Toll for Overweight: इस देश में मोटे लोगों को नौकरी पर नहीं रखती कंपनियां? हैरान कर देगा इसके पीछे का सच
Toll for Overweight: क्या सच में दक्षिण कोरिया में मोटे लोगों के साथ नौकरी में भेदभाव होता है? आइए जानते हैं अचंभित कर देने वाले इस सच के पीछे का असल कारण जान सिर्फ एक क्लिक में जान लीजिए पूरा सच

क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां काबिलियत से ज्यादा वजन को देखकर नौकरी दी जाती है? आप को ये जानकर थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन यह बात सौ टका सच है. यह देश और कोई नहीं बल्कि साउथ कोरिया है. साउथ कोरिया जिसे आम बोलचाल में दक्षिण कोरिया कहा जाता है. एशिया के चंद विकसित देशों के सूची में शामिल है.
आपने ये बात तो जान ली है कि किस देश में मोटे लोगों को नौकरी नहीं दी जाती लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है और इसके पीछे आखिर क्या है कारण? आइए जानते हैं इसके पीछे की सच्चाई.
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योग्यता पर भारी मोटापे की बीमारी
1. सुंदरता के कड़े मानक- साउथ कोरियाई समाज में इंसान के रंग-रूप और शारीरिक बनावट (लुकइस्म) के आधार पर उसके साथ भेदभाव करना बेहद आम बात है. वहां की कॉर्पोरेट दुनिया का ऐसा मानना है कि जो व्यक्ति अपने शरीर और वजन को कंट्रोल में नहीं रख सकता, वह कंपनी के काम और जिम्मेदारियों को क्या संभालेगा. इसलिए, वहां कंपनियों में भर्ती के दौरान मोटे लोगों को नजरअंदाज कर दिया जाता है.
2. रिज्यूमे पर फोटो और बॉडी साइज अनिवार्य- भारत और अन्य देशों में कंपनियों के रिज्यूमे(सीवी) पर तस्वीर लगाना अनिवार्य नहीं होता. इसके उलट, साउथ कोरिया में नौकरी के आवेदन के साथ पासपोर्ट साइज फोटो लगाना अनिवार्य है. कई कंपनियां तो उम्मीदवारों की लंबाई और वजन तक की जानकारी मांगती हैं. इसके साथ ही इंटरव्यू के दौरान स्किल्स के साथ-साथ इस बात पर भी चर्चा होती है कि उम्मीदवार कितना फिट और आकर्षक दिखता है.
3. ब्यूटी स्टैंडर्ड्स का प्रेशर- ये बात तो आप जानते ही होंगे की साउथ कोरिया को दुनिया की प्लास्टिक सर्जरी कैपिटल कहा जाता है. वहां समाज ने खूबसूरती के कड़े और बहुत अलग पैमाने तय कर रखे हैं. महिलाओं के लिए एस-सेप या दुबला शरीर और पुरुषों के लिए वी-सेप चेहरा होना आवश्यक माना जाता है. इसके साथ ही वहां अधिक वजन होने को आलस की निशानी समझा जाता है, जिसके कारण मोटे लोगों को मानसिक तनाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है.
4. नौकरियों में भेदभाव- इस कड़े सामाजिक दबाव के कारण साउथ कोरिया के युवा तनावग्रस्त और भूखे रहने की बीमारी का शिकार हो जाते हैं. होनहार और अधिक शिक्षित होने के बावजूद, सिर्फ वजन ज्यादा होने की वजह से कई युवाओं को अस्वीकृति का सामना करना पड़ता है.कंपनियां ये मानती हैं कि अच्छे दिखने वाले कर्मचारी कंपनी की ब्रांड वैल्यू बढ़ाते हैं.
कॉर्पोरेट जगत पर सरकारी चाबुक
हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए दक्षिण कोरिया सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. सरकार ने Fair Hiring Practice Act में संशोधन किया है, जिसके तहत 30 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए आवेदन फॉर्म से फोटो,ऊंचाई,वजन और पारिवारिक बैकग्राउंड हटाना अनिवार्य कर दिया गया है. लेकिन,इंटरव्यू के दौरान यह भेदभाव आज भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से देखने को मिल जाता है.
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Source: IOCL

























