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Al Aqsa Mosque: अल अक्सा मस्जिद में 60 साल में पहली बार लगातार क्यों नहीं हुई दो जुमे की नमाज? जानें इसके नियम

Al Aqsa Mosque: अल अक्सा मस्जिद में पहली बार लगातार दो जुमे की नमाज नहीं हुई हैं. आइए जानते हैं क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला.

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  • अल अक्सा मस्जिद में 6 दशक में पहली बार जुमे की नमाज रोकी गई।
  • ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण यरुशलम में सुरक्षा कड़ी की गई।
  • पुराने शहर के अन्य धार्मिक स्थल भी सुरक्षा कारणों से बंद रहे।
  • रमजान में लगी पाबंदियों से खासकर नमाजियों की संख्या सीमित हुई।

Al Aqsa Mosque: लगभग 6 दशकों में पहली बार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक अल अक्सा मस्जिद में लगातार दो जुमे की नमाजें नहीं हुई हैं. यह फैसला मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और यरुशलम में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बढ़ने के बीच लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक ईरान और इजरायल के बीच चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष की वजह से शहर के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. ऐसा 1967 के बाद पहली बार हुआ है जब लगातार शुक्रवार की नमाजें नहीं हुईं.

ईरान इजरायल संघर्ष से जुड़ी सुरक्षा चिंता 

इजरायली नागरिक अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों की उस चेतावनी के बाद लिया गया है जिसमें उन्होंने चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान संभावित खतरों की आशंका जताई थी. जवाबी हमलों और बढ़ते तनाव के बाद इजरायली अधिकारियों ने यरुशलम में एक तरह की आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी. इन उपायों के तहत अधिकारियों ने अस्थायी रूप से अल अक्सा मस्जिद परिसर को बंद कर दिया. इसी के साथ उन बड़ी सभाओं पर भी रोक लगा दी जिनसे सुरक्षा को खतरा हो सकता था.

पुराने शहर के दूसरे धार्मिक स्थल भी बंद 

ये पाबंदियां सिर्फ अल अक्सा परिसर तक ही सीमित नहीं थीं. सुरक्षा बलों ने  यरुशलम के पुराने शहर में स्थित दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी बंद कर दिया. इनमें वेस्टर्न वॉल और चर्च ऑफ द होली सेपल्चर शामिल थे. इससे सुरक्षा के बढ़े हुए अलर्ट के दौरान अलग-अलग धर्मों के लोगों के प्रवेश पर प्रभावी रूप से रोक लग गई.

रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाबंदी 

इस फैसले ने खास तौर से इस वजह से ध्यान खींचा है क्योंकि यह रमजान के महीने में हुआ है. इस दौरान आमतौर पर मस्जिद में आने वालों की संख्या ज्यादा होती है. रमजान के दौरान आमतौर पर हजारों की संख्या में लोग शुक्रवार की नमाज और शाम के धार्मिक कार्यक्रमों के लिए इस मस्जिद में इकट्ठा होते हैं. 

मस्जिद में प्रवेश के कड़े नियम 

भले ही मस्जिद में प्रवेश की आंशिक अनुमति दी गई हो लेकिन इसके बाद भी इजरायली अधिकारियों ने मस्जिद जाने के इच्छुक लोगों के लिए प्रवेश पर कड़े नियम लागू किए हैं. मौजूदा दिशा निर्देशों के मुताबिक परिसर में प्रवेश की अनुमति सिर्फ 55 साल से ज्यादा आयु के पुरुष, 50 साल से ज्यादा आयु की महिलाओं और 12 साल से कम आयु के बच्चों को है. 

फिलिस्तीनियों के लिए जरूरी परमिट 

एक और जरूरी शर्त इजरायली अधिकारियों द्वारा जारी विशेष परमिट या इलेक्ट्रॉनिक पहचान पत्रों की जरूरत है. फिलिस्तीनियों को परिसर में प्रवेश करने से पहले यह दस्तावेज प्राप्त करना अनिवार्य है. इस नियम ने नमाज में शामिल होने वाले लोगों की संख्या को और भी ज्यादा सीमित कर दिया है.

इसी के साथ अधिकारियों ने मस्जिद परिसर के अंदर नमाज के समय और नमाजियों की संख्या पर भी  पाबंदियां लगाई हैं. फिलहाल आने वालों को सिर्फ दोपहर और शाम की नमाज के समय ही अंदर रहने की इजाजत दी गई है. उन्हें इफ्तार के लिए मस्जिद परिसर में रुकने की इजाजत नहीं है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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