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Mahabharat: एक अपमान ने बदल दी दो मित्रों की किस्मत, महाभारत की यह कथा देती है बड़ी सीख
Mahabharat: द्रोणाचार्य और द्रुपद की कथा सिखाती है कि अहंकार रिश्तों को तोड़ देता है, जबकि अनुशासन, धैर्य और सम्मान सफलता का मार्ग बनाते हैं. जानिए इस प्रेरक प्रसंग की सीख.
महाभारत कथा
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आचार्य द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों से गुरु दक्षिणा के रूप में पांचाल नरेश द्रुपद को बंदी बनाकर लाने की इच्छा जताई. यह केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि वर्षों पुराने अपमान का प्रतिशोध भी था. गुरु का आदेश सुनते ही कौरव और पांडव दोनों युद्ध की तैयारी में जुट गए.
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दुर्योधन, कर्ण और अन्य कौरव योद्धा विशाल सेना लेकर पांचाल राज्य पर चढ़ाई कर देते हैं. उन्हें विश्वास था कि वे आसानी से द्रुपद को पराजित कर देंगे. लेकिन पांचाल की सेना ने जबरदस्त प्रतिरोध किया और युद्ध का रुख बदलना शुरू कर दिया.
Published at : 07 Jun 2026 06:00 AM (IST)
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