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2027 Census India: जनगणना के दौरान गलत जानकारी देने पर हो सकती है जेल, क्या है नियम?

2027 Census India: भारत देश 2027 जनगणना के लिए तैयारी कर रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर कोई जनगणना के दौरान गलत जानकारी दे तो उसे कितनी सजा मिलेगी.

2027 Census India:  भारत 2027 में अपनी पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की तरफ बढ़ रहा है. हालांकि सरकार ने नागरिकों को डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का आश्वासन दिया है लेकिन कानून सच्चाई के बारे में भी उतना ही सख्त है. जनगणना के दौरान गलत जानकारी देना एक दंडनीय कानूनी अपराध है. आइए समझते हैं कि नियम क्या कहते हैं.

जनगणना में सटीकता कानूनी रूप से क्यों जरूरी है 

जनगणना सिर्फ एक सांख्यिकीय सर्वेक्षण नहीं है बल्कि यह शासन के लिए एक संवैधानिक और प्रशासनिक आधार है. जनगणना डेटा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र, कल्याण आवंटन, आरक्षण नीति, बुनियादी ढांचा परियोजना और राज्यों के लिए फंडिंग तय करता है. इसी वजह से कानून गलत जानकारी को एक ऐसे काम के रूप में देखता है जो राष्ट्रीय योजना को नुकसान पहुंचा सकता है. जनगणना अधिनियम 1948 के तहत हर व्यक्ति कानूनी रूप से जनगणना अधिकारियों को सटीक जानकारी देने के लिए बाध्य है. 

जनगणना के दौरान गलत जानकारी देने पर सजा 

अगर कोई भी व्यक्ति जानबूझकर गलत जवाब देता है तो कानून ₹1000 तक का जुर्माना लगाने की अनुमति देता है. यह तब भी लागू होता है जब जनगणना शारीरिक रूप से या फिर डिजिटल उपकरणों के जरिए से की जाती है. इसमें घर के सदस्यों को छुपाना, उम्र, आय वर्ग या पेशे के बारे में गलत बताना भी शामिल है.

कब हो सकती है जेल 

जेल कोई डिफॉल्ट सजा नहीं है लेकिन यह गंभीर या बड़े मामलों में लागू होती है. अगर गलत जानकारी देने के साथ जनगणना के काम में बाधा डालना, जनगणना रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करना, या बार-बार असहयोग करना शामिल है तो अपराध के लिए 3 साल तक की जेल हो सकती है.

जनगणना अधिनियम 1948 की संबंधित धाराएं 

धारा आठ में कहा गया है कि हर व्यक्ति को अपनी जानकारी के मुताबिक जनगणना के सवालों का सच्चाई से जवाब देना होगा. इसी के साथ धारा 11, जो सजा से संबंधित है में कहा गया है की जवाब देने से इनकार करना, गलत जवाब देना, तथ्यों को छुपाना या जनगणना दस्तावेजों और घर नंबर के निशान से छेड़छाड़ करना एक अपराध है.

दुरुपयोग का डर बेबुनियाद

ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए जनगणना अधिनियम मजबूत गोपनीयता की सुरक्षा देता है. धारा 15 के तहत जनगणना डेटा का इस्तेमाल कैसे भी अदालत में सबूत के तौर पर नहीं किया जा सकता. आपको बता दें कि इसे पुलिस, टैक्स अधिकारी या फिर दूसरे विभाग के साथ शेयर नहीं किया जा सकता और कानूनी कार्यवाही में व्यक्ति के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

ये भी पढ़ें: क्या जनगणना कराने वाले 30 लाख कर्मचारियों को अलग से सैलरी देगी केंद्र सरकार, क्या BLO की तरह इन्हें भी मिलता है पैसा?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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