IRCTC: कैसे काम करती है IRCTC की वेबसाइट? लाखों लोगों के एक साथ लॉगिन करने से भी नहीं होती है दिक्कत
IRCTC: आईआरसीटीसी पर लाखों लोग एक साथ ट्रेन देखते हैं और साथ ही टिकट बुक करते हैं. आइए जानते हैं कि कैसे काम करती है यह वेबसाइट.

- डिजिटल वेटिंग रूम और ऑटो स्केलिंग से सिस्टम स्थिर रहता है।
IRCTC: हर दिन पूरे भारत में लाखों यात्री ट्रेन खोजने और टिकट बुक करने के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर लॉग इन करते हैं. सबसे बड़ी चुनौती तत्काल बुकिंग के समय सुबह 10:00 बजे और रात 11:00 बजे आती है. उस वक्त लाखों यूजर एक ही समय पर कुछ ही सेकंड के अंदर इस प्लेटफॉर्म पर एक्सेस करने की कोशिश करते हैं. इतने ज्यादा ट्रैफिक लोड के बावजूद आईआरसीटीसी का सिस्टम आमतौर पर बिना किसी बड़ी रुकावट के काम करता है. यह इसलिए मुमकिन है क्योंकि यह प्लेटफार्म एक एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन ई टिकटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलता है. इसे शक्तिशाली डिस्ट्रिब्युटेड सिस्टम आर्किटेक्चर और आधुनिक क्लाउड आधारित टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बनाया गया है. पूरे बैक एंड सिस्टम को सेंटर फॉर रेलवे इनफॉरमेशन सिस्टम द्वारा मैनेज किया जाता है.
लोड बैलेंसिंग
जब लाखों लोग एक ही समय पर लॉगिन या अभी बुक करें पर क्लिक करते हैं तो ट्रैफिक किसी एक सर्वर पर नहीं भेजा जाता. आईआरसीटीसी एडवांस्ड लोड बैलेंसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है जो आने वाले ट्रैफिक को सैकड़ों अलग-अलग एप्लीकेशन सर्वर पर बांट देती है. हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों तरह के लोड बैलेंसर मिलकर यह पक्का करते हैं कि किसी भी एक मशीन पर ज्यादा लोड ना पड़े.
यह ट्रैफिक डिसटीब्यूशन सिस्टम वेबसाइट की स्थिरता को बनाए रखने में मदद करता है. यहां तक की तत्काल बुकिंग के समय और त्योहार के मौसम जैसे काफी ज्यादा बुकिंग वाले समय में भी.
कैश्ड डेटा वेबसाइट को तेजी से जवाब देने में मदद करता है
आईआरसीटीसी प्लेटफार्म के तेज रहने का एक सबसे बड़ा कारण यह है कि यह हर जानकारी बार-बार सीधे मुख्य डेटाबेस से नहीं लेता. ट्रेन के रूट, टाइम टेबल, सर्च रिजल्ट और सीटों की उपलब्धता जैसी जानकारी सर्वर की मेमोरी में redis जैसे इन मेमोरी कैचिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके कुछ समय के लिए स्टोर कर ली जाती है. क्योंकि जानकारी पहले से ही रैम में स्टोर होती है इस वजह से यह धीमें डेटाबेस से बार-बार जानकारी लेने के बजाय कुछ ही माइक्रो सेकंड में लोड हो जाती है.
रीड रेप्लिका मुख्य डेटाबेस पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है
आईआरसीटीसी पर ज्यादातर यूजर तुरंत टिकट बुक करने के बजाय सिर्फ ट्रेन खोज रहे होते हैं. इसे ठीक से मैनेज करने के लिए आईआरसीटीसी डुप्लीकेट डेटाबेस का इस्तेमाल करता है. इन्हें रीड रिप्लिका कहा जाता है. ये रिप्लिका डेटाबेस सर्च से जुड़े लगातार ट्रैफिक को संभालते हैं.
डिजिटल वेटिंग रूम
सबसे मुश्किल स्थितियों में से एक तब आती है जब लाखों लोग तत्काल बुकिंग के दौरान एक ही सेकंड में टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं. अचानक बढ़े हुए दबाव की वजह से डेटाबेस को क्रैश होने से बचाने के लिए आईआरसीटीसी काफ्का जैसे मैसेज क्यू सिस्टम का इस्तेमाल करता है. यह टेक्नोलॉजी डिजिटल वेटिंग रूम की तरह काम करती है. यहां बुकिंग के अनुरोधों को एक कतार में रखा जाता है और उन्हें फिर तेजी से एक-एक करके प्रोसेस किया जाता है.
ऑटो स्केलिंग तत्काल बुकिंग के समय और सर्वर जोड़ती है
आईआरसीटीसी का इंफ्रास्ट्रक्चर इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जब भी ट्रैफिक अचानक बढ़ता है तो यह अपनी क्षमता को अपने आप बढ़ा लेता है. यह सिस्टम होरिजेंटल ऑटो स्केलिंग नाम की प्रक्रिया के जरिए अपने आप अतिरिक्त क्लाउड आधारित सर्वर लगा देता है.
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Source: IOCL


























