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Foot Binding:क्या थी फुट बाइंडिंग प्रथा, जानें चीन में क्यों लगा था इस पर बैन?

Foot Binding: चीन में हजारों सालों तक फुट बाइंडिंग प्रथा की वजह से महिलाओं ने दर्द सहा. आइए जानते हैं क्या थी यह प्रथा और कैसे लगाया गया इस पर प्रतिबंध.

Foot Binding: फुट बाइंडिंग चीनी इतिहास की सबसे दर्दनाक और विवादित परंपराओं में से एक है. लगभग हजार सालों तक, लाखों महिलाओं को सुंदरता, रुतबे और शादी की संभावनाओं के नाम पर इस प्रथा से गुजरने के लिए मजबूर किया. आइए जानते हैं कि इस प्रथा में क्या शामिल था और चीन ने इस पर प्रतिबंध क्यों लगाया.

आखिर फुट बाइंडिंग क्या थी?

फुट बाइंडिंग एक पारंपरिक प्रथा थी, जिसमें 4 से 9 साल की उम्र की बीच की लड़कियों के पैरों के प्राकृतिक विकास को रोकने के लिए कपड़े की पट्टियों से कसकर बांध दिया जाता था. इस प्रक्रिया को तब शुरू किया जाता था जब हड्डियां अभी भी नरम होती थी. पैर की उंगलियों को अंदर की तरफ तलवे की ओर मोड़ा जाता था और अक्सर जानबूझकर तोड़ा जाता था. इसके बाद पैर को कसकर बांध दिया जाता था ताकि वह सामान्य रूप से ना बढ़े.

समय के साथ पैर का आर्च ऊपर की तरफ धकेल दिया जाता था. इससे एक गंभीर रूप से अलग आकार बन जाता था. इसका उद्देश्य पैर को जितना संभव उतना छोटा बनाना था. आदर्श तौर पर लंबाई में तीन से चार इंच. इन्हें रोमांटिक रूप से कमल के पैर कहा जाता था. इसका दर्द हफ्ते या महीनों तक नहीं बल्कि जीवन भर रहता था.

छोटे पैरों को आदर्श क्यों माना जाता था?

पारंपरिक चीनी समाज में छोटे पैरों को स्त्री सौंदर्य का प्रतीक माना जाता था. कमल के पैरों वाली महिला को सुंदर, नाजुक और आज्ञाकारी माना जाता था. यह प्रथा खास तौर से उच्च वर्ग के परिवारों में थी जहां पर महिलाओं से शारीरिक मेहनत करने की उम्मीद नहीं की जाती थी. इसका सीधा संबंध शादी से भी जुड़ गया था. बंधे हुए पैरों वाली लड़कियों को एक अच्छी दुल्हन माना जाता था क्योंकि यह प्रथा अनुशासन, पारिवारिक सम्मान और उच्च सामाजिक स्थिति का संकेत देती थी. 

शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान 

फुट बाइंडिंग के स्वास्थ्य परिणाम गंभीर थे. महिलाओं को पुराने दर्द, चलने में कठिनाई, बार-बार संक्रमण और गंभीर मामलों में गैंग्रीन का सामना करना पड़ता था. कई महिलाएं तो विकलांग हो गई और बिना किसी सहायता के चलने में उन्हें परेशानी होने लगी. 19वीं सदी के आखिर तक पैरों को बांधने की प्रथा के प्रति लोगों का नजरिया बदलने लगा. चीनी सुधारकों, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रथा की आलोचना करनी शुरू कर दी. 

आधिकारिक प्रतिबंध और प्रथा का अंत 

पैरों को बांधने पर पहला औपचारिक प्रबंध 1912 में लगा दिया. ऐसा किंग राजवंश के पतन के बाद हुआ और उसके बाद चीन गणराज्य की स्थापना हुई. नई सरकार ने इस प्रथा को पूरी तरह से गैर कानूनी घोषित कर दिया और महिलाओं को अपने पैर खोलने के लिए प्रोत्साहित किया. 1949 के बाद इस प्रथा को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया और ऐसा कम्युनिस्ट सरकार के सत्ता में आने के बाद हुआ.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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