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फिंगरप्रिंट से सबसे पहले किसने पकड़ा था गुनहगार, कैसे ईजाद हुई थी यह तकनीक?

Fingerprints Technique: फिंगरप्रिंट तकनीक आज के समय में अपराधों की जांच के लिए अहम हिस्सा है. चलिए जानें कि सबसे पहले इस तकनीक का इस्तेमाल किसने किया था और यह किसने ईजाद किया था.

फिंगरप्रिंट यानी उंगलियों के निशान का उपयोग आज पुलिस जांच का आम हथियार बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली बार किस मामले में इन निशानों ने किसी अपराधी को पकड़ा था और यह तकनीक कैसे विकसित हुई? इतिहास बताता है कि 19वीं सदी के आखिरी दशकों में फिंगरप्रिंट ने कानून और विज्ञान की दुनिया में कदम रखा और अपराध जांच की दिशा ही बदल दी. इस आर्टिकल में थोड़ा विस्तार से समझते हैं.

सबसे पहले किसने पकड़ा था गुनहगार?

जब 1892 में अर्जेंटीना में एक मुकदमा दर्ज हुआ, उस साल एक महिला, फ्रांसिस्का रोजास पर अपने दो बच्चों की हत्या का आरोप लगा था. शुरुआती जांच में इलाके के कुछ लोगों पर शक गया, लेकिन अर्जेंटीनाई पुलिस ने घटनास्थल पर पाए गए खून लगे उंगलियों के निशान पर ध्यान दिया. स्थानीय पुलिस अधिकारी जुआन वुसेटिच ने उन निशानों की तुलना संदिग्धों के उंगलियों के निशानों से की और आखिरकार फ्रांसिस्का रोजास की उंगलियों के निशान मिलान निकाला गया. इसी सबूत के आधार पर उसे दोषी ठहराया गया. इतिहासकार आमतौर पर इसे ही फिंगरप्रिंट के प्रयोग से होने वाली पहली सफल पहचान घटना मानते हैं.

कब शुरू हुई थी फिंगरप्रिंट की कहानी?

फिंगरप्रिंट की कहानी इससे पहले भी शुरू हुई थी. 19वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश अधिकारी विलियम जेम्स हर्शेल ने भारत में नागरिक दस्तावेजों पर उंगली के निशान लेना शुरू किया था और देखा कि यह पहचान का स्थिर और बेहतर तरीका है. बाद में स्कॉटिश चिकित्सक हेनरी फॉल्ड्स ने भी इस विचार को समर्थन दिया और फिंगरप्रिंट के वैज्ञानिक उपयोग पर लेख लिखे.

किसने इस बारे में की रिसर्च?

फ्रांसिस गैलेटन ने 1890 के दशक में फिंगरप्रिंट के पैटर्न, जैसे लूप, व्हर्ल और आर्च का अध्ययन कर दिखाया कि ये जीवन भर स्थायी रहते हैं और हर व्यक्ति के लिए अलग होते हैं. गैलेटन की रिसर्च-विधियां फिंगरप्रिंट को विज्ञान की भाषा में मजबूती दे गईं. उस पर आगे काम करते हुए सर एडविन हेनरी ने एक वर्गीकरण-प्रणाली विकसित की, जिसे बाद में कई देशों की पुलिस ने अपनाया और बड़े पैमाने पर फिंगरप्रिंट रजिस्टर बनाए गए.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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