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परवल खरीदने के लिए अब नहीं जाना होगा बाजार, घर पर आसानी से उगा सकते हैं आप

Parwal Growing Tips: अब बाजार से महंगी और केमिकल वाली सब्जियां खरीदने की जरूरत नहीं है. अपने घर की छत या बालकनी में गमले के अंदर ताज़ा और ऑर्गेनिक परवल आसानी से उगा सकते हैं.

Parwal Growing Tips: गर्मियों के सीजन में परवल की सब्जी लगभग हर घर में बनती है. लेकिन अक्सर बाजार में इसके दाम आसमान छूने लगते हैं. कई बार तो मार्केट में ताजी सब्जी ढूंढना भी एक बड़ा टास्क बन जाता है. अगर आप भी इस झंझट से बचना चाहते हैं, तो सबसे बढ़िया तरीका है कि इसे अपने घर की छत या बालकनी में ही उगा लें.  

परवल को गमले में उगाना बेहद आसान है और इसके लिए आपको किसी बड़े खेत की बिल्कुल जरूरत नहीं है. घर पर उगाई गई सब्जियों का स्वाद तो लाजवाब होता ही है. इसके साथ ही यह पूरी तरह से केमिकल और पेस्टिसाइड फ्री होती हैं. बस थोड़े से सही तरीके और सही देखभाल के साथ आप घर बैठे ही गमले से ताजे-ताजे परवल तोड़कर अपनी रसोई में इस्तेमाल कर सकते हैं.

गमले का सही साइज जरूरी 

परवल उगाने के लिए सबसे पहले आपको सही साइज का गमला चुनना होगा. चूंकि यह एक बेल वाली सब्जी है इसलिए कम से कम 12 से 15 इंच गहरा और चौड़ा गमला सबसे बेस्ट रहता है. गमले के नीचे ड्रेनेज होल यानी पानी निकलने का रास्ता जरूर होना चाहिए जिससे जड़ों में पानी जमा होकर वे सड़ें नहीं. 

मिट्टी तैयार करने का सही तरीका

अब बात करते हैं मिट्टी की, तो परवल के लिए नॉर्मल मिट्टी में 40 परसेंट वर्मीकंपोस्ट या पुरानी गोबर की खाद और थोड़ी सी रेत मिलाकर एक बढ़िया पोटिंग मिक्स तैयार कर लें. आप इसे बीज से या फिर नर्सरी से इसकी कटिंग लाकर सीधे गमले में लगा सकते हैं. कटिंग से पौधा बहुत तेजी से ग्रोथ करता है और फल भी जल्दी देने लगता है.

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बेल की देखरेख करें

चूंकि परवल एक क्रीपर यानी बेल वाला पौधा है. इसलिए जैसे-जैसे इसकी लंबाई बढ़े, इसे सहारा देने के लिए किसी लकड़ी या रस्सी की मदद से मचान बना दें. इससे बेल ऊपर की तरफ फैलेगी और उसे धूप भी अच्छी मिलेगी जिससे फल ज्यादा मात्रा में आएंगे. पौधे को ऐसी जगह रखें जहां दिन की कम से कम 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप आती हो. 

पानी और खाद का रखें ध्यान

पानी का ध्यान रखें कि मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनी रहे, लेकिन कीचड़ न होने पाए. हर 20 से 25 दिन में एक बार थोड़ी सी ऑर्गेनिक खाद या नीम खली डालते रहें. महज 3 से 4 महीने के भीतर आपकी बेल पर सुंदर परवल लटकने लगेंगे. जिन्हें आप जब चाहें तब ताजा तोड़कर बना सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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