Iran Shadow Fleet: इतने प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने कैसे की अरबों की कमाई, कैसे काम करती है यहां की शैडो फ्लीट
Iran Shadow Fleet: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर तेल व्यापार पर भी पड़ रहा है. आइए जानते हैं कि ईरान पर अगर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं फिर भी वह तेल एक्सपोर्ट से कैसे कमा रहा है.

Iran Shadow Fleet: जैसे-जैसे ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ रहा है होर्मुज स्ट्रेट के आसपास भी तनाव बढ़ता जा रहा है. यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है. ईरान ने तो यहां तक की चेतावनी दी है कि अगर उसे उकसाया गया तो वह समुद्री रास्तों पर बारूदी सुरंग के बिछा देगा. इतने दबाव और सालों से लगे सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद भी ईरान तेल निर्यात से अरबों कमा रहा है. इसके पीछे काफी रणनीतिक तकनीक इस्तेमाल हो रही है जिसका नाम है शैडो फ्लीट.
प्रतिबंधों के बावजूद अरबों की कमाई
भारी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने 2024 में तेल से अनुमानित $35 से $43 अरब की कमाई की. उसका एक्सपोर्ट लगभग 1.6 से 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया. यह 2018 के बाद से सबसे ज्यादा है. इससे पता चलता है कि प्रतिबंधों ने ईरान की रफ्तार धीमी जरूर की है लेकिन उसे पूरी तरह से रोका नहीं है.
क्या है शैडो फ्लीट?
शैडो फ्लीट को डार्क फ्लीट भी कहा जाता है. यह पुराने और अक्सर बिना किसी नियम-कानून के चलने वाले टैंकरों का नेटवर्क है. इनका इस्तेमाल प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले तेल को गुपचुप तरीके से लाने ले जाने के लिए किया जाता है. ये जहाज सामान्य निगरानी प्रणालियों से बाहर रहकर काम करते हैं. इससे ईरान तेल बेचना जारी रख पाता है और वह भी बिना किसी वैश्विक संस्था द्वारा आसानी से पकड़े गए.
पकड़े जाने से बचने के लिए उपाय
इस्तेमाल की जाने वाली सबसे मेन तकनीक में से एक है ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को बंद कर देना. यह प्रणाली आमतौर पर सुरक्षा और निगरानी करने के लिए जहाज की स्थिति पर नजर रखती है. इसे बंद कर देने से ये जहाज निगरानी प्रणालियों से गायब हो जाते हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उनकी गतिविधियों का पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है.
जहाज से जहाज में तेल की अदला बदली
बंदरगाह पर सीधे तेल लादने के बजाय ईरान अक्सर खुले समुद्र में एक टैंकर से दूसरे टैंकर में तेल डाल देता है. इस प्रक्रिया को जहाज से जहाज में स्थानांतरण के नाम से जाना जाता है. यह तेल के खरीदारों तक पहुंचने से पहले उसके असली मूल को छिपाने में मदद करती है.
पहचान बदलना और तेल की मिलावट
पकड़े जाने से बचने के लिए यह टैंकर अक्सर अपने नाम, मालिकाना हक की जानकारी और अपने राष्ट्रीय झंडे को भी बदल देते हैं. इस तरीके को फ्लैग हॉपिंग कहा जाता है. इसके अलावा ईरानी तेल में अक्सर दूसरे देशों के तेल की मिलावट कर दी जाती है और उसे अलग-अलग नामों से बेचा जाता है.
चीन सबसे बड़ा खरीदार
चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार है. ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा चीन ही खरीदता है. ईरान भारी छूट देता है जिस वजह से यह सौदा चीनी रिफाइनरियों के लिए आकर्षण बन जाता है. फाइनेंशियल बैन से बचने के लिए लेनदेन युआन जैसी गैर डॉलर मुद्रा में किया जाता है.
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Source: IOCL




























