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यूरिया नहीं मिला तो किन फसलों को होगा नुकसान, जानें कितनी बढ़ जाएगी लागत?
Urea Impact On Crops: यूरिया की कमी फसलों की ग्रोथ पर ब्रेक लगा देती है, जिससे गेहूं और धान जैसी मुख्य फसलों की पैदावार गिर जाती है. खाद न मिलने से किसानों का खर्चा बढ़ जाता है.
खेती-किसानी में यूरिया की अहमियत किसी से छिपी नहीं है और अगर ऐन वक्त पर इसकी किल्लत हो जाए, तो किसानों की रातों की नींद उड़ जाती है. खास तौर पर गेहूं, धान और मक्के जैसी फसलों के लिए यूरिया किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है. अगर मिट्टी को जरूरत के हिसाब से नाइट्रोजन नहीं मिला. तो फसलों की ग्रोथ रुक जाती है और पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है.
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गेहूं में कल्ले निकलते समय और धान की रोपाई के शुरुआती हफ्तों में यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. अगर इस समय खाद नहीं मिली तो पौधों का रंग पीला पड़ने लगता है. बिना पर्याप्त पोषण के फसल कमजोर रह जाती है, जिससे दाने छोटे पैदा होते हैं और कुल उत्पादन में 20 से 30 परसेंट की गिरावट आती है.
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यूरिया की किल्लत होते ही ब्लैक मार्केट का खेल शुरू हो जाता है. जिससे खेती की लागत अचानक आसमान छूने लगती है. सरकारी रेट पर जो बोरी लगभग 266 रुपये की मिलती है. वही ब्लैक में 500 से 800 रुपये तक बिकती है. यानी खाद की मद में ही किसान का खर्च सीधे तौर पर दोगुना से तीन गुना बढ़ जाता है.
Published at : 17 Apr 2026 12:06 PM (IST)
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