Worms Farming Tips: खेती करने के लिए कौन-से केंचुए सबसे ज्यादा असरकार, जानें कहां से खरीदें?
Worms Farming Tips: भारत की गर्म जलवायु में वर्मी कंपोस्ट के लिए आईसीनिया फेटिडा और अफ्रीकन नाइटक्रॉलर सबसे असरदार प्रजातियां हैं, जो KVK या IndiaMART जैसे प्लेटफॉर्म से खरीदी जा सकती हैं.

Worms Farming Tips: रासायनिक खाद के साइड इफक्ट्स से परेशान भारतीय किसान अब तेजी से जैविक खेती की तरफ लौट रहे हैं, और इसमें सबसे बड़ा किरदार निभाते हैं, वही छोटे छोटे केंचुए, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाने का काम करते हैं. लेकिन हर केंचुआ एक जैसा असरदार नहीं होता, इसलिए भारत की गर्म जलवायु के हिसाब से सही प्रजाति चुनना बेहद जरूरी है.
कौन-सा केंचुआ भरोसेमंद है किसानों के लिए?
वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद बनाने के लिए भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है आईसीनिया फेटिडा प्रजाति, जिसे रेड विगलर भी कहा जाता है. यह प्रजाति रसोई और खेत के जैविक कचरे को तेजी से खाद में बदल देती है, तेजी से प्रजनन करती है, और अलग अलग मौसम में भी आसानी से ढल जाती है. यही वजह है कि नए किसानों के लिए यह सबसे सुरक्षित और आसान शुरुआत मानी जाती है.
कौन-सा है भारतीय मौसम के हिसाब से खास?
एक और प्रजाति जो भारतीय किसानों के बीच तेजी से पसंदीदा हो रही है, वह है यूड्रिलस यूजीनी जिसे अफ्रीकन नाइटक्रॉलर कहा जाता है. यह प्रजाति मूल रूप से पश्चिम अफ्रीका की है, लेकिन भारत जैसे गर्म इलाकों में यह आईसीनिया फेटिडा से भी तेज गति से बढ़ती और प्रजनन करती है. 24 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में यह सबसे बेहतर रिजल्ट देती है, यानी भारत के ज्यादातर राज्यों का मौसम इसके लिए बिल्कुल मुनासिब है. साथ ही इसका आकार भी बड़ा होता है, जिससे यह ज्यादा मात्रा में जैविक कचरा तेजी से खाद में बदल सकती है.
यह भी पढ़ें: Stevia Cultivation Profit: ऐसे शुरू करें स्टीविया की खेती, गन्ने से ज्यादा होगी कमाई
कितने केंचुए चाहिए होते हैं?
खाद बनाने की मात्रा केंचुओं की संख्या पर निर्भर करती है. सामान्य नियम यह है कि करीब एक किलो केंचुए, सौ किलो जैविक कचरे को खाद में बदलने के लिए काफी होते हैं. जैसे जैसे केंचुओं की संख्या नर्सरी बेड में बढ़ती जाती है, हर 50 से 60 दिन में नया बेड बनाकर उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है.
खाद बनाने का प्रोसेस भी बेहद आसान
खाद तैयार करने के लिए जमीन या टंकी में पहले दो तीन इंच सूखी पत्तियां बिछाई जाती हैं, इसके ऊपर गोबर की परत डाली जाती है, फिर सब्जी फल के छिलके जैसा जैविक कचरा डाला जाता है. इसके बाद इसी में केंचुए छोड़ दिए जाते हैं. ध्यान रहे, इसमें प्लास्टिक या तेल वाली चीजें बिल्कुल न मिलाएं, वरना केंचुए मर सकते हैं.
कहां से करें असली केंचुओं की खरीद?
केंचुए खरीदने के लिए किसान कई विकल्प इस्तेमाल कर सकते हैं. सबसे भरोसेमंद जरिया है नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र य, जहां अक्सर सब्सिडी दरों पर भी केंचुए उपलब्ध कराए जाते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी अफ्रीकन नाइटक्रॉलर और आईसीनिया फेटिडा दोनों प्रजातियां आसानी से मिल जाती हैं, जिनकी कीमत आमतौर पर 300 से 400 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है.
जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
केंचुओं को तेज धूप और सीधी बारिश से बचाना जरूरी है, इसके लिए घास फूस का शेड बनाना फायदेमंद रहता है. साथ ही नमी और नियमित भोजन का ध्यान रखा जाए, तो केंचुए लगातार ऐक्टिव रहते हैं और खाद बनाने में कोई रुकावट नहीं आती.
यह भी पढ़ें: Kisan Nidhi Registration:किसान निधि के लिए पहली बार कर रहे आवेदन? न कर देना ये गलती






















