World Longest Traffic Jam: जब सड़क ही बन गई थी लोगों का घर, जानिए कितने दिन तक लगा था दुनिया का सबसे लंबा जाम?
World Longest Traffic Jam: साल 2010 में दुनिया के एक देश में 100 किलोमीटर लंबा दुनिया का सबसे भयानक ट्रैफिक जाम लगा था. इस दौरान लोग 12 दिनों तक सड़कों पर रहने को मजबूर हुए थे.

- स्थिति का फायदा उठाकर ग्रामीणों ने महंगा सामान बेचा.
World Longest Traffic Jam: रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ घंटों का ट्रैफिक जाम भी लोगों को बुरी तरह थका देता है और मानसिक तनाव का कारण बनता है. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई ट्रैफिक जाम पूरे 12 दिनों तक खिंच जाए और सड़क ही लोगों का आशियाना बन जाए? साल 2010 में भारत के पड़ोसी देश चीन में एक ऐसा ही ऐतिहासिक और डरावना ट्रैफिक जाम लगा था, जिसने पूरी दुनिया के मीडिया का ध्यान खींचा था. इस जाम ने आधुनिक शहरी व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट की पोल खोलकर रख दी थी.
कहां लगा इतिहास का सबसे बड़ा जाम?
दुनिया के सबसे लंबे ट्रैफिक जाम का यह अनोखा और दर्दनाक रिकॉर्ड चीन के नाम दर्ज है. अगस्त 2010 में चीन के नेशनल हाईवे 110 और बीजिंग-तिब्बत एक्सप्रेसवे पर अचानक गाड़ियों का पहिया थम गया था. शंघाई टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रूट पर अचानक हजारों ट्रक और कारें एक साथ इस कदर फंस गईं कि ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया. अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस भयावह स्थिति को देखते हुए इसे 'ग्रेट चाइना ट्रैफिक जाम' का नाम दिया था, जो आज भी केस स्टडी माना जाता है.
100 किलोमीटर लंबी कतार और 12 दिनों का लंबा इंतजार
यह ट्रैफिक जाम इतना विशाल था कि एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की कतार करीब 100 किलोमीटर यानी लगभग 62 मील तक पहुंच गई थी. हालात इस कदर बदतर हो चुके थे कि गाड़ियां कई-कई घंटों तक एक इंच भी आगे नहीं खिसक पा रही थीं. सड़क पर फंसे हजारों ड्राइवरों और मुसाफिरों को इस नरक जैसी स्थिति में पूरे 12 दिन गुजारने पड़े. लोग अपनी गाड़ियों को सड़क पर ही छोड़कर वहीं दिन काटने और रात को स्टीयरिंग पर सोने के लिए पूरी तरह मजबूर हो गए थे.
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कैसे उपजा यह संकट?
रिपोर्ट के अनुसार, इस महाजाम की शुरुआत बीजिंग-तिब्बत एक्सप्रेसवे पर चल रहे सड़क मरम्मत के काम की वजह से हुई थी. उसी दौरान मंगोलिया से बीजिंग की तरफ कोयला और कंस्ट्रक्शन का भारी सामान ले जाने वाले ट्रकों का दबाव अचानक बहुत बढ़ गया. इसी बीच मुख्य सड़क पर एक भारी-भरकम ट्रक में तकनीकी खराबी आ गई और वह बीच रास्ते में ही बंद हो गया. इसके बाद पीछे आ रही गाड़ियां रुकने लगीं और देखते ही देखते पूरा हाईवे कंक्रीट के जंगल में बदल गया.
सड़कों पर गुजारी रातें
एक्सप्रेसवे पर अचानक लगे इस जाम के कारण सबसे ज्यादा मुसीबत लंबी दूरी के ट्रक ड्राइवरों और उनके क्लीनर को उठानी पड़ी. बिना किसी तैयारी के अचानक रास्ते में फंस जाने की वजह से महज 2 से 3 दिनों के भीतर ही ज्यादातर लोगों के पास मौजूद खाने-पीने का राशन और पानी पूरी तरह खत्म हो गया. प्रशासन की तरफ से कोई तुरंत मदद न मिलने के कारण भूखे-प्यासे लोग सड़कों पर ही भटकने लगे और गाड़ियों के केबिन ही उनका घर बन गए थे.
3,000 में बिके नूडल्स के पैकेट
सड़क किनारे रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों ने मुसाफिरों की इस लाचारी और भयंकर मजबूरी को अपनी मोटी कमाई का जरिया बना लिया. उन्होंने जाम में फंसे भूखे लोगों को कई गुना महंगे दामों पर खाने-पीने का सामान बेचना शुरू कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय हाईवे पर भूख से तड़प रहे लोगों को एक इंस्टेंट नूडल्स का पैकेट 3,000 रुपये में खरीदना पड़ा. इसके अलावा पीने के पानी की महज 1 लीटर वाली बोतल के लिए लोगों से 5,000 रुपये तक वसूले गए.
कितने करोड़ का आर्थिक नुकसान?
इस भयंकर जाम का सीधा और बेहद बुरा असर सिर्फ आम जनता पर ही नहीं पड़ा, बल्कि इसने चीन की रफ्तार पकड़ती अर्थव्यवस्था को भी तगड़ा झटका दिया. ट्रकों के दिनों तक फंसे रहने, ईंधन की भारी बर्बादी, फैक्ट्रियों की सप्लाई चेन टूटने और करोड़ों घंटों की बर्बादी से चीन को करीब 1 अरब युआन का अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ. अगर आज के भारतीय रुपये के हिसाब से इसका आकलन करें, तो यह आंकड़ा करीब 1,100 से 1,200 करोड़ रुपये के आसपास बैठता है.
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