यह है दुनिया का सबसे ठंडा गांव, जानें यहां कैसे रहते हैं लोग?
Coldest Village: दुनिया में एक देश ऐसा भी है जिसका गांव दुनिया का सबसे ठंडा गांव है. आइए जानते हैं कौन सा है वह देश और जानें उस गांव के लोग इतनी ठंड में कैसे रहते हैं.

- पाइप जमने से पानी की समस्या, बाहर शौचालय उपयोग होते।
Coldest Village: एक ऐसी जगह के बारे में सोचिए जहां सर्दियों में तापमान अक्सर -50 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, गाड़ियां बंद नहीं की जा सकती और खुली पलकें भी कुछ ही मिनट के अंदर जम सकती हैं. रूस के साइबेरिया में स्थित एक दूर-दराज गांव, ओइम्याकॉन में रोजमर्रा की जिंदगी ऐसी ही है. इस धरती का सबसे ठंडा गांव माना जाता है. इतने मुश्किल हालातों के बावजूद भी यहां लगभग 500 लोग रहते हैं. उनकी रोजमर्रा की जिंदगी ठंड के हिसाब से ढल गई है, चाहे वह खाना हो, घर को गर्म रखने का तरीका हो या फिर सफर करना और बुनियादी जरूरत को पूरा करना हो.
ओइम्याकॉन में कितनी ठंड पड़ती है?
ओइम्याकॉन में सर्दियां काफी कड़ाके की होती हैं और औसत तापमान -50 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहता है. यहां का तापमान -71.2 डिग्री सेल्सियस तक भी रिकॉर्ड किया गया है. यह इसे इंसानों के रहने वाली जगहों में सबसे कम तापमान वाली जगहों में से एक बनाता है.
इतने कम तापमान में आम काम करना भी मुश्किल हो जाता है. खुली त्वचा पर फ्रॉस्टबाइट का गंभीर खतरा हो सकता है और सांस लेने पर चेहरे के आसपास की नमी भी जम सकती है.

लोग क्या खाते हैं?
यहां फसल उगाना काफी ज्यादा मुश्किल है क्योंकि जमीन साल के ज्यादातर समय जमी रहती है. इस वजह से यहां के लोग पारंपरिक रूप से जानवरों से मिलने वाले खाने पर काफी ज्यादा निर्भर रहते हैं. उनके खाने में घोड़े का मांस, रेनडियर का मांस, जमी हुई मछली और डेयरी उत्पाद शामिल हैं. ये चीजें कैलोरी और फैट देती हैं. यह काफी ज्यादा ठंड में शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए जरूरी है. कुछ पारंपरिक तरीकों से जमी हुई मछली को बिना पकाए भी खाया जा सकता है. इसी के साथ स्थानीय स्तर पर मिलने वाला मांस भी वहां के लोगों के खाने का एक बड़ा हिस्सा है.
गाड़ियां चालू क्यों रखी जाती हैं?
काफी ज्यादा ठंड गाड़ियों के लिए गंभीर समस्या पैदा करती है. अगर इंजन बंद करके ज्यादा देर तक छोड़ दिया जाए तो उसे दोबारा चालू करना काफी मुश्किल हो सकता है क्योंकि मैकेनिकल पार्ट्स और तरल पदार्थ जम सकते हैं.
इस वजह से जब लोगों को लंबे समय तक बाहर रहना होता है तो वह गाड़ियों के इंजन चालू रखते हैं. अगर गर्म गैराज मौजूद हो तो वह भी एक समाधान हो सकते हैं. आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी इतने कम तापमान में ठीक से काम नहीं कर पाते. काफी ज्यादा ठंड में मोबाइल फोन, कैमरे और बैटरी की पावर जल्दी खत्म हो सकती है या फिर वह काम करना बंद कर सकते हैं.
लोगों को पानी कैसे मिलता है?
इतने कम तापमान में आम प्लंबिंग सिस्टम को बनाए रखना मुश्किल होता है क्योंकि पानी और पाइप जम सकते हैं. इस वजह से पारंपरिक अंडरग्राउंड वॉटर सिस्टम के सामने बड़ी चुनौती होती है. वहां रहने वाले लोग सेनिटेशन के लिए वैकल्पिक तरीके जैसे कि घर से बाहर बने टॉयलेट पर निर्भर हो सकते हैं. समुदाय की पानी तक पहुंच वहां के पर्यावरण और इलाके के मशहूर गर्म पानी के झरने से भी गहराई से जुड़ी है.

घर कैसे बनाए जाते हैं?
यहां के घरों को ज्यादा से ज्यादा गर्मी बनाए रखने की जरूरत होती है. इमारत को इस तरह से इंसुलेट किया जाता है कि वह बाहर की जमा देने वाली ठंड से लोगों को बचा सकें. हीटिंग काफी ज्यादा जरूरी है और सबसे ठंडे समय में इसे लगातार चालू रखना पड़ता है. कोयला और लकड़ी हीटिंग के पारंपरिक और जरूरी स्रोत रहे हैं, इनसे लोग घर के अंदर का तापमान ऐसा बनाए रखते हैं जिसमें जिंदा रहा जा सके.
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बाहर रहने वाले लोगों का क्या होता है?
ऐसे हालात में इंसानी शरीर से गर्मी काफी तेजी से निकलती है. जब लोग बाहर निकलते हैं तो उनकी सांस की नमी जम सकती है और पलकों व नाक के बालों पर बर्फ जम सकती है. शरीर का कोई भी खुला हिस्सा तेजी से फ्रॉस्टबाइट और हाइपोथर्मिया का शिकार हो सकता है. इस वजह से लोगों को सही सुरक्षा वाले कपड़े पहनने चाहिए और बाहर की ठंड में कम से कम समय बिताना चाहिए.
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