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Spices Getting Clumpy: मसालों को सीलन और गांठों से कैसे बचाएं? जानें 4 सीक्रेट किचन टिप्स

How To Keep Masala Dry: मसाले के डिब्बे में थोड़ी सी भी नमी पहुंच जाए तो बारीक पाउडर के कण आपस में चिपकने लगते हैं. किचन में खाना बनाते समय उठने वाली भाप भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है.

How To Prevent Lumps In Ground Spices: किचन में रखे मसालों को इस्तेमाल करते समय अगर उनमें छोटी-छोटी गांठें दिखाई देने लगी हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, दालचीनी, लहसुन पाउडर या दूसरे बारीक पिसे मसालों में अक्सर यह समस्या देखने को मिलती है. ज्यादातर मामलों में इसकी वजह मसाले का खराब होना नहीं, बल्कि उसमें नमी पहुंचना होता है. हालांकि गांठें पड़ने को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए. अगर मसाले की खुशबू, रंग या स्वाद बदल गया है या उसमें फफूंदी दिखाई दे रही है, तो उसे इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. मसालों में गांठें क्यों पड़ती हैं और इन्हें लंबे समय तक सूखा व सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं.

नमी पहुंचते ही बनने लगती हैं गांठें

मसाले के डिब्बे में थोड़ी सी भी नमी पहुंच जाए तो बारीक पाउडर के कण आपस में चिपकने लगते हैं. किचन में खाना बनाते समय उठने वाली भाप भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है. कई लोग मसाले का डिब्बा खोलकर सीधे गर्म कढ़ाही या उबलते हुए खाने के ऊपर से मसाला डालते हैं. इस दौरान भाप डिब्बे के अंदर पहुंच सकती है और धीरे-धीरे मसाले में गांठें बनने लगती हैं.


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बारिश या ज्यादा नमी वाले मौसम में यह समस्या और बढ़ सकती है. तापमान में बदलाव के कारण बनने वाली कंडेनसेशन भी मसालों को प्रभावित कर सकती है. इसलिए मसालों को हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां नमी और भाप कम पहुंचती हो.

क्या गांठें पड़ने का मतलब मसाला खराब हो गया?

सिर्फ गांठें पड़ जाने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि मसाला खराब हो गया है. अगर मसाले की खुशबू और रंग सामान्य है और उसमें फफूंदी या कोई असामान्य बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है, तो कई मामलों में उसे इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन मसाले से अजीब या बासी गंध आने लगे, रंग काफी बदल जाए, स्वाद सामान्य से अलग लगे या उसमें फंगस दिखाई दे, तो उसे फेंक देना बेहतर है. इसी तरह अगर पूरा मसाला नमी की वजह से बहुत ज्यादा सख्त होकर एक ठोस गुठली जैसा बन गया है, तो सावधानी बरतनी चाहिए.

गांठें पड़ने से मसाले को नापना और खाने में बराबर मात्रा में मिलाना मुश्किल हो सकता है. इससे कभी खाने में मसाला कम तो कभी ज्यादा पड़ सकता है. बड़े टुकड़े सीधे खाने में चले जाएं तो स्वाद भी बिगड़ सकता है.

छोटी गांठें हैं तो ऐसे करें ठीक

अगर मसाले में केवल कुछ छोटी गांठें बनी हैं और खराब होने के कोई संकेत नहीं हैं, तो उन्हें आसानी से अलग किया जा सकता है. साफ और पूरी तरह सूखे चम्मच के पिछले हिस्से से गांठों को हल्के हाथ से तोड़ सकते हैं.


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ज्यादा गांठें बनने पर मसाले को किसी साफ और सूखी प्लेट या बर्तन में निकालकर महीन छलनी से छाना जा सकता है. इससे बड़े टुकड़े अलग हो जाएंगे और मसाला फिर से बारीक हो सकता है. इसके बाद उसे किसी साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कंटेनर में भर दें. यह ध्यान रखना जरूरी है कि गांठें तोड़ने या मसाला निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाला चम्मच बिल्कुल सूखा हो. हल्की सी नमी भी दोबारा समस्या पैदा कर सकती है.

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कुछ मसालों में ज्यादा होती है गांठ पड़ने की समस्या

बारीक पिसे हुए मसाले नमी जल्दी सोख लेते हैं. इसलिए लहसुन पाउडर, प्याज पाउडर, दालचीनी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और पपरिका जैसे मसालों में गांठें जल्दी बन सकती हैं. कुछ मसालों में प्राकृतिक तेल भी मौजूद होते हैं. जीरा, हल्दी और जायफल जैसे मसाले समय के साथ आपस में चिपक सकते हैं. दूसरी ओर, साबुत मसालों और सूखी जड़ी-बूटियों में आमतौर पर यह समस्या कम देखने को मिलती है, क्योंकि वे बारीक पाउडर की तरह नमी को आसानी से नहीं पकड़ते.

एयरटाइट डिब्बे में ही रखें

मसालों को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है कि उन्हें अच्छी तरह बंद होने वाले एयरटाइट कंटेनर में रखा जाए. ढक्कन ठीक से बंद न होने पर हवा और नमी धीरे-धीरे अंदर पहुंच सकती है. अगर मसाले प्लास्टिक या पेपर पैकेट में रखे हैं और पैकेट बार-बार खुलता है, तो उन्हें एयरटाइट जार में ट्रांसफर करना बेहतर हो सकता है. कंटेनर में मसाला भरने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह पूरी तरह साफ और सूखा हो.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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