एक्सप्लोरर

Statue Of Liberty: स्टेचू ऑफ लिबर्टी के टॉर्च सेक्शन में क्यों नहीं जा सकते पर्यटक, जानें क्यों है वहां जाना मना?

Statue Of Liberty: न्यूयॉर्क के स्टेचू ऑफ लिबर्टी का एक हिस्सा पर्यटकों के लिए पूरी तरह से बंद है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • स्टेचू ऑफ लिबर्टी की मशाल 1916 के धमाके से क्षतिग्रस्त हुई थी।
  • धमाके के कारण मूर्ति का हाथ और मशाल का हिस्सा कमजोर हुआ।
  • सुरक्षा कारणों से मशाल वाला हिस्सा पर्यटकों के लिए बंद है।
  • पर्यटक अभी भी मूर्ति के ताज तक जा सकते हैं।

Statue Of Liberty: स्टेचू ऑफ लिबर्टी दुनिया का काफी मशहूर स्मारक है. संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आजादी का प्रतीक यह स्मारक हर साल लाखों पर्यटकों का मेजबान बनता है. लेकिन मूर्ति का एक हिस्सा एक सदी से भी ज्यादा समय से पर्यटकों के लिए बंद है. यह हिस्सा है इसके दाहिने हाथ में ऊंचाई पर पकड़ी हुई मशाल. आइए जानते हैं कि स्टेचू ऑफ लिबर्टी के इस हिस्से में पर्यटकों का जाना क्यों माना है.

1916 का ब्लैक टॉम धमाका 

मशाल तक पहुंच को हमेशा के लिए बंद करने की मुख्य वजह ब्लैक टॉम धमाका है. यह 30 जुलाई 1916 को हुआ था. यह धमाका ब्लैक टॉम द्वीप पर हुआ था. इस द्वीप पर पहले विश्व युद्ध के दौरान जहाज से भेजने के लिए भारी मात्रा में गोला बारूद और हथियार जमा किए जा रहे थे. जर्मन एजेंटों ने गोला बारूद के इस गोदाम में तोड़फोड़ की. इसके बाद एक जबरदस्त धमाका हुआ जिसने पूरे बंदरगाह इलाके को हिला कर रख दिया. यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसका मलबा और छर्रे स्टेचू ऑफ लिबर्टी से टकराए. इस वजह से उसके दाहिने हाथ और मशाल को नुकसान पहुंचा. हालांकि बाद में मरम्मत का काम किया गया. लेकिन इस घटना की वजह से अधिकारियों ने मशाल वाले हिस्से को आम लोगों के लिए हमेशा के लिए बंद करने का फैसला किया.

मशाल और हाथ को हुआ नुकसान 

धमाके की वजह से मूर्ति के ढांचे के कुछ हिस्से काफी कमजोर पड़ गए थे. मशाल पकड़े हुए हाथ के आसपास का हिस्सा भी काफी कमजोर हो गया था. मरम्मत का काम पूरा हो जाने के बाद भी इंजीनियरों को इस हिस्से के लंबे समय तक बनी रहने वाली मजबूती को लेकर चिंता थी. इन्हीं जोखिम को देखते हुए अधिकारियों ने यह फैसला किया कि बड़ी संख्या में पर्यटकों को मशाल वाले हिस्से में जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

कहां है असली टॉर्च? 

1984 में  स्मारक की बड़े पैमाने पर मरम्मत के दौरान मूर्ति की असली टॉर्च को सोने की परत वाली एक रेप्लिका से बदल दिया गया था. इसे सूरज की रोशनी को ज्यादा असरदार तरीके से  रिफ्लेक्ट करने के लिए डिजाइन किया गया था. असली टॉर्च को स्टेचू ऑफ लिबर्टी म्यूजियम के अंदर डिस्प्ले किया गया है. यहां विजिटर इसे करीब से देख सकते हैं और इसके इतिहास के साथ-साथ 1916 में इसे पहुंचे नुकसान के बारे में भी जान सकते हैं.

पर्यटक अभी भी किन जगहों पर जा सकते हैं? 

