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क्या केरलम विधानसभा CEC को हटा सकती है, वहां क्यों पास हुआ यह प्रस्ताव?

केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग का प्रस्ताव पास करके देश में एक नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है, हालांकि कानूनी रूप से यह अधिकार सिर्फ संसद के पास है.

भारतीय राजनीति में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के तहत केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग वाला एक खास प्रस्ताव पारित किया है. देश के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी राज्य की विधायी संस्था ने इस तरह का कदम उठाया है. इस राजनीतिक हलचल के बाद से ही यह सवाल देश भर में चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वाकई किसी राज्य की विधानसभा के पास ऐसी कोई ताकत होती है, और केरल में यह प्रस्ताव क्यों पारित हुआ.

संवैधानिक स्थिति और विधानसभा के अधिकार

भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक, किसी भी राज्य की विधानसभा के पास मुख्य चुनाव आयुक्त को सीधे तौर पर उनके पद से हटाने का कानूनी या संवैधानिक अधिकार बिल्कुल नहीं होता है. देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया बेहद सख्त होती है, जो सिर्फ देश की संसद के माध्यम से महाभियोग जैसी जटिल प्रक्रिया के जरिए ही पूरी की जा सकती है. इसके बावजूद केरल के राजनीतिक गलियारों में इस प्रस्ताव का पास होना यह साफ बताता है कि राज्य के विधायक चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली से किस हद तक नाराज और चिंतित हैं.

SIR में गंभीर गड़बड़ी के आरोप

केरल विधानसभा में इस प्रस्ताव को लाने की सबसे बड़ी और मुख्य वजह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित अनियमितताएं हैं. विपक्ष और स्थानीय दलों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली की गई है, जिसके चलते कई योग्य और पात्र मतदाताओं के नाम चुपचाप सूचियों से काट दिए गए. इस पूरी स्थिति को स्थानीय स्तर पर विपक्षी दलों द्वारा वोट चोरी का नाम दिया गया है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है.

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क्या केरलम विधानसभा CEC को हटा सकती है, वहां क्यों पास हुआ यह प्रस्ताव?

सत्ता पक्ष और विपक्ष की एकजुटता के साथ राजनीतिक समीकरण

इस अहम प्रस्ताव को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के नेता और मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सदन के पटल पर पेश किया था. हैरानी की बात यह रही कि आम तौर पर एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक मंच पर नजर आए. विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने भी इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया. हालांकि, 140 सदस्यों वाली इस विधानसभा में मौजूद भारतीय जनता पार्टी के तीन विधायकों में से दो ने इस कदम का पुरजोर विरोध दर्ज कराया.

चयन समिति के पुनर्गठन और पारदर्शिता की मांग

केरल विधानसभा द्वारा पास किए गए इस प्रस्ताव में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की बात नहीं कही गई है, बल्कि चुनाव आयोग की पूरी व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग भी शामिल है. प्रस्ताव में यह पुरजोर मांग उठाई गई है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति का तुरंत पुनर्गठन किया जाना चाहिए. इस पैनल में देश के प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ-साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बन सके.


क्या केरलम विधानसभा CEC को हटा सकती है, वहां क्यों पास हुआ यह प्रस्ताव?

संस्था की विश्वसनीयता और भविष्य की रूपरेखा

इस पूरे घटनाक्रम के मूल में मुख्य रूप से देश के चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे गंभीर सवाल हैं. प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य मौजूदा हालात का हवाला देते हुए चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था की खोई हुई विश्वसनीयता को दोबारा बहाल करना है. इसमें सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है कि भविष्य में किसी भी पात्र नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित न किया जाए, एसआईआर प्रक्रिया की गलतियों को सुधारा जाए और सीईसी को हटाने के लिए जरूरी कानूनी कार्यवाही की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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