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Kapal Kriya: कपाल क्रिया क्या होती है, ये कब की जाती है?
Kapal Kriya: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद विधिपूर्वक अंतिम संस्कार होता है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य रस्म कपाल क्रिया मानी जाती है, जो आत्मा की मुक्ति के लिए की जाती है.
Kapal Kriya
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गरुड़ पुराण में कपाल क्रिया को मृत्यु के बाद की सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रक्रिया माना गया है. हिंदू धर्म में जब किसी व्यक्ति का दाह संस्कार किया जाता है, तो केवल शरीर का जलना पर्याप्त नहीं होता. आत्मा की पूरी मुक्ति के लिए विशेष विधियां अपनाई जाती हैं, जिनमें कपाल क्रिया प्रमुख है. यह आत्मा को शारीरिक बंधन से मुक्त करने का मार्ग बताती है.
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कपाल क्रिया का अर्थ है मृतक की खोपड़ी को तोड़ना. जब चिता पर शव जल रहा होता है और मुखाग्नि दी जा चुकी होती है, तब लकड़ी के डंडे से सिर पर तीन बार प्रहार किया जाता है. ऐसा करने का उद्देश्य यह है कि सिर के ऊपरी भाग में स्थित ब्रह्मरंध्र खुल सके. यह ब्रह्मरंध्र जीवन और मोक्ष का द्वार माना जाता है, जिससे आत्मा निकलती है.
Published at : 29 May 2025 07:45 AM (IST)
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