हालांकि टॉर्च वाला हिस्सा भी भी बंद है लेकिन इसके बावजूद भी विजिटर्स को मूर्ति के क्राउन तक चढ़ने की इजाजत है.  यहां से न्यूयॉर्क हार्बर का शानदार नजारा दिखता है. हालांकि क्राउन तक पहुंचाने के लिए स्टैचू सिटी क्रूजीज के जरिए पहले से रिजर्वेशन करवाना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: केले के छिलके पर क्यों फिसल जाता है पैर, किसी और पर क्यों नहीं?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

दुनिया की 5 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बेरोजगारी कितनी? भारत किस नंबर पर
दुनिया की 5 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बेरोजगारी कितनी? भारत किस नंबर पर
Bihar Fake IAS Officer: बिहार में फर्जी IAS के घर पर मिले बाहरसिंगा के दो सींग, इस मामले में कितना सजा?
बिहार में फर्जी IAS के घर पर मिले बाहरसिंगा के दो सींग, इस मामले में कितना सजा?
सड़क क्रॉस करने वाली पट्टी को जेब्रा क्रॉसिंग ही क्यों कहा जाता है, कैसे पड़ा यह नाम?
सड़क क्रॉस करने वाली पट्टी को जेब्रा क्रॉसिंग ही क्यों कहा जाता है, कैसे पड़ा यह नाम?
क्या स्पेस में अंतरिक्ष यात्रियों की आंखों की रोशनी कमजोर हो जाती है, क्यों होता है ऐसा?‌
क्या स्पेस में अंतरिक्ष यात्रियों की आंखों की रोशनी कमजोर हो जाती है, क्यों होता है ऐसा?‌

वीडियोज

Baramati Crime: पत्नी ने रची पति को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश? | Sansani
Janhit with Chitra Tripathi: CM Soren से छात्र..'हमको झुका ना पाओगे'! | Jharkhand Students Protest
Kanwar Yatra 2026: बुर्के में कांवड़, मुस्लिम महिला और हिंदू पति! नोटिस के बाद भी नहीं रुकी तमन्ना !
Assam Flood Crisis: असम में बाढ़ का तांडव, 98 मौतें, समय रैनाने भेजे 10 लाख, अब CM वापस लेंगे FIR?
Sansani: बेवफा बीवी की तेजाबी साजिश

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
चीन में टाइफून डॉल्फिन से हाहाकार का अलर्ट, 24 घंटे में टूट जाएंगे बारिश के सारे रिकॉर्ड?
चीन में टाइफून डॉल्फिन से हाहाकार का अलर्ट, 24 घंटे में टूट जाएंगे बारिश के सारे रिकॉर्ड?
आकाश आनंद के अंकल वाले बयान पर अखिलेश की प्रतिक्रिया, जानें क्या कहा?
आकाश आनंद के अंकल वाले बयान पर अखिलेश की प्रतिक्रिया, जानें क्या कहा?
गोवा में पेंट हाउस, मुंबई में करोड़ों का बंगला, 100 करोड़ से ज्यादा का है इमरान हाशमी का साम्राज्य, नेटवर्थ जान उड़ जाएंगे होश
100 करोड़ से ज्यादा का है इमरान हाशमी का साम्राज्य, नेटवर्थ जान उड़ जाएंगे होश
सरफराज की टीम इंडिया में वापसी पर पिता हुए भावुक, कहा- कई रातों के बाद...
सरफराज की टीम इंडिया में वापसी पर पिता हुए भावुक, कहा- कई रातों के बाद
फूड ट्रंक में छिपे, मिलिट्री जेट से भरी उड़ान... तुर्किए से कैसे निकले डोनाल्ड ट्रंप
फूड ट्रंक में छिपे, मिलिट्री जेट से भरी उड़ान... तुर्किए से कैसे निकले डोनाल्ड ट्रंप
Fact Check: अरुणाचल प्रदेश में घुस गई है चीनी सेना? वायरल वीडियो का सच
Fact Check: अरुणाचल प्रदेश में घुस गई है चीनी सेना? वायरल वीडियो का सच
दुधारू गाय-भैंस को एक दिन में कितना दें चारा, कृषि एक्सपर्ट्स से जानें
दुधारू गाय-भैंस को एक दिन में कितना दें चारा, कृषि एक्सपर्ट्स से जानें
Gut Bacteria species: भारतीय जनजातियों में मिले 14 नए बैक्टीरिया, क्यों खास है खोज
Gut Bacteria species: भारतीय जनजातियों में मिले 14 नए बैक्टीरिया, क्यों खास है खोज
Embed widget