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वैलिड वीजा होने के बाद भी भारतीयों को क्यों डिपोर्ट कर रहे ये देश? वजह जानकर घूम जाएगा दिमाग

दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जो कि वैध वीजा होने के बाद भी बड़ी संख्या में भारतीयों को डिपोर्ट कर रहे हैं. इस कार्रवाई के पीछे कारण बेहद ही हैरान कर देने वाले हैं. चलिए इस बारे में जान लेते हैं.

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  • साइबर अपराध घोटालों में फंसे युवाओं को भी भेजा वापस.

विदेश जाने का सपना हर साल लाखों भारतीय देखते हैं, लेकिन हाल ही में आए कुछ आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. पासपोर्ट पर वैध वीजा होने के बावजूद दुनिया के कई बड़े देश भारतीय नागरिकों को वापस भारत भेज रहे हैं, यानी डिपोर्ट कर रहे हैं. इस लिस्ट में सऊदी अरब और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश सबसे आगे खड़े हैं. यह स्थिति सिर्फ किसी तकनीकी गलती की वजह से नहीं है, बल्कि इसके पीछे विदेशी धरती पर अनजाने में किए गए नियमों के उल्लंघन, कड़े लेबर कानून और अंतरराष्ट्रीय नौकरी के बड़े घोटाले शामिल हैं. चलिए जानें.

सऊदी अरब सबसे आगे

विदेशों से भारतीय नागरिकों को जबरन वापस वतन भेजने के मामले में खाड़ी देश सऊदी अरब सबसे आगे निकल गया है. हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब ने रिकॉर्ड कार्रवाई करते हुए सिर्फ एक साल के भीतर 11,000 से भी अधिक भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है. इसके बाद दूसरे नंबर पर संयुक्त राज्य अमेरिका (US) का नाम आता है, जिसने लगभग 3,800 भारतीयों को वापस भेजा है. इन दो बड़े देशों के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मलेशिया और म्यांमार से भी लगातार भारतीयों को निकाला जा रहा है.

वीजा खत्म होने के बाद भी रुकना

वैध दस्तावेजों के बावजूद डिपोर्ट होने की सबसे मुख्य और आम वजह वैश्विक स्तर पर वीजा की अवधि का समाप्त होना है. बहुत से भारतीय नागरिक टूरिस्ट, वर्क या रेजिडेंसी वीजा पर विदेश जाते हैं, लेकिन उसकी तय समय-सीमा खत्म होने के बाद भी वहीं रुक जाते हैं. इसे कानूनी भाषा में 'ओवरस्टे' कहा जाता है. सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देश अपनी सीमाओं और नागरिकता नियमों को लेकर बेहद सख्त हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति बिना रिन्यूअल के अवैध रूप से रहता पाया जाता है, उसे तुरंत कस्टडी में लेकर वापस भेज दिया जाता है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका ने किन देशों को बेचे हैं F-16 फाइटर जेट, भारत से क्यों नहीं हुई इसकी डील?

खाड़ी देशों के लेबर कानून

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में लेबर नियमों का उल्लंघन करना डिपोर्ट होने की एक बहुत बड़ी वजह है. यहां काम करने वाले कम कुशल भारतीय मजदूर अक्सर कड़े स्पॉन्सरशिप सिस्टम के जाल में फंस जाते हैं. जब कोई कर्मचारी अपने तयशुदा मालिक या पंजीकृत नियोक्ता को छोड़कर कहीं और अवैध रूप से फ्रीलांस काम करने लगता है, तो उसे भगोड़ा घोषित कर दिया जाता है. स्थानीय नियमों के तहत बिना आधिकारिक मंजूरी के किसी दूसरे के पास नौकरी करना सीधे तौर पर देश निकाला का कारण बनता है.

नौकरी के नाम पर बड़े घोटाले

दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे कंबोडिया और म्यांमार में भारतीयों के डिपोर्ट होने की कहानी बिल्कुल अलग और डरावनी है. यहां बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए आकर्षक सैलरी और आईटी जॉब्स का झांसा देकर बुलाया जाता है. वहां पहुंचने पर उन्हें बंधक बनाकर अवैध साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी के कामों में धकेल दिया जाता है. जब स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां इन ठिकानों पर छापेमारी करती हैं, तो इन अवैध गतिविधियों में शामिल होने के कारण भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार कर सीधे भारत डिपोर्ट कर दिया जाता है.

भारतीय विदेश मंत्रालय की नजर

इस संवेदनशील स्थिति पर भारत सरकार का विदेश मंत्रालय (MEA) लगातार पूरी पैनी नजर बनाए हुए है. जब भी किसी देश से भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया जाता है, तो मंत्रालय सबसे पहले उन सभी व्यक्तियों की नागरिकता की पूरी गहनता से जांच और सत्यापन करता है. सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिपोर्टेशन के मामलों को सुलझाने के लिए 'इंडिया-यूएस डिपोर्टेशन इश्यूज' और 'डिपोर्टेशन मैटर्स पोर्टल' जैसे आधिकारिक मंचों के जरिए लगातार काम कर रही है ताकि बेकसूर नागरिकों को कानूनी मदद दी जा सके.

सुरक्षित यात्रा के लिए सतर्कता

विदेश जाने वाले हर नागरिक के लिए स्थानीय कानूनों को समझना बेहद जरूरी हो गया है. जानकारों का कहना है कि सिर्फ वीजा पा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि उस देश के रोजगार नियमों, काम करने की पाबंदियों और वीजा श्रेणियों की शर्तों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है. किसी भी अनजान एजेंट के झांसे में आकर टूरिस्ट वीजा पर जाकर वर्क परमिट की उम्मीद करना या गैर-पंजीकृत कंपनियों से जुड़ना सीधे तौर पर आपको मुसीबत में डाल सकता है. सुरक्षित भविष्य के लिए हमेशा सरकारी गाइडलाइंस का ही पालन करें.

यह भी पढ़ें: भारतीयों के लिए किस देश का वीजा सबसे ज्यादा महंगा? दिमाग में US-UK आया तो गलत है आपका जवाब

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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