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Cow Breed Identification: गाय खरीदने जा रहे हैं? ऐसे करें देसी और विदेशी नस्ल की पहचान, वरना खा जाएंगे धोखा

गाय की शारीरिक बनावट दूध देने की क्षमता, स्वभाव और मौसम के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता देखकर उसकी नस्ल की पहचान की जा सकती है. भारत में पाई जाने वाली गायों को देसी नस्ल माना जाता है.

गाय की शारीरिक बनावट दूध देने की क्षमता, स्वभाव और मौसम के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता देखकर उसकी नस्ल की पहचान की जा सकती है. भारत में पाई जाने वाली गायों को देसी नस्ल माना जाता है.

Cow Breed Identification: दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन से अच्छी कमाई करने के लिए सही नस्ल की गाय चुनना सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन कई बार जानकारी न होने के चलते पशुपालक देसी और विदेशी नस्ल की गाय की सही पहचान नहीं कर पाते और गलत पशु खरीद लेते हैं. इसका असर दूध उत्पादन और मुनाफे पर भी पड़ता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आप भी गाय खरीदने जा रहे हैं, तो देसी और विदेशी नस्ल की पहचान कैसे करें.

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दरअसल गाय की शारीरिक बनावट दूध देने की क्षमता, स्वभाव और मौसम के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता देखकर उसकी नस्ल की पहचान की जा सकती है. भारत में पाई जाने वाली गायों को देसी नस्ल माना जाता है, जबकि यूरोपीय देशों से आने वाली गायों को विदेशी नस्ल की कैटेगरी में रखा जाता है.
दरअसल गाय की शारीरिक बनावट दूध देने की क्षमता, स्वभाव और मौसम के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता देखकर उसकी नस्ल की पहचान की जा सकती है. भारत में पाई जाने वाली गायों को देसी नस्ल माना जाता है, जबकि यूरोपीय देशों से आने वाली गायों को विदेशी नस्ल की कैटेगरी में रखा जाता है.
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देसी और विदेशी गायों की नस्ल की पहचान सबसे पहले उनके शरीर के बनावट से की जा सकती है. देसी गाय के पीठ पर कूबड़ होता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय में यह नहीं होता है. वहीं देसी गाय के सींग आमतौर पर ऊपर की ओर उठ होते हैं, जबकि विदेशी गाय के सींग सीधे या बाहर की तरफ निकले होते हैं.
देसी और विदेशी गायों की नस्ल की पहचान सबसे पहले उनके शरीर के बनावट से की जा सकती है. देसी गाय के पीठ पर कूबड़ होता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय में यह नहीं होता है. वहीं देसी गाय के सींग आमतौर पर ऊपर की ओर उठ होते हैं, जबकि विदेशी गाय के सींग सीधे या बाहर की तरफ निकले होते हैं.
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इसके अलावा देसी गाय की पीठ हल्की उभरी हुई दिखाई देती है, वहीं विदेशी गाय की पीठ सीधी होती है. देसी गाय का थन छोटा होता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय का थन बड़ा और ज्यादा विकसित होता है.
इसके अलावा देसी गाय की पीठ हल्की उभरी हुई दिखाई देती है, वहीं विदेशी गाय की पीठ सीधी होती है. देसी गाय का थन छोटा होता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय का थन बड़ा और ज्यादा विकसित होता है.
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वहीं दूध देने की क्षमता के आधार पर भी दोनों नसों में अंतर पता किया जा सकता है. सामान्य तौर पर देसी नस्ल की गाय रोजाना करीब 6 से 8 लीटर दूध देती है, वहीं विदेशी नस्ल की गाय रोजाना लगभग 15 से 30 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. हालांकि देशी गाय के दूध में फैट ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय के दूध में फैट कम होता है.
वहीं दूध देने की क्षमता के आधार पर भी दोनों नसों में अंतर पता किया जा सकता है. सामान्य तौर पर देसी नस्ल की गाय रोजाना करीब 6 से 8 लीटर दूध देती है, वहीं विदेशी नस्ल की गाय रोजाना लगभग 15 से 30 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. हालांकि देशी गाय के दूध में फैट ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय के दूध में फैट कम होता है.
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वहीं देसी गाय की स्किन मोटी और ढीली होती है और उसके गर्दन के आसपास सिलवटें भी दिखाई देती है, दूसरी और विदेशी नस्ल की गाय की स्किन पतली और कसी हुई होती है.
वहीं देसी गाय की स्किन मोटी और ढीली होती है और उसके गर्दन के आसपास सिलवटें भी दिखाई देती है, दूसरी और विदेशी नस्ल की गाय की स्किन पतली और कसी हुई होती है.
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देसी गाय का पिछला हिस्सा हल्का ढलान लिए होता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय का पिछला हिस्सा समतल होता है. पूंछ के ऊपरी हिस्से से भी दोनों नस्लों की पहचान की जा सकती है. देसी गाय में पूंछ का हिस्सा हड्डियों के बीच दबा रहता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय में यह हिस्सा ऊपर उठा दिखाई देता है.
देसी गाय का पिछला हिस्सा हल्का ढलान लिए होता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय का पिछला हिस्सा समतल होता है. पूंछ के ऊपरी हिस्से से भी दोनों नस्लों की पहचान की जा सकती है. देसी गाय में पूंछ का हिस्सा हड्डियों के बीच दबा रहता है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय में यह हिस्सा ऊपर उठा दिखाई देता है.
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देसी नस्ल की गाय आमतौर पर 3 साल 4 महीने से 3 साल 9 महीने के बीच की उम्र में पहला बछड़ा देती है, वहीं विदेशी नस्ल की गाय लगभग 2 साल 3 महीने से 2 साल 6 महीने की उम्र में ही पहला बछड़ा दे सकती है.
देसी नस्ल की गाय आमतौर पर 3 साल 4 महीने से 3 साल 9 महीने के बीच की उम्र में पहला बछड़ा देती है, वहीं विदेशी नस्ल की गाय लगभग 2 साल 3 महीने से 2 साल 6 महीने की उम्र में ही पहला बछड़ा दे सकती है.
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इनके अलावा देसी गाय की आवाज भारी होती है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय की आवाज हल्की होती है. वहीं स्वभाव की बात करें तो देसी गाय शांत मानी जाती है और बीमारियों के प्रति ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता रखती है, वहीं विदेशी नस्ल की गायों को मौसम में बदलाव के दौरान ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है.
इनके अलावा देसी गाय की आवाज भारी होती है, जबकि विदेशी नस्ल की गाय की आवाज हल्की होती है. वहीं स्वभाव की बात करें तो देसी गाय शांत मानी जाती है और बीमारियों के प्रति ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता रखती है, वहीं विदेशी नस्ल की गायों को मौसम में बदलाव के दौरान ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है.

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