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Gaya Ji: मोक्ष नगरी ‘गया जी’ कैसे बना पितरों के मोक्ष प्राप्ति का मार्ग, जानें

Gaya Ji: बिहार के गया का नाम बदलकर अब ‘गया जी’ कर दिया गया है, जोकि पितरों के मोक्ष प्राप्ति का मार्ग और विशेष धार्मिक स्थल है. आइए जानते हैं गया नगरी कैसे बन गई मोक्ष नगरी.

Gaya Ji Pitra Moksha Prapti Tirth: गया बिहार की धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी है, जिसे अब सम्मानजनक नाम मिला है. बीते शुक्रवार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट की बैठक में गया का नाम बदलकर 'गया जी' (Gaya ji) किया गया. इस फैसले के सार्वजनिक होने पर गया जिला समेत देशभर में खुशी की लहर है और लोग गौरान्वित महसूस कर रहे हैं. 

गया जोकि हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता है. यहां दुनियाभर से लोग पिंडदान (Pind Daan) और श्रद्धा कर्म के लिए पितृपक्ष के दौरान पहुंचते हैं. लंबे समय से स्थानीय संत, गयावाल पंडित और जनप्रतिनिधियों की ओर से गया का नाम बदलकर गया जी किए जाने की मांग थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है. दरअसल लोगों का कहना था कि, गया नाम अधूरा सा लगता है और जब इसे गया जी का नाम दिया गया तो यह पूर्ण और सम्मानपूर्वक हो गया है.

बिहार के गया जी का वर्णन शास्त्र-पुराणों में भी मिलता है. यह देशभर के ऐसे तीर्थ स्थलों में एक है जहां लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान करते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि गया में किए पिंडदान से पितरों को मोक्ष मिलता है और उनकी आत्मा सीधे स्वर्ग पहुंचती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर गया जी कैसे बनी पिंडदान के लिए मोक्ष प्राप्ति का स्थल. अगर नहीं तो लिए चलिए आपको बताते हैं इस शुभ धार्मिक स्थल से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में-

गरुण पुराण (Garuda Purana) के मुताबिक पृथ्वी पर मानव मुक्ति के लिए चार धाम बताए गए हैं जिसमें ब्रह्म ज्ञान, गया में श्राद्ध, कुरुक्षेत्र में निवास और गौशाला में मृत्यु है. इसलिए गया को पितरों की मोक्ष का तीर्थ कहा जाता है. यहां भगवान विष्णु का मंदिर है जिसे विष्णुपद (Vishnupad Temple) कहा जाता है. मानता है कि यहां स्वयं भगवान विष्णु पितृ देवता के रूप में वास करते हैं. लेकिन गया के तीर्थ बनने का संबंध देवता नहीं बल्कि एक असुर से जुड़ा हुआ है जिसका नाम गयासुर (Gayasur) था.

गयासुर के कारण गया बना तीर्थ स्थल

गयासुर का जन्म एक असुरकुल में हुआ था, जिस कारण लोग उसे हेय दृष्टि से देखते थे. लेकिन गयासुर भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का परम भक्त था. एक उसने अपनी तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर वरदान मांगा कि, उसे इतना पवित्र बना दे कि जो भी उसका दर्शन करे उसे मोक्ष प्राप्त हो जाए. विष्णुजी ने गयासुर को यह वरदान दे दिया. इसके बाद जो भी गयासुर को देखता उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है. इसके बाद अधर्मी, पापी, राक्षसी सभी गयासुर के दर्शन के लिए पहुंचने लगे और इस तरह से सभी को मोक्ष प्राप्त होने लगा, जिससे स्वर्ग की व्यवस्था भी अस्त-व्यस्त हो गई.

सभी देवता मदद के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे. विष्णु जी ने गयासुर से कहा कि, वह अपने शरीर को यज्ञ के लिए समर्पित कर दे. गयासुर ने अपने आराध्य की बात स्वीकार कर ली. इसके बाद गयासुर के शरीर पर यज्ञ किया. यज्ञ होने के बाद भगवान विष्णु ने गयासुर को मोक्ष प्रदान करने का वचन दिया और यह भी आशीर्वाद दिया कि उसकी देह जहां-जहां फैलेगी, वह स्थान अत्यंत पवित्र हो जाएगा. जो व्यक्ति उस स्थान पर पितरों का पिंडदान करेगा,  उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी. गया नगरी में गयासुर का शरीर पत्थर बनकर फैल गया था. इसलिए इस स्थान का नाम गया पड़ा और यह मोक्ष नगरी बन गई.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

पल्लवी कुमारी (Pallawi Kumari)

धर्म-ज्योतिष विशेषज्ञ | डिजिटल मीडिया पत्रकार | कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट
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