फ्री में UPI देकर पैसा कैसे कमाते हैं फोनपे, पेटीएम जैसे ऐप? जानें पूरा प्रोसेस
UPI Business Model India: वैसे तो पेटीएम जैसे यूपीआई एप्लीकेशन ट्रांजैक्शन के लिए कोई फीस नहीं लेते तो आखिर उनकी कमाई कैसे होती है. आइए जानते हैं.

UPI Business Model India: संसद द्वारा कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पारित होने के बाद कई उपयोगकर्ता आश्चर्यचकित होने लगे हैं कि क्या यूपीआई भुगतान मुफ्त रहेगा या फिर भविष्य में शुल्क लगाया जाएगा. हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह साफ कहा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई लेन-देन मुफ्त रहेगा. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर उपयोगकर्ता यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए कुछ भी भुगतान नहीं कर रहे हैं तो फोन पे और पेटीएम जैसे कंपनी पैसा कैसे कमाते हैं?
यूपीआई की कमाई
भारत के वर्तमान यूपीआई ढांचे के तहत यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट 0 है. इसका मतलब यह है कि ना तो ग्राहक और ना ही छोटे दुकानदार को यूपीआई भुगतान के लिए कोई शुल्क देना होता है. एक साधारण सा क्यूआर कोड स्कैन और मनी ट्रांसफर अपने आप राजस्व उत्पन्न नहीं करता.
हालांकि फिनटेक कंपनी के लिए यूपीआई उत्पाद नहीं है. बल्कि यह प्रवेश द्वार है. हर लेन-देन उपयोगकर्ता पर व्यापारियों को उनके पारिस्थितिकी तंत्र में लाता है. जहां उन्हें और ज्यादा भुगतान सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं. इस तरह मुफ्त यूपीआई कंपनियों को उपयोगकर्ता को बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही मोनेटाइजेशन दूसरे चैनलों के जरिए से होता है.

साउंड बॉक्स जैसे व्यापारिक उपकरण
इन कंपनियों के लिए सबसे ज्यादा पैसा कमाने का जरिया उनका व्यापारी के सेवा व्यवसाय है. साउंड बॉक्स जैसे उपकरण छोटी दुकान और खुदरा दुकान में काफी ज्यादा आम हो चुके हैं. इस तरह के उपकरण तुरंत भुगतान की पुष्टि की घोषणा करते हैं. इससे दुकानदारों को बार-बार अपने फोन की जांच करने से बचने में मदद मिलती है.
फोन पे और पेटीएम जैसी कंपनियां किराए या फिर सदस्यता के आधार पर यह साउंड बॉक्स उपलब्ध कराती हैं. व्यापारी आमतौर पर एक तय मासिक शुल्क का भुगतान करते हैं. यह डिवाइस और सेवा योजना के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. भले ही प्रति व्यक्ति राशि छोटी है लेकिन पैमाना काफी बड़ा है.

कार्ड से भुगतान अभी भी लेन-देन शुल्क उत्पन्न करता है
हालांकि यूपीआई भुगतान निशुल्क है लेकिन सभी डिजिटल भुगतान एक ही नियम के अंदर नहीं आते. जब ग्राहक क्रेडिट कार्ड, बिजनेस डेबिट कार्ड या फिर कुछ वॉलेट आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करके भुगतान करते हैं तो मर्चेंट डिस्काउंट दर लागू हो सकती है.
ऐसे मामलों में लेन-देन मूल्य का एक छोटा प्रतिशत शुल्क के रूप में लिया जाता है. इसे बैंक, कार्ड नेटवर्क और भुगतान प्लेटफार्म के बीच साझा किया जाता है. इसका मतलब यह है कि भले ही कोई व्यापारी मुफ्त यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल करता है इसके बावजूद भी वह ग्राहकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दूसरी भुगतान विधि के जरिए से प्लेटफार्म के लिए कमाई उत्पन्न कर सकते हैं.
उधर और क्रेडिट सेवा
फिनटेक कंपनियों के लिए सबसे बड़े विकास क्षेत्र में से एक कर्ज देना है. भुगतान एप्स बड़ी मात्रा में लेन-देन डाटा इकट्ठा करते हैं. इससे उन्हें उपयोगकर्ता के व्यवहार, इनकम के पैटर्न और खर्च करने की आदत को समझने में मदद मिलती है. व्यापारियों के लिए लगातार डिजिटल भुगतान वित्तीय प्रोफाइल बनाने में मदद करता है. इस डेटा के आधार पर कंपनियां कार्यशील पूंजी कर्ज देने के लिए बैंक और एनबीएफसी के साथ साझेदारी करती है. इस तरह उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत कर्ज, क्रेडिट कार्ड और अभी खरीद, बाद में भुगतान करें सेवा दी जाती हैं.
रिचार्ज और बिल भुगतान
वक्त के साथ भुगतान एप्स का विस्तार यूपीआई ट्रांसफर से आगे बढ़कर मोबाइल रिचार्ज, डीटीएच सेवा, बिजली बिल और दूसरी उपयोगिता भुगतान तक हो गया है. हालांकि इस तरह की सेवा काफी आसान दिखाई देती है लेकिन यह कमाई में भी योगदान देती है. कुछ लेन-देन में उपयोगकर्ता से ली जाने वाली छोटी सुविधा या प्लेटफार्म शुल्क शामिल होता है. इसके अलावा दूरसंचार कंपनी, उपयोगिता प्रदाता और सेवा ऑपरेटर लेन-देन उत्पन्न करने के लिए इन प्लेटफार्म को कमीशन का भुगतान कर सकते हैं.
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