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क्या होगा अगर बिजली की हाई वोल्टेज लाइन टूट जाए? इसके कितने पास जाने पर लगेगा झटका?

बिजली की ट्रांसमिशन लाइन में लाखों वोल्ट का करंट बहता है, ऐसे में यह सवाल आना लाजमी है कि अगर ये टूट जाएं तो क्या होगा? आइए समझते हैं क्या होगा और तार से कितनी दूरी तक करंट फैल जाता है.

Electricity Transmission Line: आज के समय में बिजली हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है. इंसान के दिनभर के कई काम इसी पर निर्भर हैं. घर घर लाइट पहुंचाने के लिए गली-मोहल्ले में खंभे लगे होते हैं. जिनसे हमारे घर की लाइट का कनेक्शन होता है. कहीं आते-जाते आपने रास्ते में बिजली के बड़े-बड़े टावरों से होकर जा रही ट्रांसमिशन लाइन भी देखी होगी. यह इलेक्ट्रिसिटी को ट्रांसमिट करती है, जिसमें लाखों वोल्ट का करंट बह रहा होता है. इसे देखकर कभी न कभी आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि अगर ये टूट जाए तो क्या होगा? कितनी दूरी पर खड़ा इंसान इसकी चपेट में आ सकता है? आइए समझते हैं.

आसानी से नहीं टूट सकती ट्रांसमिशन लाइन

सामान्य हालात में ट्रांसमिशन लाइन के टूटने के बहुत कम ही चांस होते हैं, क्योंकि यह एल्यूमीनियम कंडक्टर स्टील-रिइंफोर्सड (ACSR) से बनी होती है. एल्यूमीनियम के कंडक्टर में बीच में मौजूद स्टील इसको बेहद मजबूती प्रदान करती है. ऐसे में, यह किसी प्राकृतिक आपदा में ही टूट सकती है.

टूटे तार के पास जाने पर क्या होगा?

अगर हाई वोल्टेज तार टूट कर गिरता है तो उसके आसपास के क्षेत्र में करंट फैल जाता है. कंडक्टर के सबसे पास यह ज्यादा पावरफुल होता है और दूरी बढ़ने के साथ घटता जाता है. मान लीजिए अगर वायर एक लाख पावर को ट्रांसमिट कर रहा था तो उससे थोड़ी दूरी पर यह 75,000 वोल्ट होगा, थोड़ा और दूर जाने पर 50 हजार. इसी तरह दूर जाने पर यह कम होता जायेगा. ऐसे में इसके संपर्क में आने वाले इंसान को जोर का झटका लग सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है. लाइन के टूटने पर कुछ संभावनाएं हो सकती हैं. आइए एक-एक करके इन्हे समझते हैं.

'लाइन टू लाइन फॉल्ट'

पहली स्थिति यह हो सकती है कि एक कंडक्टर दूसरे कंडक्टर पर गिर जाए. ऐसा संभव है, क्योंकि टावर पर एक साथ कई वायर जा रहे होते हैं. अगर ऐसा होता है तो इसके ‘Line to line’ फॉल्ट कहा जायेगा.

'लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट'

दूसरा ये हो सकता है कि कंडक्टर टूटकर जमीन पर गिर जाए. अगर ऐसा होता है तो उसे ‘line to ground fault’ कहा जाता है. अगर ट्रांसमिशन लाइन का वायर टावर से टच हो रहा होता है तो तब भी उसे लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट ही कहते हैं. अगर तार टूटकर जमीन पर गिरता है या फिर दूसरी लाइन पर गिरता है तो सप्लाई स्टेशन पर करंट की डिमांड बढ़ है. जिससे सिस्टम में गड़बड़ी होने लगती है और इलेक्ट्रिक डिवाइसेज के खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

करेंट को चाहिए होता है सबसे छोटा पाथ 

करंट के फ्लो होने का एक गुण होता है कि यह बहने के लिए सबसे क्लोज पाथ चुनता है. अगर पाथ कहीं से ब्रेक हो रहा होता है तो करंट का फ्लो रुक जाता है. जब वायर टूट कर ग्राउंड से टच होता है तो उसे न्यूट्रल मिल जाता है, जिससे करेंट से फ्लो होना शुरू हो जाता है और पावर स्टेशन पर करेंट की डिमांड बढ़ जाती है.

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