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आखिर इन मुस्लिम देश को क्यों पड़ रही पवित्र तुलसी की जरूरत? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

हिंदू धर्म में पूजनीय मानी जाने वाली पवित्र तुलसी की मांग अब एक प्रमुख मुस्लिम देश में तेजी से बढ़ रही है. भारत का पड़ोसी दुनिया भर में तुलसी का सबसे बड़ा खरीदार और आयातक बनकर उभरा है.

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  • बांग्लादेश तुलसी का सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है.
  • पारंपरिक हर्बल उपचार और तुलसी चाय की मांग बढ़ी.
  • इम्यूनिटी बूस्टिंग और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से बढ़ी मांग.
  • भारत से सूखी पत्तियों, पाउडर, और अर्क का निर्यात.

भारत के अमूमन हर घर के आंगन में नजर आने वाला तुलसी का पौधा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह औषधीय गुणों का खजाना भी है. अमूमन लोग इसे हिंदू रीति-रिवाजों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह जानकर बेहद हैरानी होती है कि दुनिया का एक बड़ा मुस्लिम बहुल देश इसका सबसे बड़ा दीवाना बन चुका है. हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश की, जहां इस पवित्र पौधे की मांग और इसकी खपत ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पारंपरिक इलाज और सेहत से जुड़े फायदों के चलते यह मुस्लिम देश भारत से बड़े पैमाने पर तुलसी खरीद रहा है. 

बांग्लादेश बना पवित्र तुलसी का सबसे बड़ा खरीदार देश

एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल देश बांग्लादेश पूरी दुनिया में होली बेसिल यानी पवित्र तुलसी के सबसे प्रमुख आयातकों की सूची में पहले पायदान पर आता है. वैश्विक व्यापार के आंकड़ों से पता चलता है कि बांग्लादेश अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनिया में सबसे ज्यादा तुलसी का आयात करता है. भारत के इस पड़ोसी देश में तुलसी की पत्तियों और उसके अर्क की इतनी भारी मांग है कि वहां की दवा और फूड इंडस्ट्री पूरी तरह से भारत से होने वाली इसकी सप्लाई पर टिकी हुई है. 

पारंपरिक हर्बल उपचार और तुलसी की चाय का जबरदस्त क्रेज

दुनिया का 4 सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद बांग्लादेश में लोग आज भी अपने इलाज के लिए पारंपरिक हर्बल तौर-तरीकों पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं. बांग्लादेशी समाज में रोजाना के खान-पान में तुलसी की हर्बल चाय यानी तुलसी टी का सेवन करने का चलन बेहद तेजी से लोकप्रिय हुआ है. इसके अलावा वहां के लोग सर्दी, खांसी, सांस की बीमारी और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए घरेलू नुस्खे के तौर पर तुलसी का इस्तेमाल अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में मुख्य रूप से करते हैं.

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इम्युनिटी बूस्टिंग और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण बढ़ी मांग

चिकित्सा विज्ञान और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की विभिन्न आयुर्वेदिक रिसर्च रिपोर्टों में भी तुलसी को मानव शरीर के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है. तुलसी के भीतर पाए जाने वाले बेहतरीन इम्युनिटी बूस्टिंग तत्व, स्ट्रेस रिलीफ गुण और भारी मात्रा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स इसे एक चमत्कारी औषधि बनाते हैं. बांग्लादेश की बड़ी-बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां इन वैज्ञानिक फायदों को देखते हुए कफ सिरप, सप्लीमेंट्स और वेलनेस प्रोडक्ट्स बनाने में बड़े पैमाने पर तुलसी के एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल कर रही हैं.

भारत से विभिन्न रूपों में होता है तुलसी का भारी निर्यात

पवित्र तुलसी के उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी भारी सप्लाई करता है. भारतीय निर्यातक मुख्य रूप से तुलसी की सूखी पत्तियां, बारीक पाउडर, हर्बल टी बैग्स और लिक्विड एक्सट्रैक्ट्स के रूप में इसे विदेशों में भेजते हैं. बांग्लादेश अपनी भौगोलिक निकटता और आसान व्यापारिक नियमों के कारण भारत से सबसे ज्यादा इन प्रोडक्ट्स की खेप मंगवाता है, जिससे भारतीय किसानों और इस कारोबार से जुड़े व्यापारियों को हर साल करोड़ों रुपये का मुनाफा हो रहा है. 

पाकिस्तान और मलेशिया जैसे मुस्लिम देशों में भी बड़ी डिमांड

सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य प्रमुख मुस्लिम बहुल देश जैसे पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी भारत से बड़े पैमाने पर तुलसी का आयात करते हैं. इन मुस्लिम देशों के बाजारों में अब हलाल सर्टिफाइड हर्बल और आयुर्वेदिक कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की मांग में 20% से ज्यादा की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. यही कारण है कि वहां की कंपनियां अब हर्बल मेडिसिन और ट्रेडिशनल हेल्थ प्रैक्टिस में तुलसी को एक मुख्य सामग्री के रूप में शामिल कर रही हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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