तेलंगाना की राजनीति में बड़ा उलटफेर, विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज की दलबदल याचिका, BRS को लगा झटका
तेलंगाना में पिछले कई महीनों से विधायकों के पाला बदलने को लेकर कानूनी और राजनीतिक जंग छिड़ी हुई है. इस पूरे विवाद की जड़ें 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद के घटनाक्रम में छिपी हैं.

तेलंगाना के विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) की तरफ से दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. गुरुवार को विधानसभा सचिवालय में हुई कार्यवाही के दौरान, स्पीकर ने चेवेल्ला विधायक काले यादैया और पूर्व स्पीकर व बांसवाड़ा विधायक पोचारम श्रीनिवास रेड्डी के खिलाफ दलबदल के आधार पर की गई कार्रवाई की मांग को सिरे से खारिज कर दिया. स्पीकर ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वर्तमान रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर दोनों विधायक अभी भी बीआरएस का हिस्सा हैं और उनके दल बदलने के कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए गए हैं.
स्पीकर गड्डम प्रसाद कुमार ने कहा, 'शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह पाया गया कि काले यादैया और पोचारम श्रीनिवास रेड्डी आधिकारिक तौर पर बीआरएस के सदस्य बने हुए हैं. उनके किसी अन्य दल की सदस्यता लेने के तथ्यात्मक प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं मिले हैं.'
विधायकों के पाला बदलने को लेकर छिड़ी हुई है राजनीतिक जंग
यह बयान उस समय आया है जब तेलंगाना में पिछले कई महीनों से विधायकों के पाला बदलने को लेकर कानूनी और राजनीतिक जंग छिड़ी हुई है. इस पूरे विवाद की जड़ें 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद के घटनाक्रम में छिपी हैं. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद, बीआरएस के कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी, जिसे बीआरएस ने 'दलबदल' करार दिया था.
पार्टी ने संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए स्पीकर और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. पोचारम श्रीनिवास रेड्डी और काले यादैया का कांग्रेस के कार्यक्रमों में दिखना इस विवाद का मुख्य केंद्र बिंदु था.
बीआरएस को बड़ा झटका
स्पीकर का यह फैसला बीआरएस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो अपने कुनबे को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है. हालांकि, यह फैसला केवल इन दो विधायकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य में अन्य विधायकों के खिलाफ लंबित याचिकाओं के लिए भी एक मिसाल बन सकता है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीआरएस इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकती है. फिलहाल, इस निर्णय ने दल बदलने के आरोपों का सामना कर रहे विधायकों को तात्कालिक संजीवनी प्रदान की है, लेकिन तेलंगाना की सत्ता संघर्ष की यह लड़ाई अभी थमने वाली नहीं है.
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