Protest Rules in India: देश की किन जगहों पर धरना देना अपराध, क्या इस दायरे में आता है प्रधानमंत्री आवास?
Protest Rules in India : यह प्रदर्शन छात्रों के आंदोलन के समर्थन में किया जा रहा है. राहुल गांधी अपने धरना स्थल तक मल्लिकार्जुन खरगे के घर से करीब 7 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे.

Protest Rules in India : दिल्ली में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज है. दिल्ली में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई वरिष्ठ नेता हाल ही में प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के पास धरने पर बैठ गए हैं. यह प्रदर्शन छात्रों के आंदोलन के समर्थन में किया जा रहा है. राहुल गांधी अपने धरना स्थल तक मल्लिकार्जुन खरगे के घर से करीब 7 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे. राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए.
प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं के धरने ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश में कहीं भी धरना-प्रदर्शन किया जा सकता है. भारत का संविधान नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है. कानून व्यवस्था, सुरक्षा और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए कुछ नियम और प्रतिबंध भी तय किए गए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि देश की किन जगहों पर धरना देना अपराध है और क्या प्रधानमंत्री आवास भी इस दायरे में आता है.
क्या संविधान धरना-प्रदर्शन का अधिकार देता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है. वहीं अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत नागरिक बिना हथियार के शांतिपूर्ण तरीके से एक जगह इकट्ठा होकर अपनी बात रख सकते हैं. इसी आधार पर धरना-प्रदर्शन का अधिकार भी माना जाता है. हालांकि यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है. अनुच्छेद 19(3) के तहत सरकार सार्वजनिक व्यवस्था, देश की सुरक्षा और अन्य जरूरी कारणों से इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगा सकती है.
धरना-प्रदर्शन के लिए किन नियमों का पालन करना होता है?
भारत में कानून व्यवस्था राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती है. इसलिए अलग-अलग राज्यों में नियमों में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन कुछ सामान्य नियम लगभग हर जगह लागू होते हैं. धरना या प्रदर्शन से पहले पुलिस से अनुमति और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना जरूरी होता है. आयोजकों को प्रदर्शन का कारण, तारीख, समय, स्थान और अनुमानित भीड़ की जानकारी देनी होती है. अगर रैली निकाली जानी है, तो उसका पूरा रूट भी बताना पड़ता है. आवेदन में आयोजक का नाम, पता और मोबाइल नंबर देना जरूरी होता है. पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, फोटो और जरूरत पड़ने पर शपथ पत्र (एफिडेविट) भी जमा करना पड़ सकता है. अगर लाउडस्पीकर, टेंट या अन्य उपकरण इस्तेमाल किए जाने हैं, तो उसकी जानकारी भी पहले से देनी होती है.
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देश की किन जगहों पर धरना देना अपराध है?
धरना-प्रदर्शन करना संविधान के तहत नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों का पालन करना जरूरी होता है. आमतौर पर प्रदर्शन से पहले संबंधित पुलिस या प्रशासन से अनुमति (NOC) लेनी होती है और आयोजन की जगह, समय, उद्देश्य, प्रतिभागियों की संख्या तथा रैली का मार्ग जैसी जानकारी देनी पड़ती है. प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए और इसमें हिंसा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सड़क जाम या कानून-व्यवस्था भंग करने जैसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए. अगर किसी क्षेत्र में प्रशासन ने सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हों या उस जगह पर प्रदर्शन की अनुमति न हो, तो वहां धरना देना कानून का उल्लंघन माना जा सकता है.
क्या प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया जा सकता है?
प्रधानमंत्री आवास देश का अत्यंत संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है. ऐसे स्थानों पर बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है. अगर उस क्षेत्र में धारा 163 लागू हो या प्रशासन ने निषेधाज्ञा जारी की हो तो वहां किसी भी तरह की सभा या प्रदर्शन पर रोक रहती है. ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है.
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