'भगवान श्रीराम ने बीजेपी की सदस्यता ले ली है?' तेलंगाना में TPCC अध्यक्ष महेश गौड़ ने बीजेपी पर साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी पर धर्म को चुनावी हथियार बनाने, आस्था का राजनीतिकरण करने का गंभीर आरोप लगाया. तेलंगाना की राजनीति में धर्म और विकास के मुद्दों पर तीखी बहस छिड़ी हुई है.

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता भूमा महेश कुमार गौड़ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा प्रहार करते हुए निशाना साधा है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महेश गौड़ ने बीजेपी की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि, 'क्या भगवान श्रीराम ने बीजेपी की सदस्यता ले ली है?'
उन्होंने भाजपा पर धर्म को चुनावी हथियार बनाने और आस्था का राजनीतिकरण करने का गंभीर आरोप लगाया. यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना की राजनीति में धर्म और विकास के मुद्दों पर तीखी बहस छिड़ी हुई है.
'धर्म एक आस्था का व्यक्तिगत विषय है'
भूमा महेश ने कहा कि आस्था एक व्यक्तिगत विषय है. भगवान पर किसी एक राजनीतिक दल का एकाधिकार नहीं हो सकता. उन्होंने कहा, मैं भी एक हिंदू हूं. प्रतिदिन भगवान की पूजा अर्चना करने के बाद अपने घर से बाहर कदम रखता हूं. लेकिन मैंने या मेरी पार्टी ने कभी भी अपनी भक्ति का प्रदर्शन वोट मांगने के लिए नहीं किया. भाजपा आखिर किस अधिकार से भगवान राम को अपनी निजी संपत्ति की तरह पेश करती है?'
उन्होंने आगे कहा कि भगवान राम, हनुमान, शिव, वेंकटेश्वर स्वामी और माता दुर्गा हम सभी के हैं, वे पूरे देश और हर श्रद्धालु के हैं, न कि केवल भाजपा के.
'चुनाव आते ही बीजेपी को हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे याद आने लगते हैं'
महेश गौड़ ने भाजपा की रणनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा को अचानक हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों की याद आने लगती है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जनता की भावनाओं से खेलकर सत्ता हथियाना चाहती है, जबकि जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों की जरूरत है. उन्होंने सवाल किया कि भाजपा केवल वोटों के ध्रुवीकरण के लिए धर्म का सहारा क्यों लेती है? कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सभी धर्मों का सम्मान करती है और सेवा ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म है.
तेलंगाना में बीजेपी और कांग्रेस में बयानबाजी जारी
पिछले कुछ समय से तेलंगाना में भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक युद्ध तेज हो गया है. विशेष रूप से निजामाबाद का नाम बदलकर इंदूर करने के प्रस्ताव और धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक उपयोग को लेकर दोनों दलों के बीच तनातनी बनी हुई है. भाजपा जहां खुद को हिंदुत्व के रक्षक के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस नेता भूमा महेश जैसे नेता इस धार्मिक ब्रांडिंग को चुनौती देकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि हिंदू धर्म और आस्था किसी एक दल के मोहताज नहीं हैं.
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