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मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने पर नर्म पड़ा चीन, कहा- मामले को हल करने की कोशिश होगी

भारत सरकार पिछले कई सालों से मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित करवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपील कर रहा है लेकिन हर बार उसे चीन बचा लेता है. अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन के अलावा रूस और चीन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, इन पांचों देशों को वीटो का अधिकार है.

बीजिंग: मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने की भारत की कोशिशें रंग लाने लगी हैं. अजहर को यूएनएससी की प्रतिबंधित सूची में डालने को लेकर चल रही कवायदों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच चीन ने नरमी के संकेत दिए हैं. चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता गैंग शुअंग ने कहा है कि चीन इस मुद्दे का समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सुरक्षा परिषद की 1267 समिति के दायरे में इसका समाधान निकल जाएगा. इस मामले पर चल रहे राजनीतिक संवाद में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है, यह मामला सुलझ जाएगा.

बता दें कि मार्च महीने में चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर अड़ंगा लगा दिया था. संयुक्त राष्ट्र में फैसले से कुछ घंटे पहले चीन ने वीटो का इस्तेमाल कर मसूद अजहर को बचाया था. चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा था कि हम बिना सबूतों के कार्रवाई के खिलाफ है और हमें जांच के लिए और वक्त चाहिए.

ये दस साल में चौथी बार था जब चीन ने यूएनएससी में मसूद अजहर को बचाया है. अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन के अलावा रूस और चीन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, इन पांचों देशों को वीटो का अधिकार है. अगर कोई एक सदस्य भी वीटो का इस्तेमाल करता है तो प्रस्ताव खारिज हो जाता है.

अजहर पर प्रतिबंध लगाने की भारत की कोशिश कब शुरू हुई? जैश-ए-मोहम्मद ने जब पठानकोट में वायु सेना अड्डे पर हमले की जिम्मेदारी का दावा किया था तब भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की थी कि उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया जाए. भारत ने यूएनएससी (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) की समिति के सामने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की मांग की. इसके बाद फरवरी में हुए पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद भी भारत ने यूएन में मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने मांग की थई. बता दें कि मसूद अजहर को कंधार विमान अपहरण कांड के बाद अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार ने छोड़ दिया था.

चीन मसूद अजहर का समर्थन क्यों कर रहा है? माना जा रहा है कि चीन और पाकिस्तान 'ऑल वेदर फ्रेंड्स' की तरह हैं. इसके साथ ही चीन भारत को एक प्रतियोगी और यहां तक ​​कि एक बड़े खतरे के रूप में भी देखता है. चीन का अजहर का समर्थन करना भारत को तकलीफ पहुंचाने और पाकिस्तान को खुश करने का एक तरीका है.

इसके अलावा चीन और पाकिस्तान कई समझौतों के साझीदार भी हैं. चीन ने पाकिस्तान के साथ हाल में ही $51 बिलियन वन रोड वन बेल्ट (OROB) योजना सहित अन्य विकास परियोजनाओं में निवेश किया है.

एक अन्य कारण यह भी है कि 1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद 1959 में तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को भारत ने शरण दी. चीन इस बात से भी खफा है, चीन का मानना है कि दलाई लामा चीन के लिए वही है जो भारत के लिए हाफिज सईद है.

ग्लोबल आतंकी घोषित से क्या होता? भारत सरकार पिछले कई सालों से मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित करवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपील कर रहा है लेकिन हर बार उसे चीन बचा लेता है. ग्लोबल टैररिस्ट घोषित होने के बाद मसूद अज़हर किसी भी देश में यात्रा नहीं कर पाता. पूरी दुनिया में मसूद की संपत्तियां जब्त कर ली जाती. मसूद किसी भी देश से हथियार नहीं खरीद पाता और सबसे बड़ी बात इसके बाद पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने खुलकर मसूद अज़हर का बचाव नहीं कर पाता.

कौन है आतंक का आका मसूद अजहर? पाकिस्तान के बहावलपुर में रहने वाला मसूद अजहर का नाम पहली बार 1999 में सुर्खियों में आया था जब कंधार विमान हाईजैक कांड में भारत सरकार ने उसे रिहा करके बंधकों को छुड़वाया था. तब से मसूद भारत में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दे चुका है. मसूद अजहर पाकिस्तान से चलने वाले आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का सरगना है.

1999 में कंधार विमान अपहरण कांड के पीछे मसूद का ही दिमाग था, 2001 में संसद पर हुए हमले में भी मसूद का हाथ सामने आया था. 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमले के लिए भी मसूद जिम्मेदार है. 2016 में उरी में आर्मी कैंप पर हमले के पीछे भी मसूद अजहर था. इसके साथ ही पिछले महीने पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हमले का मास्टरमाइंड भी मसूद अजहर है.

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