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Police-CAPF-RAF और CRPF... इन दंगारोधी फोर्सेज में कौन सबसे खतरनाक, किससे कब लिया जाता है काम?

CJP Protest: दिल्ली में इस वक्त माहौल काफी गर्म है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत की सभी फोर्सेज में से कौन सबसे ताकतवर है.

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  • आरएएफ, सीआरपीएफ की विशेष दंगा-रोधी इकाई है, भीड़ नियंत्रित करती है।

CJP Protest: जब भी भारत में दंगे, हिंसक विरोध प्रदर्शन या फिर बड़े पैमाने पर कानून व्यवस्था से जुड़ी कोई भी स्थिति पैदा होती है तो हालात की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग सुरक्षा बलों को तैनात किया जाता है. इस वक्त दिल्ली में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं. राज्य पुलिस सबसे पहले कार्रवाई करती है, लेकिन जब स्थानीय अधिकारियों को और मदद की जरूरत होती है तो सीआरपीएफ और उसकी खास रैपिड एक्शन फोर्स जैसे बल मदद के लिए आते हैं.  आइए जानते हैं इन सभी की भूमिका के बारे में.

राज्य पुलिस की भूमिका 

राज्य पुलिस अपनी-अपनी राज्य सरकार के अधीन काम करती है और मुख्य रूप से रोजमर्रा की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती है. स्थानीय झगड़ों, विरोध प्रदर्शन, ट्रैफिक मैनेजमेंट, अपराध रोकने और छोटे-मोटे हंगामों से निपटने के लिए सबसे पहले राज्य पुलिस को ही तैनात किया जाता है. 

भीड़ को काबू करने के लिए राज्य पुलिस आमतौर पर लाठी, ढाल, आंसू गैस और जरूरत पड़ने पर सामान्य हथियारों का इस्तेमाल करती है. उनका मकसद हालात के बिगड़ने और बड़ी बड़ी सुरक्षा चुनौती बनने से पहले ही सामान्य स्थिति बहाल करना होता है.

सीएपीएफ की भूमिका 

सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज कोई एक संगठन नहीं है. बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले सात केंद्रीय सुरक्षा बलों का एक समूह है. इनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आइटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी और असम राइफल्स शामिल हैं.

सीएपीएफ के जवानों को कई तरह की जिम्मेदारियों के लिए तैनात किया जाता है. इनमें सीमा सुरक्षा, आतंकवाद रोधी कार्रवाई, अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, वीआईपी सुरक्षा और बड़े पैमाने पर आंतरिक सुरक्षा अभियान शामिल हैं. 

सीआरपीएफ की भूमिका 

सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स सीएपीएफ समूह के तहत देश का सबसे बड़ा बल है. इसे तब तैनात किया जाता है जब कोई स्थिति राज्य पुलिस की क्षमता से बाहर हो जाती है. 

गृह मंत्रालय बड़े दंगों, चुनाव से जुड़ी हिंसा, उग्रवाद और आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान सीआरपीएफ को तैनात करता है. यह बल नक्सल विरोधी अभियान और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी मिशन में बड़ी भूमिका निभाता है.

आरएएफ की भूमिका 

रैपिड एक्शन फोर्स सीआरपीएफ की एक खास दंगा-रोधी विंग है. इसे इसकी खास नीली यूनिफॉर्म से आसानी से पहचाना जा सकता है. लड़ाई झगड़े वाली यूनिट के उलट आरएएफ सांप्रदायिक हिंसा, बड़े विरोध प्रदर्शन और भीड़ को काबू करने जैसे हालात से निपटने में माहिर है. इनके कम से कम बल, ज्यादा से ज्यादा संयम के सिद्धांत पर काम करना होता है. 

कौन सी फोर्स सबसे ज्यादा ताकतवर?

इसका जवाब ऑपरेशन की प्रकृति पर निर्भर करता है. लड़ाई और मारक क्षमता के नजरिया से सीआरपीएफ अपनी एडवांस्ड ट्रेंनिंग, आधुनिक हथियार और उग्रवाद विरोधी में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन के अनुभव की वजह से सबसे ज्यादा ताकतवर माने जाते हैं. हालांकि जब दंगों और भीड़ को काबू करने के बाद आती है तो आरएएफ को भारत की सबसे खास और असरदार फोर्स माना जाता है.

यह भी पढ़ेंः हिरासत और गिरफ्तारी में क्या अंतर होता है, क्या कर सकती है पुलिस और क्या नहीं?

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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