेमाल भी बैटरी को चार्ज रखने में मदद करता है. साथ ही समय-समय पर बैटरी के टर्मिनल्स की सफाई और साल में एक बार मैकेनिक से जांच करवाना भी जरूरी है.
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हमेशा अपनी कार के अनुसार अच्छी क्वालिटी की बैटरी चुनें. बेहतर क्वालिटी की बैटरी लंबे समय तक बेहतर परफॉर्मेंस देती है. इसके साथ मिलने वाली वारंटी पर भी ध्यान दें. ज्यादा वारंटी वाली बैटरी समय से पहले खराब होने पर रिप्लेसमेंट या अन्य सुविधाएं देने में मदद करती है. वहीं, कम कीमत वाली कई बैटरियों में वारंटी कम या बिल्कुल नहीं मिलती है.
हमेशा अपनी कार के अनुसार अच्छी क्वालिटी की बैटरी चुनें. बेहतर क्वालिटी की बैटरी लंबे समय तक बेहतर परफॉर्मेंस देती है. इसके साथ मिलने वाली वारंटी पर भी ध्यान दें. ज्यादा वारंटी वाली बैटरी समय से पहले खराब होने पर रिप्लेसमेंट या अन्य सुविधाएं देने में मदद करती है. वहीं, कम कीमत वाली कई बैटरियों में वारंटी कम या बिल्कुल नहीं मिलती है.

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